BankingFraud – सागा ग्रुप की शाखाओं पर लटका ताला, उजागर हुई करोड़ों की ठगी
BankingFraud – महाराष्ट्र आधारित सागा ग्रुप की ओर से विभिन्न राज्यों में संचालित एलयूसीसी बैंक की शाखाओं से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब कानूनी दायरे में आ गया है। आगरा मंडल समेत कई जिलों में खोली गई इन शाखाओं के अचानक बंद हो जाने से निवेशकों में हड़कंप मच गया। मैनपुरी जिले में ही करीब 30 करोड़ रुपये से अधिक की राशि फंसे होने का दावा किया गया है। न्यायालय के निर्देश पर भोगांव कोतवाली में फिल्म अभिनेता श्रेयस तलपड़े सहित कुल 12 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

शिकायतकर्ताओं ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया
कस्बा भोगांव के मोहल्ला मिश्राना निवासी विकास तिवारी समेत 14 लोगों ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि वर्ष 2015 में एलयूसीसी बैंक की शाखा खोली गई थी। बैंक का संचालन समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी सानिया अग्रवाल द्वारा किया जा रहा था, जो महाराष्ट्र के नवी मुंबई निवासी बताए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, बैंक ने आकर्षक योजनाओं के जरिए सैकड़ों लोगों से निवेश करवाया। समय बीतने के बाद जब जमाकर्ताओं ने अपनी जमा राशि वापस मांगी तो उन्हें टालमटोल किया गया। आरोप है कि रकम लौटाने के बजाय प्रबंधन की ओर से उल्टे कानूनी कार्रवाई में फंसाने की धमकी दी गई।
नवंबर में बंद हुई शाखा, निवेशक परेशान
पीड़ितों का कहना है कि दबाव बढ़ने पर नवंबर 2024 में बैंक की स्थानीय शाखा अचानक बंद कर दी गई और जिम्मेदार लोग क्षेत्र से गायब हो गए। जमाकर्ताओं के पास निवेश से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, लेकिन धन वापसी की कोई स्पष्ट प्रक्रिया सामने नहीं आई। शाखा बंद होने के बाद कई परिवारों की जमा पूंजी अटक गई, जिससे आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो गई। लोगों का कहना है कि उन्होंने बैंक पर भरोसा कर अपनी जीवनभर की बचत जमा की थी, जिसे अब निकालना मुश्किल हो रहा है।
पुलिस में शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
निवेशकों ने आरोपियों के खिलाफ भोगांव पुलिस को लिखित तहरीर दी थी। उनका कहना है कि शुरुआती स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब स्थानीय स्तर पर राहत नहीं मिली तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद समीर अग्रवाल, सानिया अग्रवाल, आरके सेट्टी, संजय मुदगिल, शबाब हुसैन, श्रेयस तलपड़े, नरेंद्र नेगी, पंकज अग्रवाल, सुप्रिया, अनुज जैन, अजय श्रीवास्तव और अरविंद त्रिपाठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
कई राज्यों में फैला नेटवर्क
बताया जा रहा है कि एलयूसीसी बैंक की शाखाएं केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं थीं। उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में भी इसके संचालन की जानकारी सामने आई है। निवेशकों का कहना है कि बैंक खुद को व्यवस्थित वित्तीय संस्था के रूप में प्रस्तुत करता था, जिससे लोगों को भरोसा हुआ। कुछ लोगों का दावा है कि बैंकिंग नियमों और निगरानी से जुड़े दावों के आधार पर ग्राहकों को आश्वस्त किया जाता था। हालांकि अब जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करने में जुटी हैं कि संचालन की वास्तविक स्थिति क्या थी और किस स्तर पर चूक हुई।
जांच की दिशा और आगे की प्रक्रिया
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पड़ताल, खातों की जानकारी और निवेश योजनाओं की शर्तों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे प्रकरण ने क्षेत्र में निजी वित्तीय संस्थाओं के प्रति लोगों की सतर्कता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निवेश से पहले संस्था की वैधता और पंजीकरण संबंधी जानकारी की जांच आवश्यक है।
फिलहाल, निवेशक न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं और प्रशासनिक कार्रवाई पर नजर बनाए हुए हैं। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।



