स्वास्थ्य

Heart Attack Prevention: किसी को भी मौत के पंजे से खींच लाएगी ये जानकारी, जानें हार्ट अटैक आने पर क्या करें…

Heart Attack Prevention: आज भारत में हार्ट अटैक मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर युवाओं में। एक रिपोर्ट बताती है कि भारतीयों में पहला दिल का दौरा पड़ने की औसत उम्र पश्चिमी देशों की तुलना में लगभग 10 साल कम है (cardiac-risk)। आंकड़े बताते हैं कि हर मिनट करीब 4 भारतीय अपनी जान हार्ट अटैक की वजह से गंवा रहे हैं।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. जीवितेश सतीजा के अनुसार, अधिकतर मामलों में मरीज की जान इसलिए चली जाती है क्योंकि आसपास मौजूद लोगों को तत्काल क्या करना चाहिए, इसकी जानकारी नहीं होती। डॉक्टर बताते हैं कि शुरुआती कुछ मिनट अगर सही कदम उठाए जाएं, तो जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

Heart Attack Prevention
Heart Attack Prevention

हार्ट अटैक के शुरुआती संकेत (Heart Attack Prevention) पहचानें

हार्ट अटैक के लक्षणों की समय रहते पहचान बेहद जरूरी है (symptom-awareness)। यदि सीने में भारीपन या दबाव 5 मिनट से ज्यादा बना रहे और यह बीचों-बीच महसूस हो, तो यह गंभीर संकेत है। यह दर्द बाएं हाथ, कंधे, पीठ, जबड़े या गर्दन तक फैल सकता है। साथ ही पसीना आना, घबराहट, चक्कर, मतली और सांस फूलना भी आम लक्षण हैं।
कुछ बुजुर्ग, डायबिटीज मरीज और महिलाओं में साइलेंट हार्ट अटैक भी हो सकता है, जिसमें गैस जैसा बेचैनी, असामान्य कमजोरी या अचानक थकान महसूस होती है। यदि ये संकेत दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल मदद लें।


तुरंत मदद के लिए कॉल करें

ऐसे किसी भी लक्षण दिखने पर 108/112 पर तुरंत कॉल करें और स्पष्ट कहें कि यह संभावित हार्ट अटैक का मामला है (emergency-response)। एम्बुलेंस उसी अस्पताल की भेजें जहां कैथ लैब (एंजियोप्लास्टी) की सुविधा हो। यदि आपका घर कैथ लैब वाले अस्पताल से 5–10 मिनट की दूरी पर है, तो सीधे वहीं जाएं—छोटे अस्पताल में समय न गंवाएं।
अगर एम्बुलेंस में देरी हो रही हो, तो प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करें, लेकिन खुद गाड़ी बिल्कुल ना चलाएं।


एस्पिरिन तुरंत देना क्यों जरूरी है

एम्बुलेंस बुलाने के तुरंत बाद मरीज को 300mg एस्पिरिन चबाकर खिलाएं (aspirin-dose)। डिस्प्रिन जैसी घुलनशील गोली भी दी जा सकती है। रिसर्च बताती है कि सही समय पर एस्पिरिन देने से मौत का खतरा लगभग 23% तक कम हो सकता है।
लेकिन यदि मरीज को एस्पिरिन से एलर्जी है या ब्लीडिंग अल्सर की हिस्ट्री है, तो यह कदम न उठाएं।


मरीज को आरामदायक स्थिति में रखें

मरीज को पूरी तरह सीधा न लिटाएं, बल्कि 45° एंगल पर आधा झुकाकर बैठाएं (patient-comfort)। यह दिल पर पड़ने वाले प्रेशर को कम करता है। कमरे में ताजी हवा आने दें, टाइट कपड़े ढीले करें और मरीज को शांत रहने दें।
यदि डॉक्टर ने पहले से नाइट्रोग्लिसरीन या सॉर्बिट्रेट लेने की सलाह दी है, तो मदद आने तक मरीज इसे ले सकता है—लेकिन तभी जब उसका ब्लड प्रेशर 110 mmHg से ऊपर हो।


सांस और प्रतिक्रिया की लगातार निगरानी करें

जब तक मेडिकल सहायता न पहुंचे, मरीज की सांस, नाड़ी और प्रतिक्रिया पर नजर बनाए रखें (vital-monitoring)। अगर मरीज अचानक रिस्पॉन्स देना बंद कर दे, सांस रुक जाए या नाड़ी न चले, तो यह कार्डियक अरेस्ट है।
लगभग 10–20% हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट में बदल सकते हैं, इसलिए तुरंत सीपीआर शुरू करने की जरूरत होती है।


कार्डियक अरेस्ट में अपनाएं ‘SOS’ प्रोटोकॉल

कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में डॉक्टर द्वारा बताए SOS प्रोटोकॉल का पालन करें (CPR-protocol):

S – Shout for Help: आसपास लोगों को आवाज लगाएं और जगह को सुरक्षित करें।
O – Observe & Assess: मरीज की सांस और प्रतिक्रिया को जांचें।
S – Start CPR: यदि कोई जीवन संकेत न मिले तो तुरंत सीपीआर शुरू करें।


सीपीआर कैसे दें – सही तरीका

सीपीआर देते समय मरीज को पीठ के बल कठोर सतह पर लिटाएं और छाती के बीचों-बीच जोर से, तेज गति से दबाव डालें (life-support)। धक्का लगभग 2 इंच गहराई तक होना चाहिए और इसकी गति 100–120 प्रति मिनट यानी 1 सेकंड में दो बार होनी चाहिए।
सीपीआर तब तक जारी रखें जब तक मेडिकल टीम न आ जाए या मरीज खुद से सांस लेना न शुरू कर दे। रिपोर्टों के अनुसार, हर बीतते मिनट बिना सीपीआर के कार्डियक अरेस्ट मरीज की मौत की संभावना 10% बढ़ जाती है।


हार्ट अटैक के समय होने वाली आम गलतियां

ज्यादातर लोग घबराहट या गलतफहमी में कई गंभीर गलतियां कर देते हैं (health-mistakes):

  • हार्ट अटैक को गैस या एसिडिटी मानकर घंटों इंतजार करना।

  • सोडा, पानी या पेनकिलर लेकर समस्या को हल करने की कोशिश।

  • मरीज की छाती की मालिश करना।

  • मरीज को सीधा लिटा देना या खुद गाड़ी ड्राइव करना।

  • परिवार या पड़ोसियों की सलाह लेते-लेते अस्पताल पहुंचने में देर करना।

  • छोटे क्लीनिकों या नज़दीकी डॉक्टरों के चक्कर में समय बर्बाद करना।

रिपोर्टों के अनुसार, 70% भारतीय मरीज अस्पताल पहुँचने में 2 घंटे से ज्यादा की देरी कर देते हैं, जबकि हार्ट अटैक के इलाज में पहला गोल्डन आवर सबसे महत्वपूर्ण होता है।


निष्कर्ष: जागरूकता ही बचाती है जान

हार्ट अटैक का खतरा अचानक आता है, लेकिन सही समय पर उठाए गए कदम किसी की जान बचा सकते हैं (heart-awareness)। लक्षण पहचानना, सही जगह मदद लेना, एस्पिरिन देना और जरूरत पड़ने पर सीपीआर करना—ये सभी बातें जीवन और मृत्यु के बीच का फर्क तय कर सकती हैं।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.