लाइफ स्टाइल

OralHealth – रोजमर्रा की आदतें जो चुपचाप बिगाड़ती हैं दांत

OralHealth – अच्छी सेहत की बात हो तो अक्सर लोग खानपान और व्यायाम पर ध्यान देते हैं, लेकिन दांतों की देखभाल को उतनी प्राथमिकता नहीं मिलती। विशेषज्ञों का मानना है कि खराब oral health केवल दांतों तक सीमित समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है। हृदय रोग से लेकर पाचन संबंधी दिक्कतों तक, कई बीमारियों का संबंध मुंह की सफाई से जुड़ा पाया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग दिन में दो बार ब्रश करना ही पर्याप्त समझ लेते हैं और बाकी आदतों पर गौर नहीं करते।

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एंटीबैक्टीरियल माउथवॉश का अधिक उपयोग

अमेरिका के डेंटिस्ट डॉ. मार्क बरहेनी के अनुसार, एंटीबैक्टीरियल माउथवॉश का बार-बार इस्तेमाल मुंह के प्राकृतिक माइक्रोबायोम को प्रभावित कर सकता है। इससे केवल हानिकारक बैक्टीरिया ही नहीं, बल्कि लाभकारी बैक्टीरिया भी नष्ट हो सकते हैं। कुछ अध्ययनों में यह संकेत मिला है कि इसका अत्यधिक उपयोग blood pressure पर भी असर डाल सकता है। विशेषज्ञ पारंपरिक तरीके जैसे oil pulling को सीमित और सावधानीपूर्वक अपनाने की सलाह देते हैं, हालांकि किसी भी नई आदत को शुरू करने से पहले सलाह लेना बेहतर होता है।

खाने के तुरंत बाद ब्रश करने की आदत

कई लोग मानते हैं कि भोजन के तुरंत बाद ब्रश करना दांतों के लिए अच्छा है। लेकिन डेंटल विशेषज्ञ बताते हैं कि खासकर खट्टे या अम्लीय भोजन के बाद तुरंत ब्रश करने से दांतों की enamel पर असर पड़ सकता है। बेहतर है कि खाने के बाद कम से कम 30 मिनट का अंतर रखा जाए, ताकि लार प्राकृतिक रूप से अम्लता को संतुलित कर सके।

बच्चों में मुंह से सांस लेने को नजरअंदाज करना

माता-पिता अक्सर बच्चों की mouth breathing की आदत को सामान्य समझकर छोड़ देते हैं। जबकि लंबे समय तक मुंह से सांस लेना जबड़े की बनावट, चेहरे की संरचना और नींद की गुणवत्ता पर प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत आगे चलकर अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी जुड़ सकती है। इसलिए यदि बच्चा लगातार मुंह खोलकर सांस लेता है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

बार-बार दांत सफेद करने की प्रवृत्ति

दांतों को चमकदार बनाने के लिए whitening उत्पादों का अत्यधिक उपयोग भी नुकसानदेह हो सकता है। बार-बार किए गए उपचार से enamel पतला हो सकता है, जो दोबारा नहीं बनता। कुछ मामलों में peroxide आधारित उत्पाद संवेदनशीलता बढ़ा देते हैं। इसलिए cosmetic प्रक्रिया को सीमित रखना और विशेषज्ञ की निगरानी में कराना ही सुरक्षित विकल्प है।

खर्राटों को हल्के में लेना

खर्राटे कई लोग सामान्य मान लेते हैं, लेकिन यह सांस की नली में रुकावट का संकेत हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार खर्राटे sleep disorder या अन्य जटिलताओं से जुड़े हो सकते हैं, जिनका असर हृदय और metabolism पर पड़ता है। यदि समस्या लगातार बनी रहे तो जांच कराना आवश्यक है।

ब्रश के बाद सही तरीका अपनाना

कुछ लोग ब्रश करने के तुरंत बाद मुंह को बार-बार पानी से धोते हैं। डेंटिस्टों के मुताबिक fluoride को दांतों पर प्रभावी होने के लिए थोड़ा समय चाहिए। इसलिए हल्का कुल्ला पर्याप्त होता है। इससे दांतों को अधिक सुरक्षा मिल सकती है।

दर्द का इंतजार क्यों खतरनाक

अक्सर लोग तब तक दंत चिकित्सक के पास नहीं जाते जब तक तेज दर्द न हो। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नियमित जांच से cavity या मसूड़ों की समस्या शुरुआती चरण में ही पकड़ी जा सकती है। समय पर उपचार न केवल खर्च कम करता है, बल्कि जटिलताओं से भी बचाता है।

स्वस्थ दांत केवल मुस्कान की बात नहीं, बल्कि संपूर्ण सेहत का आधार हैं। रोजमर्रा की छोटी आदतों पर ध्यान देकर और समय-समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेकर oral health को बेहतर रखा जा सकता है।

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