ForeignPolicy – पश्चिम एशिया संकट पर भारत ने दोहराई शांति की अपील
ForeignPolicy – पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह युद्ध नहीं, बल्कि संवाद और शांति का पक्षधर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हालिया फोन बातचीत में यही संदेश दोहराया कि यह टकराव जल्द समाप्त होना चाहिए, क्योंकि इसका असर केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। इस बातचीत की जानकारी सरकार ने सर्वदलीय बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ साझा की।

प्रधानमंत्री ने बातचीत में जताई चिंता
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई चर्चा में पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात और उनके व्यापक प्रभावों पर विस्तार से बात हुई। इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस मार्ग की निर्बाध आवाजाही वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए जरूरी है। दोनों नेताओं ने स्थिति पर लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
सर्वदलीय बैठक में उठा कूटनीतिक मुद्दा
पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए। खास तौर पर पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता को लेकर चिंता जताई गई। इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि यह कोई नई स्थिति नहीं है और पाकिस्तान पहले भी ऐसी भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारत किसी भी परिस्थिति में ‘मध्यस्थ देश’ की भूमिका नहीं निभाता और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम रहता है।
सरकार ने चुप्पी के आरोपों को किया खारिज
बैठक के दौरान विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दे रही है। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि वह लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रही है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि ईरान से जुड़े घटनाक्रमों पर भारत ने आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए हैं, जिनमें राजनयिक स्तर पर संपर्क बनाए रखना शामिल है।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर फोकस
सरकार ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि उसकी प्राथमिकता खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके अलावा देश के भीतर ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण चिंता है। अधिकारियों के मुताबिक, इन दोनों मोर्चों पर सरकार लगातार काम कर रही है और अब तक स्थिति को नियंत्रित रखने में सफलता मिली है।
विपक्ष ने संसद में चर्चा की मांग दोहराई
बैठक के बाद विपक्षी दलों ने कहा कि उन्हें सरकार के जवाब पूरी तरह संतोषजनक नहीं लगे। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए, ताकि सभी पहलुओं पर खुलकर विचार किया जा सके। विपक्ष का मानना है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट पर व्यापक राजनीतिक संवाद जरूरी है।
स्थिति पर बनी हुई है नजर
पश्चिम एशिया में हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं और इसका असर वैश्विक राजनीति व अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ऐसे में भारत संतुलित रुख अपनाते हुए शांति और स्थिरता की दिशा में अपने प्रयास जारी रखे हुए है।



