CoastGuardControversy – ट्रेनिंग सेंटर में नाजी प्रतीक मिलने से हुआ हंगामा
CoastGuardControversy – अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित कोस्ट गार्ड के एक प्रशिक्षण केंद्र में कथित तौर पर नाजी प्रतीक मिलने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। यह चिन्ह एक इमारत की दीवार पर बना पाया गया, जिसकी आकृति जर्मनी के तानाशाह एडॉल्फ हिटलर की नाजी पार्टी से जुड़े चिह्न से मिलती-जुलती बताई गई। मामला सामने आते ही अधिकारियों ने इसे तुरंत हटवा दिया और जांच शुरू कर दी है।

बाथरूम की दीवार पर मिला विवादित चिन्ह
सूत्रों के अनुसार, यह प्रतीक सबसे पहले एक प्रशिक्षक की नजर में आया। बताया गया कि पुरुषों के शौचालय की दीवार पर यह आकृति बनी हुई थी। सूचना मिलते ही कोस्ट गार्ड प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और मामले को कोस्ट गार्ड इन्वेस्टिगेटिव सर्विस को सौंप दिया। केंद्र में मौजूद करीब 900 प्रशिक्षुओं और कर्मचारियों से पूछताछ की गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह कृत्य किसने और किस उद्देश्य से किया।
कोस्ट गार्ड के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि किसी भी प्रकार की नफरत या कट्टर विचारधारा को संस्था में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रतीकों का कोई स्थान सैन्य प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में नहीं है।
स्वास्तिक और नाजी चिह्न पर भ्रम
घटना के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे हिंदू धर्म के पवित्र प्रतीक स्वास्तिक से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि प्रारंभिक रिपोर्टों में इसे नाजी प्रतीक बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों प्रतीकों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अर्थ अलग-अलग हैं। स्वास्तिक को भारत समेत कई प्राचीन सभ्यताओं में शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है। इसके विपरीत, नाजी पार्टी ने 20वीं सदी में इसी आकृति को अपने राजनीतिक एजेंडे के साथ जोड़कर इस्तेमाल किया, जिससे यह नफरत और उग्र राष्ट्रवाद का प्रतीक बन गया।
इतिहासकार बताते हैं कि 1920 के दशक में हिटलर ने जब नाजी ध्वज तैयार किया, तब लाल, काले और सफेद रंगों के साथ इस चिन्ह को जोड़ा गया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह प्रतीक व्यापक रूप से नाजी प्रचार में इस्तेमाल हुआ और बाद में घृणा का चिह्न बन गया।
कई देशों में प्रतिबंधित है यह प्रतीक
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी में नाजी संगठनों और उनके प्रतीकों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। आज भी जर्मनी और कई यूरोपीय देशों में सार्वजनिक रूप से नाजी प्रतीक प्रदर्शित करना दंडनीय अपराध है। इंटरनेट पर भी इसके प्रदर्शन पर सख्त कानूनी प्रावधान लागू हैं। अमेरिका में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत ऐसे प्रतीकों पर सीधा प्रतिबंध नहीं है, लेकिन इन्हें व्यापक रूप से घृणा फैलाने वाले चिन्ह के रूप में देखा जाता है।
सख्त संदेश देने की कोशिश
कोस्ट गार्ड प्रशासन ने साफ किया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। अधिकारियों का कहना है कि सैन्य प्रशिक्षण संस्थान अनुशासन, विविधता और सम्मान के सिद्धांतों पर चलते हैं। ऐसे किसी भी कृत्य से संस्था की छवि को नुकसान पहुंचता है।
फिलहाल जांच जारी है और अधिकारियों ने कहा है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाएगी।



