राष्ट्रीय

RuafzaTax – सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स विवाद पर दी स्पष्टता

RuafzaTax – गर्मियों में घर-घर में इस्तेमाल होने वाला रूह अफजा अब केवल स्वाद और परंपरा की वजह से ही चर्चा में नहीं है, बल्कि एक लंबे कानूनी विवाद के कारण भी सुर्खियों में रहा। यह सवाल उठाया गया था कि इसे टैक्स के लिहाज से फ्रूट ड्रिंक माना जाए या फिर सामान्य शरबत की श्रेणी में रखा जाए। इस मुद्दे पर चली कानूनी बहस आखिरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ थम गई। अदालत ने साफ किया कि केवल ‘शरबत’ के रूप में बेचे जाने से किसी पेय को ऊंचे टैक्स स्लैब में नहीं डाला जा सकता।

ruhafza tax classification supreme court

पीठ ने क्या कहा

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि कर कानून के संदर्भ में रूह अफजा को फ्रूट ड्रिंक के रूप में देखा जाना चाहिए। अदालत ने माना कि यह उत्पाद फलों से तैयार किया जाता है और उपभोक्ता इसे पानी में मिलाकर पीते हैं। ऐसे में इसे सिर्फ नाम के आधार पर अलग श्रेणी में रखना उचित नहीं है।

पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि टैक्स निर्धारण करते समय उत्पाद की वास्तविक प्रकृति और उसकी संरचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि केवल व्यापारिक प्रस्तुति को।

विवाद की पृष्ठभूमि

मामला हमदर्द (वक्फ) लैबोरेटरीज की अपील से जुड़ा था, जो रूह अफजा का निर्माण करती है। विवाद इस बात पर केंद्रित था कि लगभग 10 प्रतिशत फ्रूट जूस, इनवर्ट शुगर सिरप और हर्बल डिस्टिलेट से तैयार इस पेय को कानूनी रूप से फ्रूट ड्रिंक की श्रेणी में रखा जा सकता है या नहीं।

राज्य के कर अधिकारियों का तर्क था कि चूंकि इसमें फ्रूट जूस की मात्रा 25 प्रतिशत से कम है, इसलिए इसे फ्रूट सिरप नहीं माना जा सकता। इसी आधार पर इसे अधिक टैक्स वाले वर्ग में शामिल किया गया था।

हाईकोर्ट का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट और कर विभाग के वर्ष 2018 के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें रूह अफजा को उत्तर प्रदेश वैल्यू एडेड टैक्स कानून के तहत 12.5 प्रतिशत टैक्स योग्य ‘अनक्लासिफाइड’ वस्तु माना गया था।

अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित अवधि के लिए इसे शेड्यूल II (पार्ट A) की प्रविष्टि 103 के तहत फ्रूट ड्रिंक या प्रोसेस्ड फ्रूट प्रोडक्ट के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए। इस श्रेणी पर 1 जनवरी 2008 से 31 मार्च 2012 तक 4 प्रतिशत की रियायती वैट दर लागू थी। इस फैसले से कंपनी को कर राहत मिलने का मार्ग साफ हो गया है।

फूड सेफ्टी नियम और टैक्स कानून

सुनवाई के दौरान कर विभाग ने फूड सेफ्टी रेगुलेशन का हवाला दिया, जिसमें फ्रूट सिरप के लिए न्यूनतम 25 प्रतिशत फ्रूट जूस की शर्त बताई गई है। विभाग का कहना था कि चूंकि रूह अफजा इस मानक पर खरा नहीं उतरता, इसलिए इसे फ्रूट ड्रिंक नहीं माना जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि नियामक परिभाषाएं और कर संबंधी व्याख्या अलग-अलग संदर्भों में लागू होती हैं। जब तक टैक्स कानून स्पष्ट रूप से किसी अन्य कानून की परिभाषा को नहीं अपनाता, तब तक केवल फूड सेफ्टी नियमों के आधार पर कर निर्धारण नहीं किया जा सकता।

व्यापक प्रभाव

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में अन्य उत्पादों के टैक्स वर्गीकरण से जुड़े मामलों में भी मार्गदर्शक साबित हो सकता है। अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि कराधान के मामलों में वस्तु की वास्तविक प्रकृति और कानून की भाषा ही निर्णायक होगी।

रूह अफजा के संदर्भ में यह निर्णय लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता को समाप्त करता है और कर व्यवस्था में स्पष्टता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.