POCSOCase – चतरा में नाबालिग अपहरण मामले में दोषी को मिली 20 साल की सजा
POCSOCase – झारखंड के चतरा जिले की एक विशेष अदालत ने नाबालिग से जुड़े गंभीर अपराध में सख्त रुख अपनाते हुए दोषी को लंबी सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष पोक्सो न्यायालय के न्यायाधीश अमरेश कुमार ने इस मामले में दोषी रंजन कुमार दास को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा दी है। अदालत ने इसके साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि दोषी जुर्माना अदा नहीं करता है तो उसे अतिरिक्त तीन महीने की सजा भुगतनी होगी।

अदालत ने अन्य धाराओं में भी सुनाई सजा
अदालत ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 366ए के तहत भी दोषी को सात वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। न्यायालय के आदेश के अनुसार, दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। यह फैसला लंबे समय तक चली सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद सुनाया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक अमित कुमार श्रीवास्तव ने मामले को मजबूती से अदालत के सामने रखा और कुल नौ गवाहों के बयान दर्ज कराए, जिनके आधार पर अदालत ने दोष सिद्ध माना।
शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच
मामले की शुरुआत दिसंबर 2022 में हुई थी, जब हंटरगंज थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, 13 दिसंबर की दोपहर वह अपने खेत पर काम करने गया था। जब वह कुछ देर बाद घर लौटा तो उसकी बेटी घर पर नहीं थी। परिवार ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला।
जांच में सामने आया आरोपी का नाम
परिजनों की खोजबीन और स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि रंजन कुमार दास लड़की को अपने साथ बाइक पर ले गया था। पुलिस जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस घटना में आरोपी को उसके एक साथी का सहयोग मिला था। सह-आरोपी की भूमिका को भी जांच में शामिल किया गया और पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी गईं।
साक्ष्यों के आधार पर हुआ दोष सिद्ध
जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने यह भी माना कि मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण गंभीर श्रेणी में आता है और इसमें कठोर सजा आवश्यक है। इस फैसले को बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।



