अंतर्राष्ट्रीय

BlackRain – ईरान में तेल ठिकानों पर हमलों के बाद काली बारिश की चेतावनी

BlackRain – पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष के बीच ईरान में एक नई पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी चिंता सामने आई है। हाल ही में तेल भंडारण केंद्रों और एक रिफाइनरी पर हुए हवाई हमलों के बाद राजधानी तेहरान के आसपास के इलाकों में असामान्य रूप से गहरे रंग की बारिश दर्ज की गई है। इस घटना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि इससे मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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तेल ठिकानों पर हमलों के बाद बदला मौसम का स्वरूप

रिपोर्टों के अनुसार पिछले सप्ताह ईरान के कुछ तेल भंडार स्थलों और एक रिफाइनरी पर हवाई हमले हुए थे। इन हमलों के बाद आसमान में घने काले धुएं के गुबार फैल गए, जिनका असर आसपास के क्षेत्रों में भी देखा गया।

इसके कुछ समय बाद तेहरान के आसपास के इलाकों में ऐसी बारिश हुई, जिसमें पानी का रंग सामान्य से अलग और कुछ स्थानों पर तैलीय दिखाई दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि बारिश के बाद कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी महसूस हुई।

लोगों ने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शिकायत की

राजधानी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कई लोगों ने बताया कि इस बारिश के दौरान या उसके तुरंत बाद उन्हें आंखों में चुभन, गले में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं महसूस हुईं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जब तेल भंडार या रिफाइनरी में आग लगती है तो उससे निकलने वाला धुआं और रासायनिक कण वातावरण में फैल जाते हैं। बाद में जब बारिश होती है तो ये कण पानी की बूंदों के साथ मिलकर जमीन पर गिर सकते हैं।

काली बारिश कैसे बनती है

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की बारिश तब होती है जब राख, धुआं और विभिन्न रासायनिक तत्व वातावरण में मौजूद नमी के साथ मिल जाते हैं। जब बादल बनते हैं और वर्षा होती है तो यह मिश्रण पानी के साथ नीचे गिरता है, जिससे बारिश का रंग गहरा या काला दिखाई दे सकता है।

ऐसी घटनाएं तेल क्षेत्रों में लगी आग, बड़े औद्योगिक हादसों, जंगल की आग या ज्वालामुखी विस्फोट जैसी परिस्थितियों में भी देखी जाती रही हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि वातावरण में मौजूद सूक्ष्म कण बहुत छोटे होते हैं और हवा के साथ दूर तक फैल सकते हैं।

सूक्ष्म कणों से स्वास्थ्य जोखिम

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इन धुएं और राख के कणों का आकार बेहद सूक्ष्म होता है। कई बार ये कण मानव बाल की चौड़ाई से भी कई गुना छोटे होते हैं, जिससे वे सांस के साथ शरीर के भीतर गहराई तक पहुंच सकते हैं।

ऐसे कण फेफड़ों में जमा होकर श्वसन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं और कुछ मामलों में रक्त प्रवाह तक भी पहुंच सकते हैं। लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय और श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य एजेंसियों की सावधानी बरतने की सलाह

विश्व स्वास्थ्य संगठन और ईरान के स्वास्थ्य तथा पर्यावरण विभाग से जुड़े अधिकारियों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा है कि जब तक स्थिति सामान्य न हो जाए, लोगों को अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए।

इसके साथ ही मास्क पहनने, बारिश के पानी के सीधे संपर्क से बचने और प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों तथा बुजुर्गों की विशेष देखभाल करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि इस तरह की बारिश में मौजूद रासायनिक तत्व त्वचा और फेफड़ों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

क्षेत्रीय संघर्ष का पर्यावरण पर असर

ईरान और उसके आसपास के क्षेत्रों में जारी सैन्य गतिविधियों के कारण कई जगहों पर धुएं और आग की घटनाएं सामने आई हैं। इससे वातावरण की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष का प्रभाव केवल सुरक्षा और अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और सावधानी दोनों जरूरी मानी जा रही हैं।

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