ICMR Warning: अत्यधिक वर्कआउट और प्रोटीन सप्लीमेंट्स का बढ़ता चलन सेहत के लिए गंभीर खतरा, ICMR ने जारी की चेतावनी
ICMR Warning: वर्तमान समय में फिट दिखने और बॉडी बनाने की होड़ में लोग अपनी शारीरिक सीमाओं से परे जाकर हैवी वर्कआउट कर रहे हैं। जिम में घंटों पसीना बहाने के साथ-साथ जल्दी परिणाम पाने के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट्स का सहारा लेना अब एक आम बात हो गई है। हालांकि, फिटनेस का यह जुनून स्वास्थ्य के लिए वरदान के बजाय अभिशाप बनता जा रहा है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर ने इस विषय पर चिंता व्यक्त करते हुए लोगों को आगाह किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक व्यायाम और सिंथेटिक सप्लीमेंट्स लेने से शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर बुरा असर पड़ रहा है और तीन गंभीर बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।

हृदय स्वास्थ्य पर बढ़ता दबाव और कार्डियक अरेस्ट का जोखिम
आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार, जरूरत से ज्यादा या बहुत अधिक तीव्रता वाला वर्कआउट सीधे तौर पर हृदय की मांसपेशियों पर दबाव डालता है। जब शरीर थक चुका होता है और फिर भी उस पर दबाव बनाया जाता है, तो यह स्थिति कार्डियक अरेस्ट या हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। जिम जाने वाले कई युवा वर्कआउट से पहले एनर्जी बूस्टर और हाई प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेते हैं, जो रक्तचाप और हृदय गति को अचानक बढ़ा देते हैं। यदि आपको बार-बार चिड़चिड़ापन, नींद की कमी या सामान्य से अधिक थकान महसूस हो रही है, तो यह शरीर द्वारा दिया जा रहा चेतावनी संकेत है। ऐसे में भारी वजन उठाने के बजाय शरीर को पर्याप्त विश्राम देना और नियमित अंतराल पर हेल्थ चेकअप कराना अनिवार्य है।
घुटनों और हड्डियों की मजबूती पर गलत एक्सरसाइज का असर
अत्यधिक वजन उठाकर एक्सरसाइज करने या गलत तरीके से पैर से जुड़ी कसरत करने से घुटने और जोड़ों की गंभीर चोटों का खतरा बढ़ गया है। आजकल खराब जीवनशैली के कारण कई लोगों में कैल्शियम की कमी देखी जा रही है, जिससे हड्डियां अंदरूनी रूप से कमजोर हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में बिना सही तकनीक के स्क्वैट्स, लंजेस या लेग प्रेस जैसी एक्सरसाइज करना घुटनों के लिगामेंट को डैमेज कर सकता है या फ्रैक्चर का कारण बन सकता है। हड्डियों के घनत्व में कमी होने के कारण भारी वेट लिफ्टिंग सीधे तौर पर जोड़ों के कार्टिलेज को नष्ट कर रही है, जिससे भविष्य में गठिया या चलने-फिरने में असमर्थता जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
किडनी और लिवर की कार्यक्षमता पर सप्लीमेंट्स का दुष्प्रभाव
प्रोटीन सप्लीमेंट्स का अत्यधिक सेवन शरीर के उत्सर्जन तंत्र यानी किडनी और लिवर पर गहरा प्रभाव डालता है। सप्लीमेंट्स के माध्यम से लिया गया अतिरिक्त प्रोटीन किडनी पर फिल्टरिंग का बोझ बढ़ा देता है, जिससे लंबे समय में किडनी फेलियर या लिवर डैमेज की स्थिति बन सकती है। इनके सेवन से शरीर में पानी की कमी और कैल्शियम का असंतुलन भी पैदा होता है। जब शरीर में कैल्शियम की कमी होती है, तो हड्डियां खोखली होने लगती हैं और उनके टूटने का जोखिम बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कृत्रिम सप्लीमेंट्स पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक स्रोतों से पोषण प्राप्त करना ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए एकमात्र सही मार्ग है।
प्राकृतिक स्रोतों से प्राप्त करें आवश्यक प्रोटीन और पोषण
आईसीएमआर ने सिफारिश की है कि प्रोटीन की दैनिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए हमें सप्लीमेंट्स के बजाय प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देनी चाहिए। मांसाहारी लोग चिकन ब्रेस्ट, मटन और मछलियों (जैसे सैल्मन या टूना) का सेवन कर सकते हैं, जो ओमेगा फैटी एसिड 3 से भी भरपूर होते हैं। शाकाहारियों के लिए दालें, बीन्स, पनीर, ग्रीक योगर्ट और दूध प्रोटीन के बेहतरीन विकल्प हैं। इसके अलावा, रोजाना अंडे का सफेद हिस्सा खाना भी एक सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प है। ध्यान रखें कि किसी भी प्रकार का हैवी वर्कआउट शुरू करने से पहले एक पेशेवर ट्रेनर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है ताकि फिटनेस के नाम पर सेहत के साथ समझौता न हो।



