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IranWar – सीजफायर से इनकार, ईरान बोला जरूरत पड़ी तो जारी रहेगा युद्ध…

IranWar – पश्चिम एशिया में जारी सैन्य टकराव के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल युद्ध रोकने या बातचीत शुरू करने का कोई प्रस्ताव उसकी ओर से नहीं दिया गया है। ईरानी नेतृत्व का कहना है कि मौजूदा हालात में उनकी सशस्त्र सेनाएं संघर्ष को तब तक जारी रखेंगी, जब तक उसे आवश्यक समझा जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है।

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विदेश मंत्री का स्पष्ट बयान

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक बयान में कहा कि देश ने न तो किसी तरह के सीजफायर की मांग की है और न ही बातचीत शुरू करने की पहल की है। उनके अनुसार, युद्ध की स्थिति में ईरान की सैन्य ताकतें अपनी रणनीति के तहत कार्रवाई जारी रखेंगी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह टिप्पणी उस समय आई है जब लगभग तीन सप्ताह से ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच सैन्य तनाव बना हुआ है। इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि ईरान ने इस समुद्री मार्ग को औपचारिक रूप से बंद नहीं किया है। उनके अनुसार, क्षेत्र में बढ़ी सैन्य गतिविधियों और हमलों के कारण सुरक्षा जोखिम बढ़ गया है, जिसकी वजह से कई जहाज इस रास्ते से गुजरने से बच रहे हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि कुछ देशों ने अपने व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराने को लेकर ईरान से संपर्क किया है। हालांकि, इस तरह के निर्णय सैन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिए जाते हैं और अंतिम फैसला ईरानी सशस्त्र बलों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। वर्तमान तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, इस समुद्री मार्ग के आसपास कई जहाज फंसे हुए हैं और कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने संचालन को अस्थायी रूप से रोक दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है और कई देशों में ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

क्षेत्रीय संघर्ष का दायरा बढ़ा

मौजूदा संघर्ष की शुरुआत फरवरी के अंत में हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल ने यह कहते हुए ईरान के कुछ परमाणु और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया कि यह कार्रवाई क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के मद्देनजर की गई है। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कई ठिकानों पर हमले किए।

इन घटनाओं के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ गया और कई पड़ोसी देश भी इसकी चपेट में आ गए। इससे क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

पड़ोसी देशों पर हमलों की खबरें

संघर्ष के दौरान ईरान की ओर से कई देशों की दिशा में मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान की दिशा में भी हमले किए गए।

ईरान का कहना है कि उसके निशाने मुख्य रूप से अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे, लेकिन कुछ स्थानों पर नागरिक क्षेत्रों और हवाई अड्डों के आसपास भी हमलों की सूचना मिली है। क्षेत्र के कई देशों ने सुरक्षा अलर्ट जारी कर अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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