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NavratriDiet – व्रत में सिर्फ साबुदाना नहीं, ये विकल्प देंगे लंबी ऊर्जा…

NavratriDiet – नवरात्रि के दौरान व्रत रखने वाले लोग अक्सर साबुदाना से बनी चीजों जैसे खिचड़ी, वड़ा या टिक्की पर ज्यादा निर्भर रहते हैं। यह परंपरा आम है, लेकिन केवल साबुदाना खाने से शरीर को संतुलित पोषण नहीं मिल पाता। इससे कुछ समय के लिए ऊर्जा जरूर मिलती है, लेकिन जल्दी ही थकान महसूस होने लगती है। दरअसल, व्रत के दौरान शरीर को लगातार ऊर्जा देने वाले ऐसे खाद्य पदार्थों की जरूरत होती है, जिनमें कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन और फाइबर भी मौजूद हों। ऐसे में जरूरी है कि फलाहार में विविधता लाई जाए, ताकि शरीर पूरे दिन सक्रिय बना रहे।

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साबुदाना क्यों नहीं देता लंबे समय तक ऊर्जा

साबुदाना कसावा की जड़ से तैयार किया जाता है और इसमें लगभग 90 प्रतिशत स्टार्च होता है। यही कारण है कि यह जल्दी पच जाता है और रक्त में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ाता है। लेकिन उतनी ही तेजी से यह स्तर गिर भी जाता है, जिससे शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होती है। इसमें प्रोटीन, फाइबर और जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व बेहद कम होते हैं। इसलिए अगर कोई व्यक्ति पूरे दिन सिर्फ साबुदाना आधारित भोजन करता है, तो उसे बार-बार भूख लगना, थकान और सुस्ती जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

कुट्टू को सही तरीके से खाने की जरूरत

व्रत के दौरान कुट्टू का उपयोग काफी लोकप्रिय है, लेकिन इसे तलकर खाने से इसका पोषण घट जाता है। आमतौर पर लोग कुट्टू की पूड़ी या पकौड़ी बनाकर खाते हैं, जो स्वाद में भले अच्छे लगें, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से हल्के विकल्प नहीं हैं। बेहतर होगा कि कुट्टू को साबुत रूप में इस्तेमाल किया जाए। इससे बनी खिचड़ी या दलिया शरीर को अधिक समय तक ऊर्जा देने के साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर भी उपलब्ध कराती है। यह उन लोगों के लिए भी फायदेमंद है जो व्रत के दौरान वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं।

राजगिरा यानी अमरंथ एक संतुलित विकल्प

अमरंथ या राजगिरा भी व्रत में खाया जाने वाला एक अहम अनाज है। आमतौर पर इसे लड्डू के रूप में खाया जाता है, लेकिन इससे मिलने वाले पोषण का पूरा लाभ तभी मिलता है जब इसे कम प्रोसेस्ड रूप में खाया जाए। राजगिरा से बनी खिचड़ी या हल्का नाश्ता शरीर को पर्याप्त प्रोटीन देता है और लंबे समय तक तृप्ति बनाए रखता है। यह उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जो दिनभर सक्रिय रहना चाहते हैं और बार-बार खाने से बचना चाहते हैं।

सिंघाड़ा भी दे सकता है बेहतर पोषण

व्रत के दौरान सिंघाड़े का इस्तेमाल भी खूब होता है, लेकिन अक्सर लोग इसका आटा बनाकर तलकर खाते हैं। इसकी बजाय अगर ताजे सिंघाड़े को उबालकर या हल्का पकाकर खाया जाए तो यह अधिक पौष्टिक साबित होता है। इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं। यह एक ऐसा विकल्प है जो हल्का होने के बावजूद शरीर को जरूरी ताकत देता है।

साबुदाना खाना हो तो कैसे करें संतुलन

अगर आप साबुदाना पूरी तरह छोड़ना नहीं चाहते, तो इसे संतुलित तरीके से खाने की जरूरत है। साबुदाना खिचड़ी बनाते समय उसमें मूंगफली की मात्रा बढ़ाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट का अच्छा स्रोत है, जिससे भोजन अधिक संतुलित हो जाता है। इससे शरीर को केवल स्टार्च ही नहीं, बल्कि जरूरी पोषण भी मिलता है और ऊर्जा लंबे समय तक बनी रहती है।

व्रत में संतुलित आहार क्यों जरूरी है

नवरात्रि जैसे लंबे व्रत में शरीर को संतुलित पोषण देना बेहद जरूरी होता है। केवल परंपरा के आधार पर एक ही तरह का भोजन करना शरीर को कमजोर कर सकता है। अगर फलाहार में विविधता और संतुलन रखा जाए, तो न सिर्फ ऊर्जा बनी रहती है बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर रहता है। सही चुनाव के साथ व्रत को सहज और स्वस्थ दोनों बनाया जा सकता है।

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