राष्ट्रीय

StrayDogs – तेलंगाना में 100 आवारा कुत्तों की मौत से मचा विवाद

StrayDogs – तेलंगाना के मनचेरियल जिले से एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां करीब 100 आवारा कुत्तों को कथित तौर पर जहर देकर मारने का मामला सामने आया है। स्थानीय पुलिस के अनुसार, कुत्तों को मारने के बाद उनके शवों को पास की एक नदी के किनारे दफना दिया गया। इस घटना की जानकारी तब सामने आई जब पशु कल्याण कार्यकर्ता ए. गौतम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जांच की मांग की।

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पशु कल्याण कार्यकर्ता ने दर्ज कराई शिकायत

मामले को उजागर करने वाले ए. गौतम ‘स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ नामक गैर-सरकारी संगठन से जुड़े हुए हैं और वहां क्रूरता निवारण प्रबंधक के रूप में कार्य कर रहे हैं। गौतम ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव की जानकारी में दो लोगों ने मिलकर बड़ी संख्या में कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन दिए।

उनका कहना है कि कुत्तों की मौत के बाद उनके शवों को छिपाने के लिए उन्हें गांव के पास बहने वाली नदी के किनारे दफना दिया गया। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह घटना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि पशुओं के प्रति अत्यधिक क्रूरता को भी दर्शाती है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी

शिकायत मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम तथा भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच की जा रही है और आरोपों की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कुत्तों को किस प्रकार जहर दिया गया और इस घटना में कितने लोग शामिल थे।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

तेलंगाना में आवारा कुत्तों को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, जनवरी इस वर्ष और पिछले वर्ष दिसंबर के दौरान राज्य के अलग-अलग जिलों में लगभग 1,300 आवारा कुत्तों को मारने की घटनाएं सामने आई थीं।

इन मामलों में भी पशु कल्याण संगठनों ने शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद कई स्थानों पर सरपंचों, पंचायत अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने आना चिंताजनक है और इससे यह संकेत मिलता है कि आवारा पशुओं के प्रबंधन को लेकर व्यवस्था में गंभीर कमी है।

पंचायत चुनाव और स्थानीय मुद्दों से जुड़ी आशंका

कुछ स्थानीय सूत्रों का मानना है कि यह घटना गांवों में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर किए गए वादों से भी जुड़ी हो सकती है। पिछले वर्ष दिसंबर में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान कई स्थानों पर आवारा कुत्तों की समस्या को खत्म करने का मुद्दा उठाया गया था।

ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चुनावी वादों को पूरा करने के दबाव में कुछ स्थानीय प्रतिनिधियों ने गलत और अवैध तरीके अपनाए। हालांकि, इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट स्थिति सामने आ सकेगी।

आवारा कुत्तों को लेकर देशभर में जारी बहस

भारत में आवारा कुत्तों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। एक पक्ष का मानना है कि इन पशुओं की सुरक्षा और देखभाल समाज की जिम्मेदारी है, जबकि दूसरा पक्ष इसे सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी समस्या के रूप में देखता है।

राजधानी दिल्ली में भी सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने एक समय पर उन्हें हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके विरोध में विभिन्न पशु अधिकार समूहों ने प्रदर्शन किया। बाद में अदालत ने अपने आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

ऐसे में तेलंगाना की यह घटना एक बार फिर इस बहस को सामने ले आई है कि आवारा कुत्तों की समस्या का समाधान कानून के दायरे में रहते हुए मानवीय तरीके से कैसे किया जाए।

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