MedicalEducation – झारखंड में मेडिकल सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव, विशेषज्ञों की कमी दूर करने की पहल
MedicalEducation – झारखंड सरकार ने राज्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है। विभिन्न सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग को भेजा गया है। इस पहल का उद्देश्य राज्य में चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करना और भविष्य में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

नए मेडिकल कॉलेजों में पीजी कोर्स शुरू करने की तैयारी
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, राज्य के तीन नए मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत दुमका, हजारीबाग और पलामू मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग विषयों में सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक, दुमका और पलामू में 21-21 तथा हजारीबाग में 30 सीटें बढ़ाने की सिफारिश की गई है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इन कॉलेजों में पहली बार पीजी स्तर की पढ़ाई शुरू हो सकेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार किए जा सकेंगे।
स्नातक सीटों में भी बढ़ोतरी की योजना
राज्य सरकार ने केवल पीजी ही नहीं, बल्कि एमबीबीएस स्तर की सीटें बढ़ाने पर भी जोर दिया है। जमशेदपुर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज में इस वर्ष सीटों की संख्या 100 से बढ़ाकर 150 कर दी गई है।
इसी तर्ज पर दुमका, हजारीबाग और धनबाद के मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों को 100 से बढ़ाकर 150 करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इससे मेडिकल शिक्षा में अधिक छात्रों को अवसर मिलेगा और राज्य के भीतर ही पढ़ाई की सुविधा बढ़ेगी।
रिम्स में भी सीट बढ़ाने की पहल
रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में भी सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है। यहां स्नातक सीटों को 180 से बढ़ाकर 250 करने का प्रस्ताव राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग के पास भेजा गया है।
इसके अलावा जमशेदपुर और धनबाद में स्नातकोत्तर सीटों में भी बढ़ोतरी की सिफारिश की गई है। इन प्रस्तावों के स्वीकृत होने के बाद राज्य के मेडिकल कॉलेजों में कुल सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन प्रस्तावों के लागू होने से राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को काफी हद तक दूर किया जा सकेगा। वर्तमान में कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता सीमित है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है।
सीटों में वृद्धि के बाद स्थानीय स्तर पर ही अधिक डॉक्टर तैयार होंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होंगी और लोगों को समय पर उपचार मिल सकेगा।
बेहतर चिकित्सा व्यवस्था की दिशा में कदम
सरकार का मानना है कि मेडिकल शिक्षा में निवेश बढ़ाने से दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इससे न केवल स्वास्थ्य ढांचा मजबूत होगा, बल्कि राज्य के युवाओं को भी चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। प्रस्ताव मंजूर होने के बाद राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद की जा रही है।



