BhaiDooj – होली के बाद मनाया जाने वाला भाई-बहन का पावन पर्व
BhaiDooj – होली के उत्साह और रंगों के बाद आने वाला भाई दूज का त्योहार भारतीय परिवारों में रिश्तों की गर्माहट को और गहरा कर देता है। यह पर्व भाई और बहन के स्नेह, विश्वास और सुरक्षा के वचन का प्रतीक माना जाता है। साल में दो बार मनाया जाने वाला यह उत्सव विशेष रूप से चैत्र मास में होली के बाद आने वाली द्वितीया तिथि को भी मनाया जाता है। रंगों की उमंग के बीच यह दिन रिश्तों को संजोने और परिवार के साथ समय बिताने का अवसर देता है।

भाई दूज का सांस्कृतिक महत्व
भारतीय परंपरा में भाई दूज को भाई-बहन के अटूट संबंध का प्रतीक माना गया है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। आरती उतारने और मिठाई खिलाने की परंपरा के साथ यह पर्व पारिवारिक जुड़ाव को मजबूत करता है। बदले में भाई बहन को उपहार देकर उसके प्रति सम्मान और सुरक्षा का वचन दोहराते हैं।
यह त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच रिश्तों को समय देना कितना जरूरी है।
होली के बाद ही क्यों मनाया जाता है
होली वसंत ऋतु का उत्सव है, जो नई ऊर्जा और उल्लास का संदेश देता है। इसके दो दिन बाद आने वाली द्वितीया तिथि को भाई दूज मनाने की परंपरा है। रंगों की मस्ती के बाद यह दिन शांत और पारिवारिक माहौल में प्रेम व्यक्त करने का अवसर बन जाता है।
परिवारों में इस दिन भाई अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाते हैं। इसे संबंधों को मजबूत करने और परस्पर विश्वास को दोहराने का प्रतीक माना जाता है।
पौराणिक कथाओं का संदर्भ
भाई दूज से जुड़ी कई मान्यताएं प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने द्वितीया तिथि को पहुंचे थे। बहन ने उनका स्वागत कर तिलक लगाया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि इस दिन जो भाई अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
एक अन्य कथा में भगवान श्रीकृष्ण के नरकासुर वध के बाद बहन सुभद्रा द्वारा तिलक लगाने का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं के माध्यम से भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा का भाव स्पष्ट होता है।
पूजा की पारंपरिक विधि
भाई दूज के दिन सुबह स्नान के बाद बहनें पूजा की तैयारी करती हैं। भाई को आसन पर बैठाकर रोली, चावल और चंदन से तिलक लगाया जाता है। आरती उतारकर उसकी मंगल कामना की जाती है। कई स्थानों पर बहनें व्रत भी रखती हैं और भाई के आने के बाद ही भोजन ग्रहण करती हैं।
घर में इस दिन सात्विक भोजन और मिठाइयां बनाई जाती हैं। परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर उत्सव का आनंद लेते हैं।
भाई दूज का यह पर्व केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों की मजबूती का संदेश है। होली के रंगों के बाद यह दिन भावनाओं के रंगों से परिवार को और भी करीब ले आता है।



