North India Weather Update: कुदरत ने उत्तर भारत को बना दिया ‘कोल्ड स्टोरेज’, डरा रही है हड्डियों को गलाने वाली ठंड
North India Weather Update: उत्तर भारत की फिजाओं में इस वक्त एक ऐसी खामोशी पसरी है जो सीधे हड्डियों में चुभन पैदा कर रही है। पहाड़ों से आ रही सर्द हवाओं ने मैदानी इलाकों को अपने आगोश में ले लिया है और आलम यह है कि इंसान तो क्या बेजान चीजें भी (severe cold wave) की चपेट में आकर जमने लगी हैं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी की चेतावनी ने लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन छीन लिया है, क्योंकि फिलहाल इस भीषण ठंड से राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

राजस्थान के रेगिस्तान में जमी बर्फ की सफेद चादर
रेत के धोरों के लिए मशहूर राजस्थान आज बर्फबारी वाले इलाकों जैसा अहसास करा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में रात का पारा (zero degree temperature) से भी नीचे लुढ़क गया है, जो न केवल चौंकाने वाला है बल्कि आम जनजीवन के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। प्रतापगढ़ और बाड़मेर जैसे जिलों में जिस तरह से तापमान माइनस में गया है, उसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल चुका है।
दिल्ली की दहलीज पर कड़ाके की ठंड का पहला प्रहार
देश की राजधानी दिल्ली इस साल अपनी सबसे कठिन सर्दियों का सामना कर रही है, जहां ठंड ने पिछले कई रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। शहर के आयानगर और पालम जैसे इलाकों में (minimum temperature) गिरकर 2.9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो पिछले 13 वर्षों के इतिहास में सबसे कम आंका जा रहा है। दिल्ली की इस सर्द सुबह में कोहरे और शीतलहर के गठजोड़ ने सड़कों पर सन्नाटा पसरा दिया है और लोग अलाव के सहारे ही अपनी जिंदगी की गाड़ी खींच रहे हैं।
मौसम विभाग का ‘येलो अलर्ट’ और आने वाले दिनों की आशंका
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ दिन दिल्ली-एनसीआर के लिए और भी भारी हो सकते हैं क्योंकि हवाओं की रफ्तार और दिशा ठंड को और सघन बनाएगी। प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए (yellow alert) जारी कर दिया है, ताकि लोग सावधानी बरत सकें और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें। यह केवल एक चेतावनी नहीं है, बल्कि उस बदलती जलवायु का संकेत है जो हर बीतते दिन के साथ उत्तर भारत को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है।
कश्मीर में ‘चिल्ला-ए-कलां’ का खौफनाक मंजर
घाटी में ठंड का सबसे क्रूर दौर शुरू हो चुका है जिसे स्थानीय भाषा में ‘चिल्ला-ए-कलां’ के नाम से जाना जाता है। इस 40 दिनों की अवधि में कश्मीर की वादियों में (frozen dal lake) का नजारा आम हो जाता है, क्योंकि तापमान शून्य से 5 डिग्री नीचे चला जाता है। डल झील का पानी पत्थर की तरह सख्त हो गया है और नलों में पानी बर्फ बन चुका है, जिससे आम जनता को रोजमर्रा के कामों में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सूखे मौसम और बादलों के बीच बर्फबारी का इंतजार
हैरानी की बात यह है कि इस बार कश्मीर के मैदानी इलाकों में कड़ाके की ठंड तो है, लेकिन आसमान से गिरने वाले बर्फ के फाहे अभी भी नदारद हैं। आईएमडी के मुताबिक (weather forecast) कहता है कि 21 जनवरी तक मौसम शुष्क रहेगा लेकिन आसमान में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। लोग इस शुष्क ठंड से परेशान हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि जल्द ही बर्फबारी हो ताकि इस ‘सूखी ठंड’ से होने वाली बीमारियों और दिक्कतों से कुछ हद तक निजात मिल सके।
पंजाब और हरियाणा में जमाव बिंदु पर ठहरी जिंदगी
पंजाब और हरियाणा की मिट्टी, जो सोना उगलने के लिए जानी जाती है, आज शीतलहर की वजह से पूरी तरह ठंडी पड़ चुकी है। इन राज्यों के कई शहरों में (freezing point) के आसपास तापमान रहने से फसलों पर भी बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सुबह के समय दृश्यता इतनी कम होती है कि हाईवे पर वाहनों की रफ्तार थम जाती है और जीवन जैसे एक जगह पर ठहर सा गया है।
पहाड़ों से मैदानों तक कुदरत का कड़ा इम्तिहान
हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के ऊंचे इलाकों में हो रही लगातार बर्फबारी का सीधा असर अब पूरे उत्तर भारत के मैदानी भागों पर दिख रहा है। यह महज एक मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि (winter season survival) की एक ऐसी परीक्षा है जिसमें गरीब और बेघर लोगों के लिए हर रात एक नया संघर्ष लेकर आती है। प्रशासन रैन बसेरों के इंतजाम तो कर रहा है, लेकिन कुदरत के इस प्रचंड प्रहार के आगे सारी व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं।
क्या आने वाले समय में और बढ़ेगी ठंड की तीव्रता?
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर भारत में ठंड का यह स्वरूप अभी और आक्रामक हो सकता है क्योंकि पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता बनी हुई है। आने वाले 48 घंटों में (cold air mass) के प्रभाव से तापमान में और गिरावट आने की संभावना है, जो जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती है। ऐसे में स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बरतना और गर्म कपड़ों के साथ-साथ सही खान-पान का ध्यान रखना ही एकमात्र विकल्प बचा है।



