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CarbonMonoxide – बेंगलुरु में गीजर हादसे के बाद दंपत्ति की दर्दनाक मौत

CarbonMonoxide – बेंगलुरु के नेलमंगला इलाके में एक घरेलू गैस हादसे ने पूरे मोहल्ले को झकझोर दिया है। बाथरूम में लगे गैस गीजर से निकली जहरीली गैस के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई, और कुछ ही घंटों बाद उनकी पत्नी ने गहरे सदमे में आकर अपनी जान दे दी। इस घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि शहर में घरेलू सुरक्षा और बाथरूम वेंटिलेशन को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने दोनों मौतों की अलग-अलग जांच शुरू कर दी है, जबकि पड़ोसियों और रिश्तेदारों के बीच शोक का माहौल है।

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शुक्रवार शाम का घटनाक्रम

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 48 वर्षीय राजू पेशे से ड्राइवर थे और रोजाना की तरह शुक्रवार की शाम काम से लौटे थे। घर पहुंचने के बाद वे सीधे स्नान करने के लिए बाथरूम में चले गए। काफी देर तक बाहर न आने पर उनके किशोर बेटे ने दरवाजा खटखटाया और आवाज दी, लेकिन भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। घबराकर उसने पड़ोसियों को बुलाया। दरवाजा तोड़कर अंदर जाने पर राजू बाथरूम के फर्श पर बेहोश पड़े मिले। उन्हें तुरंत बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि बाथरूम में लगा गैस गीजर चालू था और वहां हवा के निकलने का कोई उचित रास्ता नहीं था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, किराए के इस मकान में कई सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी, खासकर बाथरूम के डिजाइन को लेकर।

पत्नी का अप्रत्याशित फैसला

घटना की जानकारी मिलते ही बेटे ने अपनी मां मीना राजू को फोन किया, जो उस समय एक निजी बैंक में काम कर रही थीं। खबर सुनते ही 42 वर्षीय मीना दफ्तर से निकल गईं। हालांकि, वह सीधे घर आने के बजाय जक्कासंद्रा इलाके में स्थित उस जगह पर चली गईं, जहां दंपत्ति अपना नया घर बनवा रहे थे। वहीं उन्होंने खुदकुशी कर ली।

पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला, जिसमें मीना ने भावनात्मक पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा कि वह अपने पति के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकतीं। उन्होंने अपने परिवार से माफी भी मांगी। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम गहरे मानसिक आघात और अचानक हुए सदमे का परिणाम प्रतीत होता है।

जांच में उभरी सुरक्षा चूक

फॉरेंसिक विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गैस गीजर के इस्तेमाल से कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैस निकलती है, जो न तो दिखाई देती है और न ही उसमें कोई गंध होती है। बंद जगहों में इसके जमा होने पर व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई होती है और बेहोशी या मौत भी हो सकती है।

नेलमंगला स्थित जिस किराए के घर में राजू परिवार रहता था, उसके बाथरूम में वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी। खिड़की या एग्जॉस्ट फैन का अभाव इस दुर्घटना का प्रमुख कारण माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे घरों की जांच होनी चाहिए जहां गैस गीजर लगे हों लेकिन उचित सुरक्षा इंतजाम न हों।

पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

नेलमंगला टाउन पुलिस ने राजू की मौत के संबंध में अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है, जबकि मीना की मौत की जांच मदननायकनहल्ली पुलिस कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि दोनों मामलों में अलग-अलग कानूनी प्रक्रिया अपनाई जा रही है और विस्तृत रिपोर्ट के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

पुलिस ने मकान मालिक से भी पूछताछ की है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। इसके साथ ही, परिवार के रिश्तेदारों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है।

शहर के लिए चेतावनी

इस दुखद घटना ने बेंगलुरु जैसे महानगर में घरेलू सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि गैस गीजर का इस्तेमाल करते समय पर्याप्त वेंटिलेशन अनिवार्य है और बंद बाथरूम में लंबे समय तक गीजर चलाना जानलेवा हो सकता है। कई सामाजिक संगठनों ने अपील की है कि नगर निगम ऐसे घरों का निरीक्षण करे और जागरूकता अभियान चलाए।

पड़ोसियों के मुताबिक, राजू और मीना मिलनसार दंपत्ति थे और अपने नए घर को लेकर उत्साहित थे। उनकी अचानक मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। उनका बेटा अब अपने रिश्तेदारों के साथ रह रहा है, जबकि समुदाय के लोग उसे सांत्वना देने में जुटे हैं।

यह घटना एक दर्दनाक याद दिलाती है कि छोटी-छोटी लापरवाहियां भी बड़े हादसों का कारण बन सकती हैं, और घर की सुरक्षा को लेकर सजग रहना कितना जरूरी है।

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