अंतर्राष्ट्रीय

EuropePolitics – मैक्रों और मेलोनी के बीच तीखी नोकझोंक

EuropePolitics – फ्रांस और इटली के शीर्ष नेताओं के बीच हाल ही में बयानबाजी को लेकर तनाव की स्थिति बन गई। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच यह विवाद फ्रांस में एक युवा दक्षिणपंथी कार्यकर्ता की मौत पर आई प्रतिक्रिया के बाद सामने आया। मामला इतना बढ़ा कि मेलोनी को अपनी टिप्पणी पर सफाई देते हुए खेद जताना पड़ा।

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फ्रांस में हुई घटना से शुरू हुआ विवाद

विवाद की जड़ फ्रांस के ल्योन शहर में हुई एक हिंसक घटना है। 23 वर्षीय क्वेंटिन डेरांके की पिछले सप्ताह एक विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान गंभीर चोट लगने से मौत हो गई थी। प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह टकराव दक्षिणपंथी और वामपंथी समूहों के बीच हुआ था। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए 11 संदिग्धों में से अधिकांश कथित तौर पर वामपंथी विचारधारा से जुड़े बताए जा रहे हैं। इस घटना ने फ्रांस में राजनीतिक माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

चुनावी माहौल में बढ़ा राजनीतिक तापमान

फ्रांस में मार्च में होने वाले नगर निकाय चुनाव और 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विभिन्न दलों ने इसे कानून-व्यवस्था और विचारधारात्मक टकराव के संदर्भ में उठाया है। इसी बीच इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में इस हत्या को “पूरे यूरोप के लिए घाव” बताया। उनके इस बयान को फ्रांस के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी के रूप में देखा गया।

नई दिल्ली में मैक्रों की प्रतिक्रिया

भारत यात्रा पर आए राष्ट्रपति मैक्रों से जब इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि हर देश को अपने मामलों में सीमित रहना चाहिए। उन्होंने हिंसा की किसी भी रूप में निंदा करते हुए स्पष्ट किया कि फ्रांस में ऐसी गतिविधियों के लिए कोई स्थान नहीं है जो कानून को चुनौती देती हों। मैक्रों ने यह भी कहा कि जो राजनीतिक ताकतें अक्सर राष्ट्रीय संप्रभुता की बात करती हैं, वे ही दूसरे देशों की घटनाओं पर टिप्पणी करने में आगे रहती हैं। उनका यह बयान मेलोनी की टिप्पणी के जवाब के रूप में देखा गया।

मेलोनी ने दी सफाई

विवाद गहराने के बाद जॉर्जिया मेलोनी ने अपने बयान पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने एक टेलीविजन साक्षात्कार में कहा कि उनका उद्देश्य फ्रांस के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं था, बल्कि पीड़ित के प्रति संवेदना और यूरोपीय एकजुटता व्यक्त करना था। मेलोनी ने कहा कि यदि उनके बयान को गलत अर्थ में लिया गया है तो उन्हें इसका खेद है। उनके मुताबिक, उन्होंने केवल हिंसा की निंदा की थी और इसे व्यापक यूरोपीय संदर्भ में देखा था।

यूरोपीय राजनीति पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रकरण यूरोप में बढ़ते वैचारिक ध्रुवीकरण को भी दर्शाता है। दक्षिणपंथी और वामपंथी विचारधाराओं के बीच टकराव कई देशों में राजनीतिक विमर्श को प्रभावित कर रहा है। फ्रांस और इटली दोनों ही यूरोपीय संघ के प्रमुख सदस्य हैं, इसलिए उनके नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेदों को कूटनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जाता है। हालांकि दोनों देशों के बीच आधिकारिक संबंधों पर किसी बड़े असर के संकेत नहीं हैं, लेकिन इस घटनाक्रम ने राजनीतिक बयानबाजी की संवेदनशीलता को उजागर किया है।

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