T20WorldCup – सुपर 8 में हार के बाद सहवाग ने कोहली को किया याद
T20WorldCup – टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर 8 मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली करारी हार के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने टीम इंडिया के प्रदर्शन पर खुलकर अपनी बात रखी। 76 रनों से मिली इस शिकस्त ने न सिर्फ खिलाड़ियों के आत्मविश्वास को झटका दिया है, बल्कि सेमीफाइनल की राह भी मुश्किल कर दी है। सहवाग ने खास तौर पर विराट कोहली का जिक्र करते हुए कहा कि बड़े लक्ष्यों का पीछा करने में उनकी भूमिका अक्सर निर्णायक रही है। उनका मानना है कि जब भी टीम ने 160 से ज्यादा का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया, तब कोहली की पारी ने अंतर पैदा किया।

बड़े लक्ष्य और कोहली का प्रभाव
सहवाग ने याद दिलाया कि टी20 वर्ल्ड कप जैसे दबाव भरे टूर्नामेंट में 160 से ऊपर का स्कोर आसान नहीं होता। उनके अनुसार, भारत ने ऐसे लक्ष्य तभी हासिल किए जब विराट कोहली ने जिम्मेदारी उठाई और अंत तक टिके रहे। कई मौकों पर उन्होंने नाबाद रहते हुए टीम को जीत दिलाई, चाहे पारी 50 रनों की हो या 80 की। सहवाग का सवाल साफ था—दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में आखिर कौन खिलाड़ी अंत तक खड़ा रहा? किसने मैच को फिनिश करने की जिम्मेदारी ली? उनके मुताबिक, सिर्फ अच्छी शुरुआत काफी नहीं होती, मुकाबला तब जीता जाता है जब कोई बल्लेबाज आखिरी ओवर तक डटा रहे।
जिम्मेदारी लेने का मौका, लेकिन नतीजा निराशाजनक
पूर्व सलामी बल्लेबाज ने यह भी कहा कि इस मैच में कई खिलाड़ियों के पास खुद को साबित करने का सुनहरा अवसर था। तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव, शिवम दुबे और हार्दिक पांड्या जैसे बल्लेबाजों से उम्मीद थी कि वे परिस्थिति के मुताबिक खेल दिखाएंगे। सहवाग का मानना है कि टीम को हर दौर में एक ऐसे खिलाड़ी की जरूरत होती है जो मुश्किल हालात में संयम और आक्रामकता के बीच संतुलन बनाए। उन्होंने संकेत दिया कि किसी न किसी को कोहली की तरह मैच खत्म करने की कला सीखनी होगी, वरना बड़े टूर्नामेंट में आगे बढ़ना कठिन हो जाएगा।
स्ट्राइक रेट बनाम मैच की जरूरत
सहवाग ने आधुनिक क्रिकेट में स्ट्राइक रेट पर हो रही चर्चा पर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि तेज रन बनाना जरूरी है, लेकिन लक्ष्य का पीछा करते समय हालात को समझना उससे भी ज्यादा अहम है। जब स्कोरबोर्ड पर बड़ा लक्ष्य सामने हो, तब बल्लेबाज को परिस्थिति के अनुसार रणनीति बदलनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि जिद में आकर सिर्फ तेज खेलने की कोशिश कई बार उल्टा असर डाल सकती है। जरूरी यह है कि खिलाड़ी पारी को आगे बढ़ाए और टीम को जीत की ओर ले जाए।
सूर्यकुमार यादव की पारी पर सवाल
सहवाग ने विशेष रूप से सूर्यकुमार यादव की बल्लेबाजी का जिक्र किया। उन्होंने महसूस किया कि इस मुकाबले में सूर्यकुमार अपने स्वाभाविक अंदाज में नजर नहीं आए। आम तौर पर आक्रामक और आत्मविश्वास से भरे दिखने वाले सूर्यकुमार इस बार दबाव में खेले। सहवाग के मुताबिक, ऐसा लग रहा था कि वे जोखिम लेने से बच रहे थे, जबकि टीम को उसी समय निर्भीक बल्लेबाजी की जरूरत थी। उनका मानना है कि अगर शीर्ष क्रम का बल्लेबाज दबाव में आ जाए तो मध्यक्रम पर अतिरिक्त बोझ पड़ जाता है।
आगे की राह और टीम के लिए सबक
इस हार ने टीम इंडिया के लिए कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सेमीफाइनल की संभावना अब अन्य नतीजों पर भी निर्भर करती है। सहवाग का संकेत साफ है—टीम को मानसिक मजबूती और मैच फिनिश करने की क्षमता पर काम करना होगा। बड़े टूर्नामेंट में वही टीम आगे बढ़ती है जो दबाव में भी स्पष्ट सोच के साथ खेलती है। भारतीय बल्लेबाजी क्रम में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन उसे परिणाम में बदलना जरूरी है। आने वाले मुकाबलों में खिलाड़ियों को निडर होकर खेलना होगा और जिम्मेदारी उठानी होगी, तभी टीम वापसी कर सकती है।



