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Parliament Budget Session: लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में मंत्री के जेब में हाथ डालने पर जताई आपत्ति, सांसदों को दी शिष्टाचार की सलाह

Parliament Budget Session: संसद के बजट सत्र की कार्यवाही इन दिनों पूरे जोश के साथ चल रही है, लेकिन चर्चाओं के बीच सदन के भीतर का अनुशासन भी सुर्खियां बटोर रहा है। लोकसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान एक दिलचस्प वाक्या सामने आया, जब सदन की गरिमा को लेकर अध्यक्ष ओम बिरला काफी सख्त नजर आए। कार्यवाही के दौरान जब एक केंद्रीय मंत्री पूछे गए सवाल का उत्तर देने के लिए खड़े हुए, तो उनके खड़े होने के तरीके और शारीरिक भाषा पर अध्यक्ष ने तुरंत हस्तक्षेप किया। दरअसल, मंत्री महोदय जेब में हाथ डालकर सदन को संबोधित कर रहे थे, जिसे संसदीय शिष्टाचार के विरुद्ध मानते हुए ओम बिरला ने उन्हें बीच में ही टोक दिया।

Parliament Budget Session: लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में मंत्री के जेब में हाथ डालने पर जताई आपत्ति, सांसदों को दी शिष्टाचार की सलाह
Parliament Budget Session: लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में मंत्री के जेब में हाथ डालने पर जताई आपत्ति, सांसदों को दी शिष्टाचार की सलाह
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सदन की मर्यादा और अनुशासन पर अध्यक्ष की दो टूक

यह पूरा वाकया उस समय हुआ जब जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके एक सदस्य के सवाल का जवाब दे रहे थे। उत्तर देते समय मंत्री जी का हाथ उनकी जेब में था, जिस पर नजर पड़ते ही लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें टोकते हुए कहा कि मंत्री जी, सदन में जेब में हाथ डालकर मत बोलिए। ओम बिरला ने स्पष्ट किया कि सांसदों और मंत्रियों का आचरण सदन की स्थापित परंपराओं और मर्यादा के अनुकूल होना चाहिए। अध्यक्ष की इस नसीहत को मंत्री ने तत्काल स्वीकार किया और अपना हाथ जेब से बाहर निकालकर उत्तर जारी रखा। अनुशासन का यह डंडा केवल सत्ता पक्ष पर ही नहीं, बल्कि विपक्ष पर भी चला। ओम बिरला ने कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल को भी उस समय टोका जब वे सदन की कार्यवाही के दौरान अपने साथी सांसदों से बातचीत में मशगूल थे।

प्रश्नकाल की उपयोगिता और समय का प्रबंधन

लोकसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही की शुरुआत में ही अपनी मंशा साफ कर दी थी कि वे सदन के समय का अधिकतम उपयोग जनहित के मुद्दों के लिए करना चाहते हैं। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि प्रश्नकाल के दौरान वे संक्षेप में और सीधे सवाल पूछें ताकि अधिक से अधिक सांसदों को अपने क्षेत्र की समस्याओं को उठाने का अवसर मिल सके। अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि सदन की गरिमा केवल नियमों से नहीं, बल्कि सदस्यों के व्यवहार और सक्रिय भागीदारी से बनती है। उनका उद्देश्य सदन को एक ऐसा मंच बनाना है जहां सार्थक चर्चा हो और संसदीय परंपराओं का पूरी तरह पालन किया जाए।

राज्यसभा में संसदीय मानकों को बनाए रखने का आह्वान

लोकसभा के साथ-साथ राज्यसभा में भी सदन की गरिमा को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। उच्च सदन के 270वें सत्र (Parliament Budget Session) की शुरुआत करते हुए सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों को संबोधित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे चर्चाओं के दौरान संसदीय मर्यादा के उच्चतम मानकों को स्थापित करें। सभापति ने वैश्विक पटल पर भारत की मजबूत होती आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का बढ़ता कद सांसदों की जिम्मेदारी को और अधिक बढ़ा देता है, क्योंकि वे राष्ट्र की आर्थिक और सामाजिक दिशा को तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

भविष्य की चर्चाओं के लिए एक नया दृष्टिकोण

बजट सत्र के शुरुआती दिनों में जिस तरह से दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने अनुशासन और मर्यादा की बात की है, उससे यह साफ है कि इस बार कार्यवाही के दौरान आचरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सदन की गरिमा को बनाए रखना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक आवश्यक कदम है। संसद के भीतर होने वाली हर गतिविधि का सीधा प्रभाव देश की जनता पर पड़ता है, ऐसे में अध्यक्ष और सभापति द्वारा दी गई ये नसीहतें आने वाले दिनों में सदन के माहौल को और अधिक गंभीर और अनुशासित बना सकती हैं।

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