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DefenceSteel – आईएनएस तारागिरी की तैनाती में सेल की अहम भागीदारी

DefenceSteel – भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किए गए अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी ने एक बार फिर देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई पहचान दी है। इस युद्धपोत की तैनाती 3 अप्रैल 2026 को की गई, जिसमें सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह उपलब्धि न केवल नौसेना की ताकत को बढ़ाती है, बल्कि देश में स्वदेशी रक्षा उत्पादन की दिशा में एक ठोस कदम भी मानी जा रही है।

sail ins taragiri steel role

युद्धपोत निर्माण में स्वदेशी इस्पात की अहम भूमिका

आईएनएस तारागिरी का निर्माण मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है। इस प्रक्रिया में करीब 4,000 टन विशेष ग्रेड के स्टील प्लेट्स का उपयोग किया गया, जिसकी आपूर्ति सेल ने की। यह इस्पात सामान्य स्टील से अलग होता है और युद्धपोतों के लिए जरूरी मजबूती, टिकाऊपन और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है। इस स्तर का इस्पात तैयार करना तकनीकी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन सेल ने इसे सफलतापूर्वक पूरा किया है।

तीन प्रमुख संयंत्रों में तैयार हुआ विशेष इस्पात

इस युद्धपोत में उपयोग किए गए स्टील का उत्पादन सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में किया गया। ये संयंत्र लंबे समय से उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात उत्पादन के लिए जाने जाते हैं। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र के लिए तैयार किए जाने वाले इस्पात में सटीकता और गुणवत्ता का स्तर बेहद ऊंचा होता है। इन संयंत्रों की क्षमता और तकनीकी दक्षता इस परियोजना में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मिल रहा बल

सेल की यह भागीदारी भारत सरकार की आत्मनिर्भरता से जुड़ी नीतियों को मजबूती देती है। रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी संसाधनों के उपयोग को बढ़ावा देना लंबे समय से प्राथमिकता में रहा है। आईएनएस तारागिरी जैसे युद्धपोतों के निर्माण में घरेलू इस्पात का उपयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भारत अब रक्षा उत्पादन में बाहरी निर्भरता कम कर रहा है।

पहले भी कई परियोजनाओं में निभाई है भूमिका

यह पहला मौका नहीं है जब सेल ने नौसेना के किसी बड़े प्रोजेक्ट में योगदान दिया हो। इससे पहले भी कंपनी ने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के निर्माण में विशेष इस्पात उपलब्ध कराया था। इसके अलावा प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए गए अन्य युद्धपोत जैसे आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि में भी सेल की भागीदारी रही है। इन सभी परियोजनाओं ने देश की समुद्री शक्ति को मजबूत किया है।

समुद्री सुरक्षा को मिलेगा नया आयाम

आईएनएस तारागिरी के शामिल होने से भारतीय नौसेना की रणनीतिक क्षमता और बढ़ेगी। यह युद्धपोत आधुनिक तकनीकों से लैस है और समुद्री सीमाओं की निगरानी तथा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसके निर्माण में स्वदेशी इस्पात का उपयोग यह दर्शाता है कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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