Relationship After Baby: पेरेंटिंग के साथ पार्टनरशिप को भी रखें बरकरार, रिश्ते को मजबूत बनाने के 5 असरदार तरीके
Relationship After Baby: नन्हे मेहमान का घर में आना किसी भी दंपति के लिए दुनिया की सबसे बड़ी खुशी होती है। लेकिन अक्सर देखा गया है कि बच्चे की परवरिश की भागदौड़ में पति-पत्नी के बीच का आपसी रिश्ता कहीं पीछे छूट जाता है। रातों की नींद खराब होना, घर की बढ़ती जिम्मेदारियां और करियर के तालमेल के बीच कपल्स के पास एक-दूसरे के लिए वक्त ही नहीं बचता। धीरे-धीरे वे केवल ‘माता-पिता’ की भूमिका में सिमट जाते हैं और एक प्रेमी जोड़े वाला एहसास धुंधला पड़ने लगता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक खुशहाल परिवार की नींव माता-पिता के मजबूत आपसी संबंधों पर टिकी होती है। अगर आप भी पेरेंटिंग और पार्टनरशिप के बीच संतुलन बनाना चाहते हैं, तो कुछ छोटी मगर जरूरी आदतों को जीवन में शामिल करना होगा।

छोटे-छोटे प्रेम संकेतों से बनी रहेगी नजदीकी
अक्सर बच्चे के आने के बाद शारीरिक और भावनात्मक दूरी बढ़ने लगती है। रिश्ते में गर्माहट बनाए रखने के लिए हमेशा किसी बड़े सरप्राइज या वेकेशन की जरूरत नहीं होती। दिन भर की थकान के बीच एक-दूसरे का हाथ थाम लेना, गले लगाना या बस प्यार से पीठ सहला देना भी जादुई असर करता है। ये छोटे ‘जेस्चर’ आपके साथी को यह अहसास कराते हैं कि तमाम व्यस्तताओं के बावजूद उनकी अहमियत आपके जीवन में कम नहीं हुई है। यह आपसी जुड़ाव आपको पेरेंटिंग (Relationship After Baby) के तनाव से लड़ने की ताकत देता है।
चुनौतियों को आपसी ‘ब्लेम गेम’ से बचाएं
बच्चे की आदतों या जरूरतों को लेकर कपल्स के बीच मतभेद होना एक सामान्य बात है। लेकिन समस्या तब शुरू होती है जब हम चुनौतियों के लिए एक-दूसरे को दोष देने लगते हैं। याद रखें कि पेरेंटिंग एक ‘टीम वर्क’ है। जब भी कोई मुश्किल आए, तो उसे ‘तुम बनाम मैं’ के नजरिए से देखने के बजाय ‘हम बनाम समस्या’ के रूप में देखें। एक-दूसरे की कमियां निकालने के बजाय साथ मिलकर समाधान ढूंढना न केवल काम को आसान बनाता है, बल्कि आपसी सम्मान को भी बढ़ाता है।
सराहना करने की आदत बढ़ाएगी सकारात्मकता
अक्सर हम अपने पार्टनर द्वारा किए गए छोटे-मोटे कामों को उनकी जिम्मेदारी मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ‘शुक्रिया’ या ‘आज तुमने बच्चे को बहुत अच्छे से संभाला’ जैसे वाक्य पार्टनर को भावनात्मक सुरक्षा देते हैं। जब आप एक-दूसरे के प्रयासों को सराहते हैं, तो रिश्ते में सकारात्मकता का संचार होता है। प्रशंसा मिलने से काम का बोझ हल्का महसूस होने लगता है और पार्टनर का उत्साह भी बना रहता है। यह एक-दूसरे के प्रति भरोसे को और भी गहरा करता है।
जिम्मेदारी का खुद पहल कर उठाएं बोझ
घर और बच्चे के कामों का केवल शारीरिक श्रम ही नहीं, बल्कि ‘मेंटल लोड’ भी बहुत होता है। यह सोचना कि कब क्या करना है, अपने आप में थका देने वाला काम है। अपने पार्टनर के कहने का इंतजार करने के बजाय खुद पहल करें। बिना टोके दूध की बोतल साफ कर देना या बच्चे के डायपर बदल देना आपके पार्टनर के मानसिक तनाव को काफी हद तक कम कर सकता है। जब दोनों साथी समान रूप से जिम्मेदारी निभाते हैं, तो किसी एक पर बोझ नहीं पड़ता और रिश्ते में कड़वाहट नहीं आती।
रोज निकालें केवल ‘अपने लिए’ 10 मिनट
दिन भर की आपाधापी के बाद रात को या सुबह के वक्त कम से कम 10 मिनट ऐसे जरूर निकालें, जिसमें आप केवल एक-दूसरे की बात करें। इन 10 मिनटों में बच्चे, उनकी पढ़ाई, स्कूल या घर के खर्चों की चर्चा बिल्कुल न करें। बस साथ बैठें, चाय पिएं और एक-दूसरे के दिनभर के अनुभव साझा करें। यह छोटा सा समय आपके वैवाहिक रिश्ते की ताजगी को बरकरार रखने के लिए सबसे बड़ा निवेश साबित होता है। जब माता-पिता खुश रहते हैं, तभी वे एक स्वस्थ और खुशहाल वातावरण में बच्चे का पालन-पोषण कर पाते हैं।



