Delimitation Debate – महिला आरक्षण के साथ परिसीमन पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
Delimitation Debate – महिला आरक्षण कानून और प्रस्तावित परिसीमन को लेकर कांग्रेस ने अपनी आपत्तियां स्पष्ट कर दी हैं। पार्टी का कहना है कि महिला आरक्षण का वह समर्थन करती है, लेकिन इसके साथ जिस तरह परिसीमन की प्रक्रिया को जोड़ा जा रहा है, वह संवैधानिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जल्द ही विपक्षी दलों की बैठक बुलाने की तैयारी में हैं, जो संसद के आगामी सत्र से पहले आयोजित हो सकती है।

महिला आरक्षण पर समर्थन, परिसीमन पर चिंता
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के पक्ष में है। हालांकि, पार्टी को इस बात पर आपत्ति है कि परिसीमन के जरिए लोकसभा सीटों में समानुपातिक वृद्धि की जो योजना सामने आ रही है, उससे क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है। पार्टी नेताओं का मानना है कि इससे दक्षिण भारत और छोटे राज्यों के हित प्रभावित हो सकते हैं। इस विषय पर पार्टी ने कहा कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यापक चर्चा जरूरी है।
बैठक में उठे राजनीतिक समय को लेकर सवाल
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में कई वरिष्ठ नेताओं ने इस मुद्दे के समय पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि विधानसभा चुनावों के बीच इस तरह के प्रस्ताव लाना राजनीतिक रूप से प्रभावित कदम हो सकता है। बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी समेत कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया और इस पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही पश्चिम एशिया के हालात पर भी विचार किया गया।
सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव पर आपत्ति
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी परिसीमन को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 800 से अधिक करने की योजना यदि समानुपातिक आधार पर लागू की जाती है, तो इससे कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। प्रस्तावित योजना में महिलाओं के लिए बड़ी संख्या में सीटें आरक्षित करने की बात भी शामिल है।
सरकार की मंशा पर लगाए गए आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि संसद का विशेष सत्र ऐसे समय बुलाया गया है जब कुछ राज्यों में चुनाव प्रक्रिया जारी है। उन्होंने इसे आचार संहिता की भावना के विपरीत बताया। खरगे ने यह भी कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर जल्दबाजी में निर्णय लेने से दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं, इसलिए इस पर गहराई से विचार किया जाना चाहिए।
निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी सवाल
खरगे ने निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि आयोग से इस मामले में सक्रिय हस्तक्षेप की उम्मीद कम है। उन्होंने बताया कि विपक्ष की ओर से पहले भी सरकार को पत्र लिखकर सुझाव दिया गया था कि चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया।
विपक्षी एकजुटता की तैयारी
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में विपक्षी दलों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें महिला आरक्षण कानून और परिसीमन के मुद्दे पर साझा रणनीति बनाई जाएगी। उनका कहना है कि संसद में इन मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा और सरकार से विस्तृत चर्चा की मांग की जाएगी।
मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, प्रक्रिया पर सवाल
कांग्रेस का कहना है कि उसका विरोध महिला आरक्षण से नहीं, बल्कि उससे जुड़े परिसीमन के तरीके से है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में आगे बढ़ाकर अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने दोहराया कि किसी भी संवैधानिक बदलाव से पहले व्यापक सहमति बनाना जरूरी है।



