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RajyaSabhaElection – टीएमसी ने पश्चिम बंगाल से चार उम्मीदवार मैदान में किए पेश

RajyaSabhaElection – त्रिणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल से राज्यसभा की चार सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और फिल्म अभिनेत्री कोएल मलिक को मैदान में उतारा है। यह घोषणा पार्टी की ओर से सोशल मीडिया मंच के जरिए की गई, जिसमें कहा गया कि ये सभी नाम संगठन की विचारधारा और प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएंगे।

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चुनाव कार्यक्रम और पृष्ठभूमि

निर्वाचन आयोग ने 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी की है। पश्चिम बंगाल की सीटें भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मतदान 16 मार्च को प्रस्तावित है। मौजूदा कार्यकाल पूरा कर रहे चार सदस्यों को इस बार दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। इनमें पार्टी के वरिष्ठ नेता सुब्रत बख्शी, रितब्रत बनर्जी और साकेत गोखले शामिल हैं, जबकि मौसम नूर पहले ही कांग्रेस में शामिल हो चुकी हैं।

राज्यसभा चुनाव को लेकर सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं और इस बीच टीएमसी की यह सूची राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

बाबुल सुप्रियो की नई पारी

बाबुल सुप्रियो का नाम सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है। वह पहले भारतीय जनता पार्टी में थे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। सितंबर 2021 में उन्होंने भाजपा छोड़कर त्रिणमूल कांग्रेस का दामन थामा था। इसके बाद से वे राज्य की राजनीति में सक्रिय हैं।

पार्टी का मानना है कि उनके अनुभव और राष्ट्रीय स्तर की समझ का लाभ संसद के उच्च सदन में मिल सकता है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह नामांकन टीएमसी की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें वह अलग-अलग पृष्ठभूमि के नेताओं को साथ लेकर चलना चाहती है।

प्रशासनिक और कानूनी अनुभव पर जोर

राजीव कुमार, जो पश्चिम बंगाल पुलिस के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं, प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव के लिए जाने जाते हैं। कानून-व्यवस्था और नीतिगत प्रक्रियाओं की समझ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

वहीं मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। संवैधानिक और विधिक मामलों में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें संसद भेजने का फैसला किया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जटिल कानूनी विषयों पर प्रभावी हस्तक्षेप के लिए उनका अनुभव उपयोगी साबित हो सकता है।

सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व की झलक

कोएल मलिक बंगाल की फिल्म दुनिया का जाना-पहचाना चेहरा हैं। सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति को उम्मीदवार बनाने को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा रहा है। पार्टी का मानना है कि समाज के विविध वर्गों की भागीदारी से लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व मजबूत होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस सूची में राजनीतिक, प्रशासनिक, कानूनी और सांस्कृतिक क्षेत्रों का संतुलन दिखाई देता है, जो पार्टी की व्यापक रणनीति को दर्शाता है।

भाजपा की आपत्ति

उम्मीदवारों की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। भाजपा की राज्य इकाई का कहना है कि सूची में आधे नाम गैर-बंगाली पृष्ठभूमि से जुड़े हैं, जिससे क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े होते हैं।

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार की ‘बंगाल पहले’ की नीति और इन नामों के बीच विरोधाभास है। हालांकि, टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि चयन योग्यता और योगदान के आधार पर किया गया है, न कि केवल क्षेत्रीय पहचान के आधार पर।

आगे की राजनीतिक तस्वीर

राज्यसभा चुनाव के नतीजे पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा पर असर डाल सकते हैं। टीएमसी फिलहाल राज्य में मजबूत स्थिति में है और उच्च सदन में अपनी उपस्थिति बनाए रखना चाहती है।

इन नामों के जरिए पार्टी ने अनुभव, विशेषज्ञता और जनस्वीकार्यता को साथ रखने की कोशिश की है। अब सभी की नजरें 16 मार्च को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले परिणामों पर टिकी हैं।

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