Jannah Theme License is not validated, Go to the theme options page to validate the license, You need a single license for each domain name.
लाइफ स्टाइल

FestivalCalendar – फरवरी के दूसरे सप्ताह में व्रत-त्योहारों की श्रृंखला, महाशिवरात्रि रहेगा केंद्र में

FestivalCalendar – फरवरी 2026 का दूसरा सप्ताह धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है। 10 फरवरी से 16 फरवरी के बीच कई प्रमुख व्रत और पर्व पड़ रहे हैं, जिनमें विजया एकादशी, शनि प्रदोष व्रत, महाशिवरात्रि और अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण अवसर शामिल हैं। इस पूरे सप्ताह में तिथियों के साथ-साथ विशेष योग और ग्रह संयोग भी बन रहे हैं, जिन्हें पूजा-पाठ और व्रत के लिए शुभ माना जाता है।

february 2026 vrat tyohar mahashivratri

विजया एकादशी से होगी सप्ताह की शुरुआत

इस सप्ताह का धार्मिक क्रम विजया एकादशी से विशेष रूप से ध्यान खींचता है। 13 फरवरी को पड़ने वाली विजया एकादशी का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में मिलता है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने लंका पर चढ़ाई से पहले इसी व्रत का पालन किया था। तभी से इसे विजय प्रदान करने वाली एकादशी के रूप में जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने और विष्णु पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

14 फरवरी को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। यह व्रत भगवान शिव और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त करने से जुड़ा माना जाता है। शनिवार के दिन प्रदोष काल में की गई शिव पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस व्रत से जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं और शनि दोष के प्रभाव में राहत मिलती है।

महाशिवरात्रि पर बन रहे दुर्लभ योग

इस सप्ताह का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाया जाएगा। इस बार महाशिवरात्रि पर कई खास संयोग बन रहे हैं। फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी की शुरुआत 14 फरवरी की शाम से होगी और 15 फरवरी की शाम तक रहेगी। इसी दौरान चतुर्दशी तिथि लगने से त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी का संयोग बनेगा, जिसे पूजा के लिए विशेष माना जाता है।

भद्रा और योगों का प्रभाव

महाशिवरात्रि के दिन भद्रा का भी संयोग बन रहा है, हालांकि शाम के समय चतुर्दशी लगने के बाद चार प्रहर की पूजा की जाएगी। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के साथ व्यतीपात योग भी पूरे दिन प्रभावी रहेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से ये योग शिव पूजा के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

ग्रहों की स्थिति क्यों है खास

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर ग्रहों का एक विशेष संयोग भी बन रहा है। कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र के एक साथ स्थित होने से चतुर्ग्रही योग बन रहा है। यह योग कई वर्षों बाद बनता है और इसे आध्यात्मिक साधना के लिए प्रभावशाली माना जाता है। इसी कारण इस महाशिवरात्रि को विशेष फलदायी बताया जा रहा है।

अमावस्या और दान-स्नान का अवसर

16 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या पड़ रही है। इस दिन स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या पर किया गया दान पुण्य प्रदान करता है। इसी अमावस्या के अगले दिन सूर्य ग्रहण भी बताया जा रहा है, जिससे इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।

10 से 16 फरवरी तक तिथियों का संक्षिप्त विवरण

10 फरवरी, मंगलवार को फाल्गुन कृष्ण अष्टमी तिथि सुबह 7:28 बजे तक रहेगी।
11 फरवरी, बुधवार को फाल्गुन कृष्ण नवमी तिथि सुबह 9:59 बजे तक रहेगी, इसी दिन रात में भद्रा और गंडमूल का योग भी बनेगा।
12 फरवरी, गुरुवार को फाल्गुन कृष्ण दशमी तिथि दोपहर 12:23 बजे तक रहेगी, इसी दिन फाल्गुन संक्रांति और स्वामी दयानंद सरस्वती जयंती भी मनाई जाएगी।
13 फरवरी, शुक्रवार को फाल्गुन कृष्ण एकादशी तिथि दोपहर 2:26 बजे तक रहेगी और विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
14 फरवरी, शनिवार को फाल्गुन कृष्ण द्वादशी के बाद त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी और शनि प्रदोष व्रत रहेगा।
15 फरवरी, रविवार को त्रयोदशी के साथ महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।
16 फरवरी, सोमवार को चतुर्दशी के बाद अमावस्या तिथि लगेगी।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.