BirsaJailInspection – रांची जेल में जाति आधारित भेदभाव की जांच
BirsaJailInspection – रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में बंदियों को जाति के आधार पर अलग रखने की शिकायत सामने आने के बाद सोमवार को बोर्ड ऑफ विजिटर्स और जिला विधिक सेवा प्राधिकार की संयुक्त टीम ने औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान अधिकारियों ने जेल परिसर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और बंदियों से भी बातचीत की। प्रारंभिक समीक्षा में जाति के आधार पर किसी तरह का अलगाव या भेदभावपूर्ण व्यवस्था पाए जाने की पुष्टि नहीं हुई।

निरीक्षण का उद्देश्य और टीम की संरचना
डालसा के सचिव राकेश रौशन ने बताया कि निरीक्षण का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना था कि कारागार में सभी बंदियों के साथ समान व्यवहार हो रहा है या नहीं। यह भी देखा गया कि कहीं किसी विशेष वर्ग के कैदियों से अलग प्रकार का काम तो नहीं लिया जा रहा। निरीक्षण दल में अपर न्यायायुक्त अमित शेखर, एसडीओ कुमार रजक, जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर, एलएडीसी चीफ पीके श्रीवास्तव सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। यह कदम उच्च स्तर के निर्देशों के तहत उठाया गया था, ताकि कारागार प्रशासन की पारदर्शिता बनी रहे।
भोजन, साफ-सफाई और सुविधाओं की समीक्षा
संयुक्त टीम ने जेल के रसोईघर, बैरकों और अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। अधिकारियों ने भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई और बंदियों के दैनिक जीवन से जुड़ी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया। लाइब्रेरी का निरीक्षण कर पुस्तकों की उपलब्धता और व्यवस्था की जानकारी ली गई। साथ ही परिसर में स्वच्छता बनाए रखने और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। महिला बंदियों के साथ रह रहे बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और जेल डिस्पेंसरी में नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।
पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर
अधिकारियों का कहना है कि कारागार प्रशासन को लेकर किसी भी तरह की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है। निरीक्षण के दौरान बंदियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया गया। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण को नियमित निगरानी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
पिछले वर्ष वायरल वीडियो से बढ़ी थी निगरानी
बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार इससे पहले भी चर्चा में आ चुका है। पिछले वर्ष जेल परिसर के भीतर दो कैदियों के नृत्य का एक वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी। मामले की जानकारी मिलते ही संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में सहायक जेलर और एक वार्डर को निलंबित कर दिया गया था। इस घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।
उच्च न्यायालय ने लिया था स्वतः संज्ञान
वीडियो प्रकरण के बाद झारखंड उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी। अदालत ने उस समय टिप्पणी की थी कि ऐसी घटनाएं जेल अनुशासन पर गंभीर प्रश्न उठाती हैं। न्यायालय ने प्रशासन से जवाब तलब किया था और व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए थे। बताया गया था कि वीडियो में दिखाई देने वाले कैदी एक बहुचर्चित मामले में न्यायिक हिरासत में थे।
वर्तमान स्थिति और आगे की दिशा
ताजा निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि कारागार में समानता और नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। जेल प्रशासन ने भी कहा है कि किसी प्रकार के भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगरानी और निरीक्षण की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी, ताकि बंदियों के अधिकारों और कानून व्यवस्था दोनों की रक्षा की जा सके।



