EvacuationUpdate – पश्चिम एशिया संकट के बीच लाखों भारतीयों की हुई वापसी
EvacuationUpdate – पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी को प्राथमिकता देते हुए अब तक करीब 2.44 लाख लोगों को स्वदेश पहुंचाया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए इस अभियान के तहत लगातार समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। इस दौरान पांच भारतीय नागरिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता बताया जा रहा है। हाल ही में ओमान के सोहार शहर में हुई एक घटना में जान गंवाने वाले दो भारतीयों के पार्थिव शरीर भारत लाए गए और जयपुर में उनके परिवारों को सौंप दिए गए।

वापसी अभियान की मौजूदा स्थिति
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि ईरान से निकाले गए भारतीयों को सुरक्षित रास्तों से अन्य देशों के जरिए वापस लाया जा रहा है। हाल के दिनों में छात्रों समेत लगभग 650 भारतीय नागरिक आर्मेनिया और अजरबैजान पहुंचे थे, जहां से उनकी घर वापसी की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके अलावा करीब 50 और भारतीय आर्मेनिया पहुंचे हैं, जबकि कुछ अन्य अजरबैजान में सुरक्षित ठिकानों तक पहुंच चुके हैं। ईरान से गए 284 तीर्थयात्रियों को भी सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें से 130 के दिल्ली पहुंचने की पुष्टि की गई है।
नियंत्रण कक्ष और सहायता व्यवस्था
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस पूरे अभियान के लिए स्थापित नियंत्रण कक्ष पूरी तरह सक्रिय है और लगातार नागरिकों की सहायता कर रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआत में बड़ी संख्या में फोन कॉल और ईमेल आ रहे थे, लेकिन अब इनमें कमी आई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण में आ रही है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास और मिशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी नागरिक को सहायता की आवश्यकता होने पर तुरंत मदद मिल सके।
अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और भारत का रुख
पश्चिम एशिया में बढ़ते इस संघर्ष की पृष्ठभूमि में कई वैश्विक शक्तियां सीधे तौर पर शामिल हैं। ऐसे में भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह कूटनीति और संवाद के जरिए समाधान का पक्षधर है। जायसवाल के अनुसार, भारत ने सभी संबंधित देशों से संयम बरतने और तनाव को और न बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने यह भी बताया कि ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंचों पर विभिन्न देशों के अलग-अलग रुख के कारण सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन भारत सभी पक्षों के साथ संपर्क बनाए हुए है।
संघर्ष की पृष्ठभूमि और प्रभाव
28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ा। इसके जवाब में ईरान ने कुछ खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित करने की कोशिश की। इस स्थिति का असर न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ा, बल्कि वहां रह रहे विदेशी नागरिकों, खासकर भारतीयों के लिए भी जोखिम बढ़ गया। इसी कारण भारत सरकार ने तत्काल राहत और निकासी अभियान तेज कर दिया।
राजनयिक स्तर पर सक्रियता
इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर की ब्रसेल्स यात्रा भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उन्होंने यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक कर मौजूदा हालात पर चर्चा की। इस वार्ता में क्षेत्रीय स्थिरता और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह तनाव कम करने के प्रयासों में सहयोग करे।
उड़ानों और समन्वय की व्यवस्था
अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि विभिन्न देशों से भारत के लिए नियमित उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। 16 मार्च को संयुक्त अरब अमीरात से लगभग 65 उड़ानें संचालित हुईं, जबकि अगले दिन करीब 70 उड़ानों की योजना बनाई गई। ओमान से भी भारत के अलग-अलग शहरों के लिए उड़ानें जारी हैं। केंद्र सरकार राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर लौटने वाले नागरिकों के स्वागत और आगे की व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है।



