Geopolitics – भारत ने किया अमेरिका-ईरान युद्धविराम का स्वागत, शांति पर दिया जोर
Geopolitics – भारत ने अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। नई दिल्ली ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने के लिए बातचीत और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि लंबे समय से जारी तनाव ने आम लोगों के जीवन पर गंभीर असर डाला है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति व व्यापार भी प्रभावित हुए हैं, ऐसे में युद्धविराम से राहत मिलने की उम्मीद है।

संवाद और कूटनीति को बताया समाधान
विदेश मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में दोहराया कि भारत शुरू से ही तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है। प्रवक्ता के अनुसार, मौजूदा हालात में किसी भी तरह का सैन्य टकराव केवल स्थिति को और जटिल बना सकता है। इसलिए सभी पक्षों को संयम बरतते हुए बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
भारत का मानना है कि इस युद्धविराम से न सिर्फ क्षेत्र में शांति की संभावनाएं बढ़ेंगी बल्कि इससे अन्य संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में भी सकारात्मक संकेत जाएंगे। खास तौर पर यूक्रेन जैसे मामलों में भी यह पहल कूटनीतिक प्रयासों को गति दे सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की चिंता
भारत ने होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध समुद्री आवाजाही बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी का परिवहन होता है।
जायसवाल ने कहा कि भारत इस क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है और अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित देशों के संपर्क में है। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक कई भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से इस मार्ग से गुजर चुके हैं। साथ ही, यह स्पष्ट किया गया कि ईरान द्वारा इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने को लेकर भारत के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है।
ईरान में भारतीय नागरिकों की स्थिति
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, ईरान में इस समय लगभग 7500 भारतीय नागरिक मौजूद हैं। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने हाल ही में एक परामर्श जारी कर नागरिकों से देश छोड़ने की अपील की है।
सरकार के प्रयासों के तहत अब तक 1800 से अधिक भारतीय नागरिक ईरान से सुरक्षित बाहर निकाले जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र और मछुआरे शामिल हैं, जिन्हें पड़ोसी देशों आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते निकाला गया है।
अमेरिका और ईरान की शर्तें
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब अमेरिका और ईरान ने सीमित अवधि के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका दो सप्ताह तक हमले रोकने को तैयार है, बशर्ते ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने पर सहमत हो।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल कर चुका है। दूसरी ओर, ईरान ने भी संकेत दिए हैं कि यदि उस पर हमले बंद होते हैं, तो वह अपनी सैन्य कार्रवाई रोक सकता है।
सुरक्षित समुद्री आवागमन पर जोर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही ईरानी निगरानी में जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि निर्धारित अवधि के दौरान समन्वय के जरिए जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत की नजर बनी हुई है और वह लगातार कूटनीतिक संपर्कों के माध्यम से स्थिति को समझने और अपने हितों की रक्षा करने में जुटा है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वैश्विक शांति और सुरक्षित व्यापारिक मार्ग उसके लिए प्राथमिकता हैं।



