RussianOil – अमेरिकी छूट खत्म होने के बावजूद भारत जारी रखेगा तेल खरीद
RussianOil – अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद पर दी गई छूट की समयसीमा 19 अप्रैल को समाप्त हो रही है, लेकिन भारत ने साफ संकेत दिए हैं कि इससे उसकी ऊर्जा नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखेगा। इससे पहले भी जब अमेरिका ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, तब भी भारत ने पूरी तरह खरीद बंद नहीं की थी।

कीमत और परिवहन लागत का समीकरण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच भारत अपनी खरीद रणनीति को संतुलित तरीके से तय कर रहा है। हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चा तेल करीब 64 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जबकि रूस से यह लगभग 60 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर उपलब्ध था। हालांकि रूस से तेल लाने में परिवहन लागत अधिक होती है, जिससे कुल खर्च लगभग बराबर पड़ता है। इसके बावजूद भारत विभिन्न स्रोतों से खरीद को संतुलित बनाए हुए है।
ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता
सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत पहले भी यह स्पष्ट कर चुका है कि वह अपनी 1.4 अरब की आबादी की जरूरतों और बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही ऊर्जा से जुड़े फैसले करेगा। यही कारण है कि किसी एक देश की नीति या दबाव का सीधा असर भारत के निर्णयों पर नहीं पड़ता। ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
प्रतिबंधों के बीच विकल्पों की तलाश
भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि रूस से तेल खरीद पर सीधा प्रतिबंध नहीं है, बल्कि कुछ विशेष कंपनियों पर पाबंदियां लागू होती हैं। ऐसे में भारत उन कंपनियों से दूरी बनाकर अन्य माध्यमों से खरीद के विकल्प तलाश रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन भी हो और ऊर्जा आपूर्ति भी प्रभावित न हो।
आयात के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव
पिछले एक वर्ष में रूस से तेल आयात के आंकड़ों में बदलाव देखने को मिला है। एक समय भारत प्रतिदिन औसतन 26 लाख बैरल तेल खरीद रहा था, जो फरवरी में घटकर लगभग 10 लाख बैरल रह गया। इसके बाद मार्च में यह बढ़कर 15 लाख बैरल और अप्रैल में करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया। वर्तमान में भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 38 प्रतिशत हिस्सा रूस से प्राप्त कर रहा है।
वैश्विक परिदृश्य और भारत की स्थिति
वैश्विक स्तर पर तेल आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत बहुस्तरीय रणनीति अपनाते हुए अलग-अलग देशों से तेल आयात कर रहा है। चीन के बाद भारत रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका को दर्शाता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर चिंता
इसी बीच भारत ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाए जाने पर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही बेहद जरूरी है, क्योंकि यह वैश्विक व्यापार के लिए अहम मार्ग है। भारत ने इस क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
आगे की नीति पर नजर
भारत की ऊर्जा नीति आने वाले समय में भी वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों के बीच भारत अपने हितों को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक फैसले लेता रहेगा।