Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की सियासत में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट, जल्द हो सकता है एनसीपी के दोनों गुटों का विलय
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों धड़े, जो पिछले कुछ समय से अलग-अलग राहों पर थे, अब फिर से एक होने की तैयारी में हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले इन दोनों गुटों के बीच एकीकरण की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी और फरवरी के महीने में इसकी औपचारिक घोषणा भी होने वाली थी। हालांकि, डिप्टी सीएम अजित पवार के आकस्मिक निधन के कारण फिलहाल इस योजना को कुछ समय के लिए टाल दिया गया है, लेकिन विलय की संभावनाएं अभी भी खत्म नहीं हुई हैं।

फरवरी में होने वाला था बड़ा राजनीतिक ऐलान
रिपोर्ट्स के अनुसार, एनसीपी के दोनों गुटों ने 8 फरवरी को साथ आने का पूरा मन बना लिया था। सूत्रों का कहना है कि विलय को लेकर बातचीत के कई दौर पूरे हो चुके थे और नेता जिला परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जनता के सामने इस फैसले को रखने वाले थे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना है कि भले ही इस समय परिस्थितियां बदल गई हों, लेकिन राजनीतिक प्रक्रिया पूरी तरह रुकी नहीं है। शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) और सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा रही अजित पवार की एनसीपी के बीच तालमेल बिठाने की कोशिशें जारी हैं।
बारामती में हुई अहम बैठक और भविष्य की रणनीति
हाल ही में बारामती में हुई एनसीपी नेताओं की एक गुप्त बैठक ने इन अटकलों को और हवा दे दी है। बुधवार रात हुई इस चर्चा में दोनों गुटों के भविष्य को लेकर मंथन किया गया। जानकारों का मानना है कि यदि यह विलय सिरे चढ़ता है, तो शरद पवार का गुट भी राज्य सरकार में शामिल हो सकता है। वर्तमान में शरद पवार की पार्टी महाविकास अघाड़ी (MVA) का हिस्सा है, जबकि अजित पवार का गुट महायुति सरकार में शामिल था। इस एकीकरण के बाद महाराष्ट्र के सत्ता समीकरणों में भारी उलटफेर देखने को मिल सकता है।
बैठकों के दौर और कैबिनेट विस्तार की चर्चा
एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे ने भी इन चर्चाओं की पुष्टि की है। उनके अनुसार, दोनों गुटों के बीच संवाद का स्तर इतना गहरा था कि संभावित कैबिनेट फेरबदल और नए मंत्रियों को शामिल करने जैसे मुद्दों पर भी अनौपचारिक रूप से बातचीत शुरू हो गई थी। जयंत पाटिल ने अजित पवार के जाने को पार्टी के लिए एक बड़ी क्षति बताया और खुलासा किया कि 16 और 17 जनवरी को हुई बैठकों में चुनाव साथ लड़ने और पार्टी की एकजुटता को लेकर अंतिम दौर की चर्चा हुई थी।
शरद पवार की मौजूदगी में बनी थी विलय की योजना
शशिकांत शिंदे ने साफ किया है कि दोनों गुटों के बीच सहमति बन चुकी थी और अजित पवार ने स्वयं शरद पवार की उपस्थिति में यह कहा था कि निकाय चुनावों के बाद वे फिर से एक हो जाएंगे। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता उसी दिशा में आगे बढ़ने की योजना बना रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी का यह एकीकरण न केवल पार्टी की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर विरोधियों के लिए भी बड़ी चुनौती पेश करेगा।



