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Nirav Modi Extradition Case: क्या पिंजरे में आएगा भारत का सबसे बड़ा भगोड़ा, नीरव मोदी की किस्मत पर लंदन से आया चौंकाने वाला फैसला

Nirav Modi Extradition Case: पंजाब नेशनल बैंक के साथ अरबों रुपयों की धोखाधड़ी करने वाले भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। ब्रिटेन की हाई कोर्ट ने नीरव मोदी की उस याचिका पर सुनवाई मार्च 2026 तक के लिए टाल दी है, जिसमें उसने अपने भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील को दोबारा खोलने की मांग की थी। भारतीय एजेंसियों के लिए यह (legal proceedings in London) का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, क्योंकि अदालत ने यह फैसला भारतीय अधिकारियों द्वारा दिए गए उन विस्तृत आश्वासनों के बाद लिया है, जिनमें नीरव मोदी की सुरक्षा और जेल में मिलने वाली सुविधाओं का स्पष्ट उल्लेख है।

Nirav Modi Extradition Case
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जजों ने कहा ‘डेजा वू’: बार-बार वही पैंतरे

रॉयल कोर्ट्स ऑफ जस्टिस में जब यह मामला लॉर्ड जस्टिस जेरेमी स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस रॉबर्ट जे की पीठ के सामने आया, तो जजों की टिप्पणी काफी दिलचस्प थी। उन्होंने मामले की शुरुआत में ही कहा कि उन्हें “डेजा वू” यानी पुरानी यादें ताजा होने जैसा अहसास हो रहा है। दरअसल, नीरव मोदी पिछले कई सालों से (extradition law hurdles) का इस्तेमाल करके भारत जाने से बचने की कोशिश कर रहा है और अदालत उसकी इन हरकतों को भली-भांति पहचान चुकी है। जजों का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि अब कानून की आंखों में धूल झोंकना भगोड़े कारोबारी के लिए आसान नहीं रहने वाला है।

आर्थर रोड जेल पर भारत का ठोस आश्वासन

सुनवाई के दौरान भारतीय पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि नीरव मोदी को मुंबई की आर्थर रोड जेल में रखा जाएगा, जहां उसकी मानवाधिकारों और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। सरकार ने जेल की स्थितियों और (prison conditions assurance) को लेकर इतने विस्तृत और ठोस दस्तावेज पेश किए कि ब्रिटिश हाई कोर्ट ने उन्हें रिकॉर्ड पर लेते हुए सुनवाई को आगे बढ़ा दिया। भारत की ओर से दी गई इन दलीलों ने नीरव मोदी के उन दावों की हवा निकाल दी है, जिसमें वह भारतीय जेलों को असुरक्षित बताकर बचने का प्रयास कर रहा था।

गोपनीय कानूनी प्रक्रिया का हुआ पर्दाफाश

सुनवाई के दौरान क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) ने एक सनसनीखेज खुलासा किया कि नीरव मोदी की यह नई याचिका एक गोपनीय कानूनी प्रक्रिया के खत्म होने के ठीक बाद आई है। यह प्रक्रिया संभवतः राजनीतिक शरण (asylum application status) से जुड़ी थी, जिसे ब्रिटिश अधिकारियों ने अगस्त में ही खारिज कर दिया था। जैसे ही उसकी शरण वाली चाल नाकाम हुई, उसने दोबारा अपील खोलने का नया पैंतरा चल दिया। हालांकि, अदालत अब उसके इन गोपनीय दांव-पेंचों को प्रत्यर्पण की राह में देरी करने की एक सोची-समझी साजिश के रूप में देख रही है।

मार्च 2026: नीरव मोदी की अंतिम परीक्षा

अदालत ने इस मामले के निपटारे के लिए अब एक सख्त समय-सीमा निर्धारित कर दी है, जिससे नीरव मोदी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। फरवरी 2026 के मध्य तक दोनों पक्षों को अपनी लिखित दलीलें पूरी करनी होंगी, जिसके बाद मार्च या अप्रैल में (judicial review timeline) के तहत दो दिनों की गहन सुनवाई होगी। इस सुनवाई में अंतिम रूप से यह तय किया जाएगा कि उसकी अपील दोबारा खोली जाएगी या उसे सीधे भारत के हवाले कर दिया जाएगा। यदि अदालत ने अनुमति देने से मना किया, तो उसके प्रत्यर्पण का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।

जेल की कोठरी से वीडियो लिंक पर दिखा भगोड़ा

उत्तर लंदन की पेंटनविल जेल में बंद 54 वर्षीय नीरव मोदी वीडियो लिंक के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल हुआ। कभी करोड़ों के हीरों का व्यापार करने वाला यह शख्स अब जेल की वर्दी में (money laundering suspect) के तौर पर अदालत की बातें सुनते हुए नोट्स बनाता दिखा। उसकी आंखों में डर और बेचैनी साफ झलक रही थी, क्योंकि वह जानता है कि उसके पास कानूनी विकल्पों की कमी होती जा रही है। इस सुनवाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत से सीबीआई और ईडी के चार वरिष्ठ अधिकारी विशेष रूप से लंदन पहुंचे थे।

संजय भंडारी मामले का सहारा लेने की नाकाम कोशिश

नीरव मोदी के वकीलों ने बचाव के लिए हथियार कारोबारी संजय भंडारी के प्रत्यर्पण मामले का उदाहरण पेश किया, जिसे मानवाधिकारों के आधार पर कुछ राहत मिली थी। लेकिन भारतीय पक्ष ने इस दलील का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि (extradition case comparisons) यहां लागू नहीं होतीं क्योंकि भारत सरकार ने नीरव मोदी के मामले में हर स्तर पर सुरक्षा गारंटी दी है। संजय भंडारी और नीरव मोदी के मामले पूरी तरह अलग हैं और उन्हें एक ही तराजू में नहीं तौला जा सकता। भारत की इस दलील से रक्षा पक्ष की रणनीति कमजोर पड़ती नजर आई।

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले की वह काली कहानी

नीरव मोदी मार्च 2019 से ब्रिटेन की जेल में है और उस पर पंजाब नेशनल बैंक से लगभग 2 अरब डॉलर की धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं। भारत में उस पर (financial fraud investigation) के तहत मनी लॉन्ड्रिंग और सबूतों के साथ छेड़छाड़ के कई मुकदमे चल रहे हैं। हालांकि 2021 में ही ब्रिटिश गृह मंत्रालय ने उसके प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी थी, लेकिन वह अपनी दौलत और वकीलों की फौज के सहारे लगातार समय बर्बाद कर रहा है। अब 2026 की यह तारीख तय करेगी कि क्या भारत के साथ विश्वासघात करने वाले इस शख्स को उसकी करनी की सजा मिलेगी या नहीं।

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