VisceralFat – सख्त पेट की चर्बी क्यों मानी जाती है ज्यादा खतरनाक…
VisceralFat – आजकल पेट के आसपास बढ़ती चर्बी सिर्फ वजन बढ़ने की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि इसे कई गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अधिकतर लोग बेली फैट को केवल बाहरी लुक्स से जोड़ते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पेट पर जमा चर्बी का प्रकार शरीर की अंदरूनी सेहत के बारे में भी संकेत देता है। खासतौर पर मुलायम और सख्त पेट के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हर तरह का बेली फैट एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों का पेट दबाने पर मुलायम महसूस होता है, जबकि कुछ का पेट सख्त दिखाई देता है। डॉक्टरों का कहना है कि यही अंतर भविष्य में होने वाली कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत बन सकता है।
क्या होता है सॉफ्ट बेली फैट
विशेषज्ञों के मुताबिक, मुलायम पेट को आमतौर पर सॉफ्ट बेली फैट कहा जाता है। यह चर्बी त्वचा के ठीक नीचे जमा होती है और हाथ से आसानी से महसूस की जा सकती है। मेडिकल भाषा में इसे Subcutaneous Fat कहा जाता है।
डॉक्टरों का मानना है कि इस तरह की चर्बी का शरीर के मेटाबॉलिज्म पर असर अपेक्षाकृत कम होता है। हालांकि अत्यधिक मात्रा में यह भी नुकसानदायक हो सकती है, लेकिन इसे हार्ड बेली की तुलना में कम जोखिम वाला माना जाता है।
हार्ड बेली फैट क्यों बढ़ाता है खतरा
अगर पेट छूने पर सख्त महसूस होता है, तो यह Visceral Fat का संकेत हो सकता है। यह चर्बी शरीर के अंदरूनी अंगों जैसे लिवर, पैंक्रियाज और आंतों के आसपास जमा होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यही फैट लंबे समय में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, विसरल फैट शरीर में सूजन बढ़ाने वाले केमिकल और स्ट्रेस हार्मोन को सक्रिय कर सकता है। इससे फैटी लिवर, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि सख्त पेट को स्वास्थ्य के लिहाज से ज्यादा चिंता का विषय माना जाता है।
केवल वजन देखना पर्याप्त नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ वजन या BMI के आधार पर स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं किया जा सकता। कई बार व्यक्ति देखने में फिट लगता है, लेकिन शरीर के अंदर विसरल फैट जमा हो सकता है।
ऐसे लोग बाहर से सामान्य दिखने के बावजूद मेटाबॉलिक समस्याओं का सामना कर सकते हैं। डॉक्टरों का मानना है कि शरीर की बनावट के साथ-साथ पेट की चर्बी के प्रकार को समझना भी जरूरी है।
जीवनशैली में बदलाव से मिल सकती है मदद
बेली फैट कम करने के लिए केवल डाइटिंग करना काफी नहीं माना जाता। स्वास्थ्य विशेषज्ञ संतुलित जीवनशैली अपनाने पर जोर देते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि और सही खानपान इस दिशा में अहम भूमिका निभाते हैं।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि खाने में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाई जाए और प्रोसेस्ड फूड कम किया जाए। इसके साथ ही रोजाना एक्सरसाइज या किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी कम करने में मदद कर सकती है।
नींद और तनाव पर भी ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त नींद और तनाव नियंत्रण भी बेली फैट कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। लगातार तनाव में रहने से शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय हो सकते हैं जो पेट के आसपास चर्बी बढ़ाने का कारण बनते हैं।
स्वस्थ दिनचर्या, सही भोजन और नियमित गतिविधि को लंबे समय तक अपनाने से शरीर की फिटनेस बेहतर हो सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते सही कदम उठाने से भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।