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Tirupati: बालाजी मंदिर में सिल्क दुपट्टा घोटाला 54 करोड़ की धोखाधड़ी, पॉलिएस्टर को बताया शुद्ध रेशम

Tirupati: बालाजी के भक्तों के लिए प्रसाद में चढ़ने वाला लाल-सुनहरा दुपट्टा भगवान की कृपा का प्रतीक माना जाता है। लाखों श्रद्धालु हर साल यह दुपट्टा चढ़ाते हैं और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। लेकिन अब एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भक्तों की आस्था से जुड़ा यह पवित्र दुपट्टा भी घोटाले की भेंट चढ़ गया। नकली घी कांड के बाद अब तिरुमला तिरुपति देवस्थानम में सिल्क दुपट्टा घोटाले ने सबको हिला कर रख दिया है। करीब 54 करोड़ रुपये की हेराफेरी का यह मामला सामने आया है जिसमें ठेकेदार ने सस्ते पॉलिएस्टर के दुपट्टे को शुद्ध रेशमी बताकर ऊंची कीमत वसूली।

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दुपट्टे की खरीद में क्या हुआ गोलमाल?

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम हर साल हजारों की संख्या में भक्तों को प्रसाद के रूप में दुपट्टे बांटता है। इसके लिए बोर्ड ने एक ठेकेदार को करीब 15,000 दुपट्टों की सप्लाई का ठेका दिया था। ठेकेदार ने हर दुपट्टे की कीमत 1,389 रुपये तय की और दावा किया कि ये दुपट्टे 100 प्रतिशत शुद्ध रेशम से बने हैं। लेकिन जब इन दुपट्टों के नमूने जांच के लिए भेजे गए तो सच सामने आ गया। सेंट्रल सिल्क बोर्ड और एक अन्य मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की रिपोर्ट में साफ लिखा था कि दुपट्टे में रेशम का एक धागा तक नहीं है, ये पूरी तरह पॉलिएस्टर से बने हैं। यानी ठेकेदार ने सस्ते सिंथेटिक कपड़े को रेशमी बताकर मोटी रकम हड़प ली।

कितने बड़े पैमाने पर हुई ठगी?

जानकारी के अनुसार सिर्फ एक ठेके में ही करीब 54 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है। असली रेशमी दुपट्टे की कीमत और पॉलिएस्टर दुपट्टे की कीमत में कई गुना का फर्क होता है। बाजार में अच्छी क्वालिटी का पॉलिएस्टर दुपट्टा 200 से 400 रुपये तक आता है जबकि शुद्ध रेशम का दुपट्टा 1,500 से 3,000 रुपये या उससे ज्यादा का भी हो सकता है। इस अंतर की रकम ठेकेदार ने सीधे अपनी जेब में डाली। सबसे दुखद बात यह है कि यह पैसा भक्तों की भेंट और दान से आता है।

जांच अब एसीबी के हाथ में

मामला सामने आने के बाद तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। बोर्ड के चेयरमैन बी.आर. नायडू ने खुद स्वीकार किया कि खरीद विभाग में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरी जांच आंध्र प्रदेश की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा यानी एसीबी को सौंप दी। अब एसीबी इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है। ठेकेदार के साथ-साथ खरीद प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों पर भी शिकंजा कस सकता है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे कांड

यह पहला मौका नहीं है जब तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रसाद सामग्री को लेकर विवाद हुआ हो। कुछ साल पहले प्रसाद में मिलने वाले लड्डू में पशु चर्बी और नकली घी मिलने का मामला सामने आया था। उस वक्त भी पूरे देश में आक्रोश फैला था। अब दुपट्टा घोटाले ने फिर से भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आस्था के नाम पर बार-बार इस तरह की धोखाधड़ी क्यों हो रही है?

भक्तों की आस्था पर सवाल

तिरुपति बालाजी दुनिया के सबसे अमीर मंदिरों में से एक हैं। हर साल करोड़ों भक्त यहां मत्था टेकते हैं और अरबों रुपये का दान देते हैं। भक्तों का विश्वास है कि जो कुछ भी वे भगवान को चढ़ाते हैं, उसकी पवित्रता बनी रहनी चाहिए। लेकिन जब प्रसाद में ही मिलावट और धोखाधड़ी होने लगे तो भक्तों का भरोसा डगमगाने लगता है। सोशल मीडिया पर लोग गुस्से में हैं और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

आगे क्या होना चाहिए?

भक्तों और आम जनता की मांग है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा न जाए। ठेकेदार के अलावा जो भी अधिकारी या कर्मचारी इस घोटाले में शामिल हैं, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए पारदर्शी खरीद प्रक्रिया अपनाई जाए। हर सामग्री की गुणवत्ता की जांच तीसरे पक्ष से कराई जाए और हर ठेके की पूरी जानकारी आम जनता के सामने रखी जाए।

तिरुपति बालाजी की महिमा और भक्तों की श्रद्धा अपार है। बस जरूरत है तो उस विश्वास को टूटने से बचाने की। उम्मीद की जानी चाहिए कि एसीबी की जांच से सच पूरी तरह सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी।

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