राष्ट्रीय

AsaduddinOwaisi – ईरान पर हमले की निंदा न करने पर प्रधानमंत्री से सवाल

AsaduddinOwaisi – पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर हुए हालिया हमलों को लेकर भारत की प्रतिक्रिया पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। हैदराबाद की ऐतिहासिक मक्का मस्जिद में एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर अपनी पारंपरिक विदेश नीति के अनुरूप प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

asaduddin owaisi questions pm on iran attack

ओवैसी ने कहा कि हाल की परिस्थितियों में भारत को स्पष्ट रूप से उन सैन्य कार्रवाइयों की निंदा करनी चाहिए जिनसे क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर संतुलित और स्वतंत्र नीति का पालन करता रहा है, इसलिए मौजूदा स्थिति में भी उसी दृष्टिकोण को बनाए रखना जरूरी है।

ईरान पर हमले को लेकर उठाए सवाल

सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजशिकयान से बातचीत की थी। उनके अनुसार उस बातचीत में ऊर्जा आपूर्ति और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या भारत ने हमले की निंदा करने का स्पष्ट संदेश दिया है।

ओवैसी ने कहा कि मौजूदा हालात में कई खाड़ी देशों और पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा है। उनका कहना था कि भारत को इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय कानून और क्षेत्रीय शांति के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की विदेश नीति ऐतिहासिक रूप से संतुलित रही है और देश ने लंबे समय तक इजरायल-फिलिस्तीन विवाद जैसे मुद्दों पर तटस्थ रुख बनाए रखा है।

भारत की पारंपरिक नीति का दिया हवाला

ओवैसी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने दशकों तक अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांतिपूर्ण समाधान और संवाद का समर्थन किया है। उनके अनुसार भारत की यही नीति उसे वैश्विक स्तर पर एक संतुलित और विश्वसनीय साझेदार बनाती है।

उन्होंने कहा कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून और कूटनीतिक प्रक्रिया का सम्मान करने के पक्ष में स्पष्ट संदेश देना चाहिए। उनके मुताबिक किसी भी देश पर सैन्य हमला वैश्विक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है और ऐसे मामलों में संवाद का रास्ता अधिक प्रभावी होता है।

वैश्विक घटनाओं और क्षेत्रीय राजनीति पर टिप्पणी

ओवैसी ने अपने भाषण में पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों और वहां हो रही घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में होने वाले किसी भी संघर्ष का असर ऊर्जा बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

उनका कहना था कि भारत जैसे देशों के लिए यह जरूरी है कि वे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के पक्ष में स्पष्ट रूप से अपनी बात रखें। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की कि संघर्ष के बजाय बातचीत और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

समान नागरिक संहिता और सामाजिक मुद्दों पर भी बोले

सभा के दौरान ओवैसी ने देश के अंदरूनी राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने समान नागरिक संहिता के प्रस्ताव पर बोलते हुए कहा कि इस विषय पर व्यापक संवाद और सहमति जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और यहां अलग-अलग समुदायों की अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं। उनके अनुसार किसी भी बड़े कानूनी बदलाव पर सभी पक्षों को साथ लेकर चर्चा करना जरूरी है।

राजनीतिक हिंसा की घटनाओं की निंदा

अपने संबोधन के अंत में ओवैसी ने राजनीतिक नेताओं के खिलाफ हिंसा या धमकी की घटनाओं की भी आलोचना की। उन्होंने जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी घटनाओं की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना स्वाभाविक है, लेकिन राजनीतिक मतभेदों को हिंसा या धमकी में बदलना स्वीकार्य नहीं हो सकता। उनके अनुसार सभी दलों और नेताओं को लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.