MaoistLeader – एक करोड़ के इनामी किशन दा की इलाज के दौरान मौत
MaoistLeader – प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े वरिष्ठ नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का शुक्रवार सुबह इलाज के दौरान निधन हो गया। वे रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद थे और लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। जेल प्रशासन के अनुसार, अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तड़के अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार तड़के करीब चार बजे उनकी तबीयत तेजी से खराब हुई। इसके बाद उन्हें तत्काल रिम्स अस्पताल ले जाया गया, जहां सुबह करीब छह बजे उनकी मृत्यु हो गई। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और कानूनी प्रक्रिया के तहत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया।
पोस्टमार्टम मेडिकल बोर्ड की निगरानी में दंडाधिकारी की मौजूदगी में किया गया। इसके बाद शव को सुरक्षित रख लिया गया है और आगे की प्रक्रिया के तहत अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है।
लंबे समय से जेल में थे बंद
प्रशांत बोस को वर्ष 2021 में सरायकेला-खरसावां जिले के कांड्रा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था। उस समय वे अपनी पत्नी शीला मरांडी के साथ थे, जिन्हें भी सुरक्षा बलों ने हिरासत में लिया था। गिरफ्तारी के समय बोस पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जो उनकी संगठन में अहम भूमिका को दर्शाता है।
बताया जाता है कि गिरफ्तारी के समय वे स्वास्थ्य कारणों से यात्रा पर थे। उनके साथ अन्य माओवादी सदस्यों को भी पकड़ा गया था, जिनमें सुरक्षा से जुड़े लोग शामिल थे।
नक्सल आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका
प्रशांत बोस को माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व में गिना जाता था। वे पोलित ब्यूरो के सदस्य रह चुके थे और कई राज्यों में संगठन के विस्तार में उनकी सक्रिय भूमिका बताई जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, झारखंड समेत विभिन्न राज्यों में उनके खिलाफ कई गंभीर मामले दर्ज थे।
उनकी पत्नी शीला मरांडी भी संगठन की केंद्रीय समिति से जुड़ी रही हैं और महिला विंग में सक्रिय भूमिका निभाती थीं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा नाम
किशन दा लंबे समय तक सुरक्षा एजेंसियों की सूची में शीर्ष वांछित व्यक्तियों में शामिल रहे। उन पर कई नक्सली गतिविधियों में संलिप्तता के आरोप थे और अलग-अलग राज्यों में उनके खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या काफी अधिक बताई जाती है।
उनकी गिरफ्तारी को सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता माना गया था। वहीं अब उनकी मौत के बाद सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर आगे की रणनीति को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।



