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LPGExport – घरेलू आपूर्ति के बीच गैस निर्यात पर हाईकोर्ट की सख्त नजर

LPGExport – महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में एलपीजी आपूर्ति को लेकर उठे विवाद पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने केंद्र सरकार और कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड (CPIL) को नोटिस जारी किया है। अदालत ने इस मामले को गंभीर और सार्वजनिक हित से जुड़ा मुद्दा मानते हुए दोनों पक्षों से जवाब मांगा है। यह याचिका छह एलपीजी डीलरों की ओर से दाखिल की गई है, जिन्होंने आरोप लगाया है कि घरेलू बाजार में कमी के बावजूद एलपीजी का निर्यात प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

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जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस राज डी. वाकोडे की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि यह मामला सीधे तौर पर आम उपभोक्ताओं की जरूरतों से जुड़ा है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अंतिम निर्णय आने तक कंपनी यह सुनिश्चित करे कि घरेलू उपयोग के लिए एलपीजी का भंडारण और वितरण केंद्र सरकार की वर्तमान नीति के अनुसार ही किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को तय की गई है।

डीलरों ने बताई आपूर्ति व्यवस्था में गंभीर समस्या

याचिका दायर करने वाले वितरकों में मेसर्स ओमकार सेल्स सहित पांच अन्य पुराने डीलर शामिल हैं, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में एलपीजी वितरण का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय से विदर्भ के कई जिलों में गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, छोटे व्यवसाय और अन्य संस्थानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

डीलरों का दावा है कि क्षेत्र में एलपीजी की कमी अचानक नहीं आई, बल्कि वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आई बाधाओं ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। उनके मुताबिक ईरान, अमेरिका और मध्य पूर्व के कुछ अन्य आपूर्तिकर्ता देशों से जुड़े हालिया तनाव और संघर्षों ने ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है, जिससे आयात और वितरण दोनों प्रभावित हुए हैं।

निर्यात को प्राथमिकता देने का आरोप

याचिका में यह भी कहा गया है कि स्थानीय डीलर अपनी पूरी एलपीजी जरूरतें CPIL से ही प्राप्त करते हैं। लेकिन हाल के महीनों में कंपनी से मिलने वाली गैस की मात्रा कम हो गई है, जिसके कारण वे अपने उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने में असमर्थ हो रहे हैं।

डीलरों का आरोप है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतें बढ़ने के कारण कंपनी निर्यात पर ज्यादा ध्यान दे रही है। उनका कहना है कि यदि घरेलू मांग को प्राथमिकता नहीं दी गई तो क्षेत्र में गैस की कमी और गहराने की आशंका है। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे कारोबारियों को भी परेशानी हो सकती है।

इस संबंध में डीलरों ने 9 मार्च को कंपनी को एक ज्ञापन भी भेजा था। इसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो वितरण व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा। उनके अनुसार गैस की आपूर्ति में देरी के कारण ग्राहकों की शिकायतें बढ़ रही हैं और भुगतान संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

सरकार के हालिया आदेशों का हवाला

याचिका में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी हालिया आदेशों का भी उल्लेख किया गया है। मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत 5 मार्च और 9 मार्च को कुछ महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे, जिनका उद्देश्य घरेलू एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देना बताया गया है।

9 मार्च को जारी संशोधित आदेश के अनुसार देश की सभी घरेलू और विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की रिफाइनरियों को अपने उत्पादन का उपयोग एलपीजी तैयार करने के लिए करना होगा। इसके बाद यह गैस सार्वजनिक क्षेत्र की तीन प्रमुख तेल विपणन कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि इस गैस का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में नहीं किया जा सकेगा।

इसी दिन अधिसूचित प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश 2026 में भी घरेलू गैस उपयोग को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। इसमें एलपीजी उत्पादन और घरेलू पाइप्ड गैस जैसी जरूरतों को प्राथमिक श्रेणी में रखा गया है।

कंपनी ने आरोपों से किया इनकार

दूसरी ओर कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड ने इन आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि वह अपनी पूर्व निर्धारित निर्यात रणनीति और अंतरराष्ट्रीय अनुबंधों के अनुसार काम कर रही है। कंपनी के मुताबिक ये समझौते मौजूदा संकट से काफी पहले किए गए थे, इसलिए अचानक उन्हें बदलना आसान नहीं है।

कंपनी का तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले से तय आपूर्ति अनुबंधों को एकतरफा रोकना कानूनी और व्यावसायिक रूप से जटिल हो सकता है। हालांकि कंपनी ने यह भी कहा है कि वह अदालत और सरकार के निर्देशों का पालन करेगी।

अब इस मामले पर सबकी नजर 17 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई पर है, जब अदालत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनकर आगे की दिशा तय करेगी।

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