QuadDiplomacy – क्वाड में शुरू हुई भारत की भूमिका और अमेरिका संग रिश्तों पर नई चर्चा
QuadDiplomacy – क्वाड समूह को लेकर एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है, और इस बार फोकस भारत की भूमिका पर है। अमेरिका के पूर्व उप विदेश मंत्री कर्ट एम कैम्पबेल ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि चार देशों के इस अहम समूह को आगे बढ़ाने में भारत ने केंद्रीय भूमिका निभाई। उनके बयान ने यह संकेत दिया कि क्वाड के गठन और उसके विस्तार में भारत की सक्रियता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है।

क्वाड में भारत की अहम भागीदारी पर बयान
हडसन इंस्टीट्यूट में आयोजित एक कार्यक्रम में कैम्पबेल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि क्वाड को आकार देने में सबसे ज्यादा पर्दे के पीछे काम भारत ने किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम धारणा के विपरीत, इस समूह को मजबूत बनाने में न तो अमेरिका और न ही जापान या ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे थे, बल्कि भारत ने महत्वपूर्ण पहल की। यह बयान ऐसे समय आया है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को लेकर कई नई चर्चाएं चल रही हैं।
बाइडेन और मोदी के बीच बातचीत का उल्लेख
कैम्पबेल ने उस दौर को भी याद किया जब क्वाड को नेता स्तर पर ले जाने की पहल हो रही थी। उन्होंने बताया कि उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस पहल में शामिल होने के लिए काफी समय तक समझाया। उनके अनुसार, शुरुआती हिचकिचाहट के बावजूद अंततः भारत ने इस पहल का समर्थन किया, जो बाद में एक मजबूत रणनीतिक मंच के रूप में उभरा। इस बयान से यह भी संकेत मिलता है कि वैश्विक मंचों पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अक्सर जटिल और बहुस्तरीय होती है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर चिंता जताई
अपने संबोधन में कैम्पबेल ने मौजूदा भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चिंता भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के दौर में दोनों देशों को एक-दूसरे के प्रति सम्मान जैसी मूलभूत बातों की याद दिलानी पड़ रही है, जो पहले स्वाभाविक रूप से मौजूद थी। उनका मानना है कि किसी भी मजबूत साझेदारी की नींव आपसी सम्मान और विश्वास पर टिकती है, और यदि उसमें दरार आती है तो दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकते हैं।
हालिया विवादों ने बढ़ाई दूरी
पिछले कुछ समय में भारत और अमेरिका के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए हैं, जिनमें रूसी तेल की खरीद, व्यापारिक टैरिफ और हाल ही में दिए गए कुछ राजनीतिक बयान शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने इस तनाव को और बढ़ा दिया, जिसमें भारत और चीन को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इस बयान पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसे अनुचित बताया।
भारत की सख्त प्रतिक्रिया और स्पष्टीकरण
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी टिप्पणियां न केवल अनुचित हैं, बल्कि वे दोनों देशों के वास्तविक संबंधों को भी नहीं दर्शातीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध लंबे समय से साझा हितों और आपसी सम्मान पर आधारित रहे हैं। साथ ही, अमेरिकी पक्ष की ओर से भी बाद में स्थिति को संभालने की कोशिश की गई और भारत को एक महत्वपूर्ण साझेदार बताया गया।
भविष्य की दिशा पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बयानों और घटनाओं के बावजूद भारत और अमेरिका के रिश्ते पूरी तरह कमजोर नहीं हुए हैं, बल्कि यह एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां संवाद और संतुलन की आवश्यकता अधिक है। क्वाड जैसे मंच इस सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है।