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BJP Kerala Election Strategy 2026: केरल में खिलने वाला है कमल, अमित शाह का मास्टर प्लान बिगाड़ेगा वामपंथियों का खेल

BJP Kerala Election Strategy 2026: दक्षिण भारत के दुर्ग केरल को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य की कमान सीधे अपने हाथों में ले ली है, क्योंकि केरल अब केवल एक राज्य नहीं बल्कि भाजपा की (Political Expansion) भावी रणनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है। पार्टी इस बार के विधानसभा चुनाव में महज उपस्थिति दर्ज कराने के बजाय एक बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। शाह ने स्पष्ट कर दिया है कि केरल में भाजपा का ‘वेटिंग पीरियड’ अब खत्म हो चुका है और अब सीधे सत्ता के समीकरणों को बदलने का समय आ गया है।

BJP Kerala Election Strategy 2026
BJP Kerala Election Strategy 2026
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‘जो कभी नहीं बदला, वह अब बदलेगा’ का हुंकार

भाजपा ने इस बार एक बेहद आक्रामक और भावनात्मक नारा दिया है कि केरल में जो कभी नहीं बदला है, वह अब बदलकर रहेगा। हाल के दौरों में अमित शाह ने (Electoral Momentum) कार्यकर्ताओं के भीतर जबरदस्त जोश भरते हुए अन्य राज्यों की सफलता के उदाहरण पेश किए। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय भाजपा मणिपुर और त्रिपुरा जैसे राज्यों में कहीं नहीं थी, लेकिन आज वहां भगवा परचम लहरा रहा है। पार्टी का मानना है कि यदि 1984 में दो सांसदों वाली पार्टी केंद्र में तीन बार सरकार बना सकती है, तो केरल की राजनीतिक जमीन भी बदली जा सकती है।

स्थानीय निकाय चुनाव की जीत ने बढ़ाया हौसला

केरल में भाजपा के बढ़ते आत्मविश्वास के पीछे ठोस जमीनी नतीजे हैं। राजधानी तिरुवनंतपुरम की नगर निगम और दो नगर पालिकाओं में मिली हालिया (Urban Voters Trust) जीत ने यह साबित कर दिया है कि शहरी मतदाता अब भाजपा को एक विकल्प के रूप में देख रहा है। इस जीत ने पार्टी के भीतर उस धारणा को तोड़ दिया है कि केरल में भाजपा केवल तीसरे नंबर की पार्टी बनी रहेगी। कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर भारी उत्साह है कि यदि स्थानीय स्तर पर वामपंथियों को मात दी जा सकती है, तो विधानसभा में भी इतिहास रचा जा सकता है।

वोट शेयर में निरंतर बढ़ोतरी और एनडीए की मजबूती

केरल के चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो एनडीए का ग्राफ लगातार ऊपर की ओर गया है। वर्ष 2001 में भाजपा का वोट शेयर महज तीन फीसदी के आसपास था, जो 2021 तक (Vote Share Growth) बढ़कर 15 फीसदी तक पहुंच गया है। हालांकि, यह वोट प्रतिशत अभी तक उतनी विधानसभा सीटों में तब्दील नहीं हो पाया है, लेकिन पार्टी नेतृत्व का मानना है कि वोटिंग पैटर्न में यह बड़ा बदलाव आने वाले समय में एक निर्णायक मोड साबित होगा। 2024 के लोकसभा चुनावों में 20 फीसदी वोट हासिल करना पार्टी की बढ़ती स्वीकार्यता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

तिरुवनंतपुरम में रचा गया ऐतिहासिक कीर्तिमान

राजधानी तिरुवनंतपुरम के नगर निगम चुनाव में भाजपा ने जो कर दिखाया, उसने विरोधियों की नींद उड़ा दी है। 101 वार्डों में से 50 वार्ड जीतकर (Local Body Elections) भाजपा ने पहली बार केरल में अपना मेयर बनाया है। यह केवल एक जीत नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक बढ़त है, जिसने यह संदेश दिया है कि भाजपा अब शासन चलाने के लिए तैयार है। सभी छह नगर निगमों में एनडीए को 23 फीसदी से अधिक वोट मिलना इस बात का संकेत है कि पढ़ा-लिखा वर्ग अब वामपंथ और कांग्रेस के गठबंधन से ऊब चुका है।

गांवों में भी पहुंच रही है भाजपा की गूंज

केवल शहरों तक ही नहीं, बल्कि भाजपा अब केरल के गांवों में भी अपनी पैठ बना रही है। राज्य की 79 ग्राम पंचायतों में पार्टी दूसरे स्थान पर रही, जो यह दर्शाता है कि (Rural Outreach Program) ग्रामीण इलाकों में भी पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है। केरल में पारंपरिक रूप से वामपंथी दलों के खिलाफ जो सत्ता विरोधी लहर चल रही है, भाजपा उसे भुनाने की पूरी कोशिश कर रही है। विकास की उम्मीदें और केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ अब गांवों तक पहुंच रहा है, जिससे आम जनता का झुकाव बढ़ रहा है।

सबरीमाला और सांस्कृतिक पहचान का बड़ा मुद्दा

भाजपा केरल में विकास के साथ-साथ सामाजिक और भावनात्मक मुद्दों को भी प्रमुखता से उठा रही है। सबरीमाला मंदिर का मुद्दा पार्टी के लिए (Cultural Identity Politics) एक ऐसा भावनात्मक आधार बन चुका है जिसने हिंदू मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को एकजुट किया है। विशेष रूप से दक्षिण केरल में इस मुद्दे ने भाजपा के प्रति एक स्थायी सहानुभूति पैदा की है। पार्टी इसे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं की रक्षा के रूप में पेश कर रही है, जिससे लोग जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।

ओबीसी समुदायों का बदलता राजनीतिक झुकाव

केरल के सामाजिक ढांचे में इझवा समुदाय का बड़ा महत्व है, जो कुल आबादी का लगभग 26 प्रतिशत है। पारंपरिक रूप से वामपंथी विचारधारा (OBC Vote Bank) की ओर झुकाव रखने वाला यह समुदाय अब भाजपा की ओर आकर्षित हो रहा है। भाजपा ने अपनी सांगठनिक संरचना में के सुरेंद्रन, वी मुरलीधरन और शोभा सुरेंद्रन जैसे बड़े नेताओं को आगे बढ़ाया है, जो इसी वर्ग से आते हैं। सामाजिक समीकरणों का यह बदलाव आगामी चुनावों में एलडीएफ और यूडीएफ के लिए बड़ी चुनौती पेश करने वाला है।

वामपंथी किले में सेंध लगाने की पूरी तैयारी

केरल में इस वक्त वामपंथी सरकार के खिलाफ गहरा रोष है, जिसका सीधा फायदा भाजपा उठाना चाहती है। गृह मंत्री अमित शाह की (Political Leadership) रणनीति एकदम स्पष्ट है—संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करना और जनता को यह यकीन दिलाना कि भाजपा ही उनके अधिकारों की असली रक्षक है। भाजपा कार्यकर्ताओं का जोश और जनता में विकास की नई उम्मीदें यह संकेत दे रही हैं कि केरल में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प होने वाला है। केरल की धरती पर अब ‘बदलाव’ की पटकथा लिखी जा रही है।

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