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AbuAzmi – रमजान में मुस्लिम कर्मचारियों को जल्दी छुट्टी की उठी मांग

AbuAzmi – महाराष्ट्र में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अबू आजमी ने रमजान के महीने को देखते हुए मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को शाम 4 बजे तक कार्यालय से अवकाश देने की मांग उठाई है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि उपवास रखने वाले कर्मचारियों को विशेष रियायत दी जाए। आजमी का कहना है कि इससे रोजा रखने वालों को इफ्तार और नमाज की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।

abu azmi ramzan early leave demand 1

दूसरे राज्यों का दिया उदाहरण

अबू आजमी ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का हवाला देते हुए कहा कि वहां की सरकारों ने रमजान के दौरान मुस्लिम अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्य समय में छूट दी है। उनके अनुसार, इन राज्यों में कर्मचारियों को शाम 4 बजे तक कार्यालय छोड़ने की अनुमति है, ताकि वे धार्मिक कर्तव्यों का पालन सुचारु रूप से कर सकें। उन्होंने इसे एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि महाराष्ट्र भी इस दिशा में कदम उठा सकता है।

रमजान के दौरान दिनचर्या का उल्लेख

मीडिया से बातचीत में आजमी ने बताया कि रमजान के महीने में रोजा रखने वाले लोग सुबह तड़के सहर के लिए उठते हैं। सुबह 4 से 5 बजे के बीच भोजन करने के बाद वे थोड़े विश्राम के पश्चात अपनी ड्यूटी पर निकलते हैं। दिनभर उपवास रखने के बाद शाम लगभग 6:30 बजे इफ्तार होता है और उसके बाद नमाज अदा की जाती है। उनका कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में शारीरिक और मानसिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, इसलिए कार्य समय में कुछ राहत मिलने से कर्मचारियों को सहूलियत होगी।

सरकार से औपचारिक अनुरोध

आजमी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह मांग किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता और व्यावहारिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की है। उनके अनुसार, यदि अन्य राज्यों में ऐसी व्यवस्था संभव है, तो महाराष्ट्र में भी इस पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाएगी और कर्मचारियों की भावनाओं का सम्मान करेगी।

उत्पादकता पर प्रभाव को लेकर तर्क

समाजवादी पार्टी नेता का मानना है कि कार्य समय में सीमित बदलाव से सरकारी कामकाज पर विशेष असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि समय का समुचित प्रबंधन किया जाए तो कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ धार्मिक कर्तव्यों का भी पालन कर सकते हैं। उनका तर्क है कि इससे कार्यस्थल पर संतुलन और आपसी समझ का माहौल बेहतर होगा।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, यह मुद्दा ऐसे समय में उठा है जब विभिन्न राज्यों में रमजान के दौरान विशेष व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हो रही है। राजनीतिक हलकों में इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ सकती हैं, लेकिन आजमी ने इसे सामाजिक समन्वय और संवेदनशीलता से जुड़ा विषय बताया है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि महाराष्ट्र सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेती है। फिलहाल यह मामला विचाराधीन है और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।

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