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Rape Accused Granted Bail: रेप केस में आरोपी को मिली जमानत, पीड़िता के व्यवहार में नजर आई जटिलता

Rape Accused Granted Bail: चंडीगढ़ की जिला अदालत से हाल ही में एक ऐसा फैसला सामने आया है, जिसने भारत में सहमति और नाबालिगता के कानून पर एक नई बहस छेड़ दी है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. याशिका की अदालत ने एक आरोपी युवक को अपहरण और बलात्कार जैसे गंभीर आरोपों से बरी कर दिया। इस बरी होने का आधार बेहद ही असाधारण था: शादी और रिसेप्शन की तस्वीरों में पीड़िता का ‘काफी खुश’ दिखना और अभियोजन पक्ष द्वारा लड़की की नाबालिग उम्र (Minority) साबित करने में विफलता। यह फैसला भारतीय न्याय प्रणाली में दस्तावेजी प्रमाण, मेडिकल अनुमान और लड़की के आचरण के महत्व को स्थापित करता है, जो भविष्य के मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल (Legal Precedent) बन सकता है।

Rape Accused Granted Bail
Rape Accused Granted Bail

प्रेम प्रसंग या अपहरण? एक गंभीर आरोप की शुरुआत (Initial Complaint)

मामला मई 2023 का है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 14 मई 2023 को लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनकी 15 वर्षीय बेटी 12 मई को बिना बताए घर से चली गई। पिता का आरोप था कि आरोपी युवक उनकी बेटी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर भगा ले गया। इस शिकायत के आधार पर, पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 363 (अपहरण), 376(2)(n) (बार-बार बलात्कार), और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं 4 व 6 के तहत आरोपपत्र दायर किया। मामला सीधे-सीधे एक नाबालिग के यौन शोषण और अपहरण से जुड़ा प्रतीत हो रहा था, जिससे आरोपी को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती थी।

उम्र का रहस्य और मेडिकल अनुमान का नियम (Age Determination)

अदालत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती पीड़िता की उम्र साबित करने की थी, क्योंकि लड़की की उम्र ही इस मामले में पॉक्सो एक्ट की प्रासंगिकता तय करती थी। ओसिफिकेशन टेस्ट (Ossification Test) में लड़की की हड्डी की उम्र 15-16 वर्ष और दंत आयु 14-16 वर्ष बताई गई थी। हालाँकि, अदालत ने मेडिकल अनुमान पर निर्भर न रहने का फैसला किया। न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए, अदालत ने मेडिकल अनुमान वाली उम्र में दो वर्ष की त्रुटि-सीमा (Margin of Error) लागू की। इस छूट को लागू करने पर, अदालत ने पाया कि युवती की आयु उसकी मेडिकल परीक्षा के समय 18 वर्ष से अधिक बैठती थी। इस प्रकार, घटना की तिथि (12 मई 2023) पर भी उसे वयस्क (Major) माना जा सकता था।

निर्णायक सबूतों की गैर-मौजूदगी बनी बरी का आधार (Documentary Evidence)

फैसले में न्यायाधीश ने इस बात पर सबसे अधिक जोर दिया कि अभियोजन पक्ष नाबालिगता को साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाया। अदालत ने उल्लेख किया कि न तो कोई स्कूल रिकॉर्ड और न ही नगर निगम का जन्म प्रमाण पत्र पेश किया गया, जो संदेह से परे साबित कर सके कि घटना के समय युवती नाबालिग थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक अभियोजन पक्ष किसी व्यक्ति की नाबालिग उम्र को आधिकारिक दस्तावेजों से सिद्ध न कर दे, केवल मेडिकल अनुमान के आधार पर सहमति आधारित संबंध (Consensual Relationship) पर पॉक्सो एक्ट लागू नहीं किया जा सकता। यह कानूनी सिद्धांत मामले को एक नया मोड़ (Turning Point) देता है।

तस्वीरों ने खोल दी ‘सहमति’ की कहानी (Voluntary Consent)

अदालत ने केवल कानूनी पहलुओं पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि लड़की के आचरण (Conduct) पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की। जज ने विवाह और रिसेप्शन की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि युवती तस्वीरों में ‘बहुत खुश दिख रही है’। यह तथ्य, जबरन यौन संबंध या अपहरण के आरोपों के विपरीत जाता है। इसके अलावा, अदालत ने इस बात को भी रेखांकित किया कि युवती का घर आरोपी के घर से मात्र 5-6 मकान की दूरी पर था। यदि वह अपनी इच्छा के विरुद्ध वहाँ होती, तो उसके पास घर लौटने का आसान रास्ता था। न्यायालय ने कहा कि यदि जबरन यौन संबंध बनाए जाते, तो वह शोर मचा सकती थी, जिससे स्पष्ट होता है कि यदि कोई संबंध बने भी हों तो वे पूरी तरह से उसकी सहमति (Voluntary Consent) पर आधारित थे।

विरोधाभास ने जन्म दिया अभियोजन की कहानी पर संदेह को (Doubt in Prosecution)

फैसले के अंत में, अदालत ने अभियोजन पक्ष की कहानी (Prosecution’s Case) की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। न्यायालय ने माना कि युवती और उसके पिता के बयान विभिन्न मंचों पर एक-दूसरे से मेल नहीं खाते थे, जिससे पूरी कहानी पर संदेह पैदा हुआ। अदालत ने इस संभावना को स्वीकार किया कि युवती स्वयं अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई हो, और बाद में, कानूनी पचड़ों से बचने के लिए, इसे प्रलोभन देकर ले जाने के रूप में प्रस्तुत किया गया हो। चूंकि लगाए गए आरोप संदेह से परे साबित नहीं हुए, इसलिए न्याय के सिद्धांत को बनाए रखते हुए आरोपी युवक को सभी आरोपों से बरी (Rape Accused Granted Bail) कर दिया गया।

 

 

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