झारखण्ड

JalJeevanMission – जेजेएम 2.0 में फंड जारी करने से पहले राज्य की जिम्मेदारी तय

JalJeevanMission – जल जीवन मिशन के दूसरे चरण को लागू करने से पहले केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, केंद्र सरकार से फंड प्राप्त करने से पहले राज्य सरकार को अपने हिस्से की राशि जारी करनी होगी। यह शर्त जेजेएम 2.0 के तहत अनिवार्य कर दी गई है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में संतुलन और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

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केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग का ढांचा

इस योजना के तहत बचे हुए कार्यों को पूरा करने के लिए कुल 10,781.54 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है। इसमें केंद्र का हिस्सा 6,270.37 करोड़ रुपये है, जबकि राज्य सरकार को 4,511.17 करोड़ रुपये का योगदान देना होगा। अधिकारियों के अनुसार, जब तक राज्य अपनी हिस्सेदारी जारी नहीं करेगा, तब तक केंद्र से धनराशि जारी नहीं की जाएगी।

समझौते के बाद ही शुरू होगा अगला चरण

जेजेएम 2.0 को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय और राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच औपचारिक समझौता आवश्यक होगा। इसके लिए पहले राज्य सरकार को अपनी कैबिनेट से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे योजना के अगले चरण को लागू करने का रास्ता साफ होगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी अहम शर्त

इस योजना में डिजिटल मॉनिटरिंग को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत ‘सुजलम भारत’ नामक राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सभी संबंधित इकाइयों की पहचान दर्ज करना जरूरी होगा। विभाग को इस प्लेटफॉर्म पर 100 प्रतिशत आईडी निर्माण सुनिश्चित करना है। फिलहाल यह प्रक्रिया आंशिक रूप से पूरी हो पाई है और इसे तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्र ने दिए स्पष्ट निर्देश

हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्य के संबंधित विभागों के साथ बैठक कर योजना से जुड़ी शर्तों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने राज्य को जल्द से जल्द आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने और समझौते की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।

योजना की प्रगति और खर्च का आंकलन

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जल जीवन मिशन की कुल परियोजना लागत 24,665.30 करोड़ रुपये है। इसमें केंद्र और राज्य दोनों का योगदान लगभग बराबर रखा गया है। अब तक बड़ी राशि जारी की जा चुकी है और अधिकांश धनराशि का उपयोग भी हो चुका है।

हालांकि, शेष कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी पर्याप्त संसाधनों की आवश्यकता है। ऐसे में जेजेएम 2.0 के तहत नई शर्तों के साथ योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति को बेहतर और स्थायी बनाया जा सके।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल फंड जारी करना नहीं, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना भी है। केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर निगरानी बढ़ाने के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग इस दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से परियोजनाओं की गति तेज होगी और ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य समय पर पूरा किया जा सकेगा।

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