Bangladesh Political Unrest 2025: पड़ोसी मुल्क में मचा खूनी कोहराम, शरीफ हादी की मौत के बाद धधक उठा बांग्लादेश
Bangladesh Political Unrest 2025: पड़ोसी देश बांग्लादेश इस वक्त एक ऐसी आग में झुलस रहा है जिसकी तपिश सीमाओं के पार महसूस की जा रही है। कट्टरपंथी और भारत-विरोधी विचारधारा के पैरोकार रहे शरीफ उस्मान हादी की सिंगापुर में मौत के बाद (Massive Protest Outbreak) की लहर ने पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है। गुरुवार रात से शुरू हुई इस अराजकता में उपद्रवियों ने राजधानी ढाका समेत कई बड़े शहरों में जमकर उत्पात मचाया है। हालात इस कदर बेकाबू हो चुके हैं कि कई मीडिया संस्थानों, सांस्कृतिक केंद्रों और यहां तक कि राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान के ऐतिहासिक आवास को भी आग के हवाले कर दिया गया।

नफरत की आग में झुलसती इंसानियत
हिंसा के इस तांडव के बीच एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को सन्न कर दिया है। भीड़ ने कथित ईशनिंदा के गंभीर आरोप लगाकर एक हिंदू व्यक्ति की न केवल (Mob Lynching Incident) को अंजाम दिया, बल्कि क्रूरता की हदें पार करते हुए उसके शव को सार्वजनिक रूप से जला दिया। इस घटना ने पहले से ही जल रहे बांग्लादेश के माहौल को और भी अधिक विस्फोटक बना दिया है, जिससे देश के अल्पसंख्यक समुदायों के बीच गहरा खौफ फैल गया है।
जानलेवा हमला और सिंगापुर में इलाज
शरीफ उस्मान हादी पर यह जानलेवा हमला पिछले सप्ताह ढाका की सड़कों पर सरेआम किया गया था। बाइक सवार नकाबपोश हमलावरों ने उनके चेहरे को निशाना बनाकर गोली चलाई थी, जो आर-पार हो गई थी। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली (Interim Government Oversight) के तहत हादी को एयर एंबुलेंस के जरिए सिंगापुर भेजा गया था ताकि उनकी जान बचाई जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्होंने सिंगापुर के अस्पताल में दम तोड़ दिया, जिसके बाद ढाका में हिंसा की लपटें तेज हो गईं।
हमले से पहले की वो डरावनी भविष्यवाणी
जांच एजेंसियों ने इस पूरे हत्याकांड के पीछे एक गहरी और खौफनाक साजिश का पर्दाफाश किया है। मुख्य आरोपी फैसल करीम ने हमले से ठीक एक रात पहले (Preplanned Execution Plot) का संकेत अपनी गर्लफ्रेंड मारिया अख्तर लीमा को दे दिया था। ढाका के पास सावर स्थित एक रिसॉर्ट में उसने दावा किया था कि अगले दिन कुछ ऐसा होगा जिससे पूरा बांग्लादेश कांप उठेगा। पुलिस इन बयानों को इस हत्याकांड की पूर्व-योजना का सबसे पुख्ता सबूत मान रही है।
छात्र लीग कनेक्शन और संदिग्धों की कुंडली
पुलिसिया जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि मुख्य संदिग्ध फैसल करीम मसूद पूर्व में अवामी लीग की छात्र इकाई ‘छात्र लीग’ का सक्रिय सदस्य रहा है। सुरक्षा बलों ने (Suspect Family Interrogation) के जरिए फैसल की पत्नी साहेदा परवीन और उसकी गर्लफ्रेंड मारिया से कड़ी पूछताछ की है। जांचकर्ताओं का मानना है कि फैसल का हादी के साथ पुराना परिचय था और उसने राजनीतिक प्रतिशोध या किसी बड़े लालच में आकर इस घटना को अंजाम दिया।
20 मास्टरमाइंड और संगठित साजिश का जाल
यह कोई अचानक हुआ हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे 20 से अधिक शातिर दिमाग काम कर रहे थे। जांच में खुलासा हुआ है कि (Organized Crime Networking) के तहत हथियारों की व्यवस्था से लेकर हमलावरों के सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के लिए एक पूरी चेन तैयार की गई थी। एक पूर्व पार्षद को इस पूरी साजिश का मुख्य सूत्रधार बताया जा रहा है, जिसने फंडिंग और लॉजिस्टिक्स की जिम्मेदारी संभाली थी। मोटरसाइकिल पर फर्जी नंबर प्लेट का इस्तेमाल भी इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था।
तालाब से निकले विदेशी हथियारों के जखीरे
रैपिड एक्शन बटालियन (RAB) और पुलिस ने अब तक नौ आरोपियों को दबोचने में सफलता हासिल की है। छापेमारी के दौरान (Illegal Weapon Recovery) का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें नरसिंदी जिले के एक तालाब से दो विदेशी पिस्तौलें, मैगजीन और 41 राउंड गोलियां बरामद की गई हैं। आरोपी फैसल की बहन के घर से भी आपत्तिजनक सामग्री मिली है, जिससे यह साफ होता है कि यह गिरोह एक बड़ी खूनी जंग की तैयारी में जुटा था।
फरार शूटर और भारत से मदद की गुहार
हालांकि कई संदिग्ध हिरासत में हैं, लेकिन मुख्य शूटर फैसल करीम और उसके साथी अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वे सीमा पार कर (Border Infiltration Attempt) के जरिए भारत भाग गए हैं। हालांकि ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने अभी तक भारत जाने के ठोस सबूत नहीं मिलने की बात कही है। बावजूद इसके, यूनुस प्रशासन ने भारत से आधिकारिक तौर पर आरोपियों की गिरफ्तारी और उनके प्रत्यर्पण में सहयोग की मांग की है।
चुनावी भविष्य पर मंडराते काले बादल
बांग्लादेश में फरवरी 2026 में आम चुनाव होने प्रस्तावित हैं, लेकिन हादी की मौत के बाद मची इस तबाही ने (Democratic Transition Crisis) पैदा कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अस्थिरता जल्द नहीं थमी, तो निष्पक्ष चुनाव कराना नामुमकिन हो जाएगा। सड़कों पर पसरा यह सन्नाटा और बीच-बीच में उठती आग की लपटें बांग्लादेश के लोकतंत्र के लिए एक अशुभ संकेत हैं। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें मोहम्मद यूनुस के अगले कदमों पर टिकी हैं कि वे कैसे इस सुलगते देश को शांत करते हैं



