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Temjen Imna Along Racism Remark: नस्लवाद के खिलाफ नागालैंड के मंत्री ने लगाई दहाड़, बोले- हमें खाने की चीज़ समझना बंद करो…

Temjen Imna Along Racism Remark: उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा के एक छात्र की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। यह केवल एक आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे नस्लीय भेदभाव के आरोपों ने (North East Student Death) समाज के अंतर्मन को झकझोर दिया है। अपनी अलग शारीरिक बनावट के कारण अक्सर अपनों के ही बीच परायापन झेलने वाले पूर्वोत्तर के लोगों के लिए यह घटना गहरे जख्मों को हरा करने वाली साबित हुई है। इस दुखद घड़ी में पूरे देश से न्याय की मांग उठ रही है।

Temjen Imna Along Racism Remark
Temjen Imna Along Racism Remark

तेमजेन इम्ना अलॉन्ग का कड़ा और गंभीर रुख

सोशल मीडिया पर अपनी हाजिरजवाबी और मजाकिया अंदाज के लिए मशहूर नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग इस बार बेहद गंभीर और आक्रामक नजर आए। उन्होंने देहरादून की घटना पर (Racial Discrimination In India) कड़ा ऐतराज जताते हुए उन लोगों को आईना दिखाया है जो संकीर्ण मानसिकता का शिकार हैं। अक्सर मुस्कुराते हुए गंभीर संदेश देने वाले मंत्री ने इस बार दोटूक शब्दों में साफ कर दिया कि पूर्वोत्तर की गरिमा के साथ खिलवाड़ अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

“हम मोमो नहीं हैं” – पहचान की लड़ाई

नस्लीय टिप्पणी करने वालों पर प्रहार करते हुए तेमजेन इम्ना ने एक बहुत ही मार्मिक और तार्किक बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि हम खुद को किसी भी तरह से चाइनीज नहीं मानते और न ही हम ‘मोमो’ हैं। उन्होंने कहा कि (Northeast Identity Crisis) मोमो एक बेहतरीन डिश है जिसे लोगों को स्वाद लेकर खाना चाहिए, लेकिन इंसानों को खाने की वस्तु के नाम से पुकारना उनकी पहचान का अपमान है। किसी व्यक्ति को उसकी बनावट के आधार पर संबोधित करना न केवल गलत है, बल्कि यह एक अमानवीय कृत्य है।

शारीरिक बनावट और भारतीयता का अटूट रिश्ता

मंत्री ने उन लोगों की मानसिकता को आड़े हाथों लिया जो आज भी शारीरिक विशेषताओं के आधार पर अपने ही देश के नागरिकों को विदेशी या बाहरी समझते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि (Indian Citizenship Equality) पूर्वोत्तर के लोग भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। बोलने से पहले लोगों को यह सोचना चाहिए कि उनके शब्द किसी की भावनाओं और उसकी सांस्कृतिक पहचान को कितनी गहरी चोट पहुँचा सकते हैं। भारत की विविधता ही उसकी ताकत है, न कि भेदभाव का आधार।

दोषियों के लिए अनोखी सजा का प्रस्ताव

तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने इस मामले में कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ एक सुधारात्मक सजा का सुझाव भी दिया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने ऐसी घिनौनी टिप्पणी की है, उन्हें (Punishment For Racism) जेल की सलाखों के पीछे रहने के साथ-साथ कम से कम एक साल के लिए पूर्वोत्तर के राज्यों में सेवा के लिए भेजा जाना चाहिए। उनका मानना है कि जब ये लोग वहां रहेंगे, वहां की संस्कृति को करीब से देखेंगे और वहां के लोगों की आत्मीयता का अनुभव करेंगे, तब उन्हें असलियत का एहसास होगा।

एक समाज को बदनाम करना गलत

मंत्री ने अपनी बात को संतुलित रखते हुए कहा कि हम किसी एक विशेष समाज या क्षेत्र को पूरी तरह बदनाम नहीं कर सकते, क्योंकि अपराध कुछ अज्ञानी व्यक्तियों की सोच का परिणाम होता है। उन्होंने (Social Awareness Northeast) उन लोगों की समझ पर सवाल उठाया जो एकता के सूत्र को नहीं पहचानते। उन्होंने गर्व से दोहराया कि पूर्वोत्तर के लोग भारत का अटूट अंग हैं और उनकी वफादारी और भारतीयता पर सवाल उठाना देश के संविधान का अपमान करने जैसा है।

संवेदनशीलता और न्याय की पुकार

देहरादून की इस घटना ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर संवेदनशीलता की आवश्यकता को रेखांकित किया है। केवल कानून बना देने से नस्लवाद खत्म नहीं होगा, इसके लिए (Justice For Tripura Student) वैचारिक बदलाव और शिक्षा की जरूरत है। तेमजेन इम्ना अलॉन्ग की यह तीखी प्रतिक्रिया उन लाखों युवाओं की आवाज है जो शिक्षा और रोजगार के लिए अपने घरों से दूर दूसरे राज्यों में जाते हैं और वहां सुरक्षा के साथ-साथ सम्मान की उम्मीद रखते हैं।

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