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BJPVictory – बंगाल में भाजपा का अभूतपूर्व उभार, सत्ता में बड़ा बदलाव

BJPVictory – पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार जो नतीजे सामने आए हैं, उन्होंने लंबे समय से कायम राजनीतिक ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। कभी कांग्रेस और वाम दलों का गढ़ रहे इस राज्य में तृणमूल कांग्रेस ने 2011 के बाद अपनी मजबूत पकड़ बनाई थी, लेकिन अब वही जमीन भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में खिसकती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा ने दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल कर सत्ता की दिशा बदल दी है, जो राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

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तीन विधायकों से 206 सीट तक का सफर

भाजपा की यह सफलता अचानक नहीं आई, बल्कि इसके पीछे वर्षों की राजनीतिक रणनीति और संगठन विस्तार की कहानी है। वर्ष 2016 में भाजपा पहली बार बंगाल विधानसभा में तीन विधायकों के साथ दाखिल हुई थी। उस समय पार्टी का वोट शेयर करीब 10 प्रतिशत के आसपास था। इसके बाद 2021 में पार्टी ने अपने प्रदर्शन में बड़ा सुधार करते हुए 77 सीटें हासिल कीं और करीब 38 प्रतिशत वोट पाए। अब 2026 में भाजपा ने 206 सीटों के साथ बहुमत से भी आगे निकलकर अपनी स्थिति को मजबूत कर लिया है।

वोट शेयर में बढ़त ने बदली तस्वीर

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार भाजपा को इस बार लगभग 45.84 प्रतिशत वोट मिले हैं। पिछले चुनाव के मुकाबले यह करीब 8 प्रतिशत की बढ़त है। वहीं तृणमूल कांग्रेस का वोट शेयर घटकर लगभग 40.80 प्रतिशत पर आ गया है। 2021 में दोनों दलों के बीच करीब 10 प्रतिशत का अंतर था, जिसे भाजपा ने इस बार पूरी तरह पाटते हुए बढ़त में बदल दिया।

नेतृत्व और चुनाव प्रबंधन की भूमिका

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस सफलता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और गृह मंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति का बड़ा योगदान रहा है। राज्य में लंबे समय से संगठन को मजबूत करने और बूथ स्तर तक पहुंच बनाने की कोशिशें इस बार रंग लाती दिखीं। चुनाव प्रचार से लेकर उम्मीदवार चयन तक, हर स्तर पर पार्टी ने सुनियोजित तरीके से काम किया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से वर्तमान तक की यात्रा

अगर बंगाल में भाजपा की जड़ों को देखें तो यह सफर काफी पुराना है। 1971 में जनसंघ के दौर में पहली बार एक विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद कई दशकों तक पार्टी को राज्य में खास सफलता नहीं मिली। 1980 और 1990 के दशक में भी भाजपा सीमित प्रभाव तक ही सिमटी रही। 2011 तक तो पार्टी का खाता भी नहीं खुल पाया था। ऐसे में 2016 के बाद से शुरू हुआ उभार अब 2026 में अपने चरम पर पहुंच गया है।

लोकसभा चुनावों से मिली शुरुआती मजबूती

भाजपा को बंगाल में शुरुआती राजनीतिक आधार लोकसभा चुनावों के जरिए मिला। 1998 में तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन में पार्टी को पहली बार राज्य से संसद में प्रतिनिधित्व मिला। इसके बाद अलग-अलग चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा रहा। 2014 में मोदी लहर के बावजूद बंगाल में भाजपा सीमित सफलता ही हासिल कर सकी, लेकिन 2019 के आम चुनाव में 18 सीटों की जीत ने पार्टी को नई ऊर्जा दी।

राज्य की राजनीति में आगे क्या संकेत

इस बार के विधानसभा चुनाव नतीजों ने साफ संकेत दिया है कि बंगाल की राजनीति में अब नया संतुलन बन रहा है। तृणमूल कांग्रेस के लिए यह परिणाम एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है, जबकि कांग्रेस और वाम दलों की स्थिति अब भी सीमित बनी हुई है। आने वाले समय में विपक्षी दलों के बीच नए समीकरण बनने की संभावना भी जताई जा रही है।

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