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स्वास्थ्य

Silent Hernia Symptoms: बिना दर्द वाला हर्निया भी हो सकता है जानलेवा, जानें लक्षण और बचाव के आसान उपाय

Silent Hernia Symptoms: हर्निया एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जिसे लेकर आम धारणा यही है कि इसमें असहनीय दर्द होता है। हालांकि, चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि कई बार यह समस्या पूरी तरह दर्दरहित भी हो सकती है। कानपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के प्रसिद्ध लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. वैभव गुप्ता के अनुसार, जब पेट की दीवार की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, तो अंदरूनी अंग या फैटी टिश्यू उस छेद से बाहर निकलने लगते हैं। चूंकि शुरुआती दौर में (Painless Abdominal Bulge) महसूस नहीं होता, इसलिए मरीज अक्सर इसे मामूली सूजन समझकर टाल देते हैं। यही लापरवाही भविष्य में किसी बड़ी सर्जरी या आपातकालीन स्थिति का कारण बन जाती है।

Silent Hernia Symptoms
Silent Hernia Symptoms

बिना दर्द वाले हर्निया के शुरुआती संकेतों को पहचानें

बिना दर्द वाला हर्निया बहुत ही शांत तरीके से शरीर में विकसित होता है। इसके लक्षणों को पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है क्योंकि यह उभार हमेशा दिखाई नहीं देता। आमतौर पर जब मरीज खड़ा होता है, खांसता है या भारी वजन उठाता है, तब (Umbilical Area Swelling) साफ़ नजर आने लगती है। दिलचस्प बात यह है कि लेटने पर यह उभार अक्सर अपने आप गायब हो जाता है। इसके अलावा, पेट में लगातार भारीपन महसूस होना, खिंचाव का अहसास या लंबे समय तक खड़े रहने पर होने वाली असहजता भी इसी बीमारी की ओर इशारा करती है।

इन लोगों को रहता है हर्निया का सबसे ज्यादा जोखिम

हर्निया किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। जो लोग मोटापे से ग्रस्त हैं या जिनकी उम्र अधिक हो चुकी है, उनकी मांसपेशियां स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा (Chronic Constipation Issues) के कारण पेट पर अधिक जोर लगाने वाले लोगों में भी यह समस्या आम है। गर्भवती महिलाएं, भारी वजन उठाने वाले मजदूर या एथलीट, और वे लोग जिन्हें पुरानी खांसी रहती है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पुरुषों में अक्सर यह जांघ के निचले हिस्से में और महिलाओं में नाभि के आसपास विकसित होता है।

कब यह समस्या बन जाती है एक मेडिकल इमरजेंसी

दर्दरहित हर्निया तब सबसे ज्यादा खतरनाक होता है जब वह अचानक ‘स्ट्रैंगुलेटेड’ स्थिति में पहुँच जाता है। यदि पेट का उभार अचानक सख्त हो जाए, उसमें बहुत तेज़ दर्द होने लगे और वह लेटने पर भी अंदर न जाए, तो समझ लें कि यह (Surgical Emergency Condition) है। ऐसी स्थिति में आंतों को होने वाली रक्त की आपूर्ति रुक सकती है, जिससे ऊतक मर सकते हैं। इसके साथ ही बुखार, उल्टी और जी मिचलाने जैसे लक्षण दिखते ही बिना देर किए अस्पताल जाना चाहिए, क्योंकि इसमें चंद घंटों की देरी भी जान पर भारी पड़ सकती है।

सही समय पर उपचार और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का महत्व

यह समझना बहुत जरूरी है कि हर्निया कभी भी दवाओं या मालिश से अपने आप ठीक नहीं होता है। इसके लिए सर्जरी ही एकमात्र स्थायी समाधान है। आधुनिक तकनीक के आने से अब (Laparoscopic Hernia Repair) बहुत ही सरल और सुरक्षित हो गया है। छोटे छेद के जरिए होने वाली इस सर्जरी में मरीज बहुत जल्दी रिकवर हो जाता है और उसे अस्पताल में ज्यादा दिन नहीं रुकना पड़ता। अगर समय रहते जांच करा ली जाए, तो जटिलताओं से बचा जा सकता है और ऑपरेशन के परिणाम भी अधिक सफल रहते हैं।

हर्निया से बचाव के लिए जीवनशैली में करें ये बदलाव

बचाव हमेशा इलाज से बेहतर होता है, और हर्निया के मामले में यह बात पूरी तरह सटीक बैठती है। अपने वजन को संतुलित रखना और फाइबर से भरपूर भोजन लेना सबसे महत्वपूर्ण है ताकि (Digestive Health Improvement) बनी रहे और कब्ज की समस्या न हो। जिम में वर्कआउट करते समय या घर का भारी सामान उठाते समय झटके से बचने की कोशिश करें। धूम्रपान छोड़ना भी जरूरी है क्योंकि पुरानी खांसी फेफड़ों के साथ-साथ पेट की मांसपेशियों को भी कमजोर करती है। हल्के व्यायाम के जरिए कोर मसल्स को मजबूत बनाकर आप इस बीमारी को कोसों दूर रख सकते हैं।

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