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Viksit Bharat-G Ram Ji Bill 2025: क्या मनरेगा का अंत है ‘विकसित भारत-जी राम जी’ विधेयक, नाम और बजट पर छिड़ा महासंग्राम…

Viksit Bharat-G Ram Ji Bill 2025: देश की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना ‘मनरेगा’ अब एक नए रूप और नए नाम के साथ सामने आ रही है, लेकिन इसने संसद से लेकर सड़क तक हंगामे की स्थिति पैदा कर दी है। केंद्र की एनडीए सरकार द्वारा पेश किए गए विकसित भारत-जी राम जी विधेयक 2025 को लेकर विपक्ष ही नहीं, बल्कि सरकार के अपने सहयोगी दल भी सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीण भारत की जीवनरेखा मानी जाने वाली इस योजना में (political policy debate) का स्तर इतना बढ़ गया है कि अब इसके भविष्य को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई जा रही हैं। सरकार इसे विकास का नया मंत्र बता रही है, जबकि विरोधी इसे गरीबों के हक पर चोट मान रहे हैं।

Viksit Bharat-G Ram Ji Bill 2025
Viksit Bharat-G Ram Ji Bill 2025

सहयोगी दल टीडीपी की तीखी आपत्ति

हैरानी की बात यह है कि इस विधेयक के विरोध में विपक्षी दलों के साथ-साथ तेलुगु देशम पार्टी (TDP) भी खड़ी नजर आ रही है। टीडीपी ने स्पष्ट रूप से उस प्रावधान का विरोध किया है जिसमें योजना के खर्च का एक बड़ा हिस्सा राज्यों के कंधों पर डालने की बात कही गई है। पार्टी का मानना है कि राज्यों की वित्तीय स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण है और ऐसे में (central state financial relations) के सिद्धांतों का सम्मान किया जाना चाहिए। टीडीपी ने साफ किया है कि वे सुधारों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन आर्थिक बोझ साझा करने के तरीके पर उन्हें गंभीर आपत्ति है।

आंध्र प्रदेश के आर्थिक संकट का हवाला

टीडीपी सांसद लवु श्री कृष्ण देवरयालु ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश साल 2014 से ही नकदी के संकट से जूझ रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि मनरेगा में संशोधन की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी, लेकिन (fiscal federalism in India) को ध्यान में रखते हुए ही कोई भी बदलाव किया जाना चाहिए। सांसद का कहना है कि काम के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 करना एक सराहनीय कदम है, लेकिन इसके लिए आवश्यक धन का प्रबंधन केंद्र को अधिक जिम्मेदारी के साथ करना होगा ताकि राज्यों पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

40 फीसदी भुगतान के प्रावधान पर फंसा पेंच

योजना के नए संस्करण का स्वागत करने के बावजूद टीडीपी ने एक विशेष नियम पर अपनी असहमति दर्ज कराई है। पार्टी प्रवक्ता एन विजय कुमार ने कहा है कि सरकार को 40 फीसदी भुगतान वाले प्रावधान पर दोबारा विचार करना चाहिए। ग्रामीण विकास के इस नए ढांचे में (employment guarantee scheme reforms) को लागू करते समय सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी राज्य की विकास गति धन के अभाव में न रुके। टीडीपी को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उनके अनुरोध पर सकारात्मक रुख अपनाएगी और राज्यों को संकट से बचाएगी।

कांग्रेस का नाम बदलने पर राष्ट्रव्यापी विरोध

इधर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को राष्ट्रपिता का अपमान करार दिया है। कांग्रेस बुधवार को इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन करने की तैयारी में है, जिसका उद्देश्य जनता को सरकार की मंशा के प्रति जागरूक करना है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि (national employment policy) में इतने बड़े बदलाव बिना किसी व्यापक चर्चा या संसदीय समिति की समीक्षा के नहीं किए जाने चाहिए। उनका आरोप है कि सरकार केवल प्रतीकों को मिटाने की राजनीति कर रही है, जिससे ग्रामीण गरीबों का भला नहीं होने वाला।

लोकसभा में ध्वनि मत से मिली मंजूरी

तमाम शोर-शराबे और हंगामे के बीच ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस विधेयक को लोकसभा में पेश किया। विपक्ष के कड़े विरोध के बावजूद सदन ने इसे ध्वनि मत से अपनी मंजूरी दे दी है। इस दौरान सदन का माहौल काफी गरमाया रहा और नारेबाजी के बीच (parliamentary legislative process) को आगे बढ़ाया गया। विपक्ष लगातार इस विधेयक को वापस लेने या इसे जांच के लिए संसदीय समिति के पास भेजने की मांग करता रहा, लेकिन सरकार ने अपने बहुमत के बल पर इसे पारित कराने का फैसला किया।

शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष को करारा जवाब

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि महात्मा गांधी किसी एक पार्टी की संपत्ति नहीं हैं, बल्कि वे पूरे देश के दिलों में बसते हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए याद दिलाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी कई बार योजनाओं के नाम बदले थे। चौहान ने तर्क दिया कि (rural development funding) के मामले में मोदी सरकार ने पिछले वर्षों में रिकॉर्ड 8.53 लाख करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नाम बदलने से गांधी जी के विचारों और आदर्शों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता कम नहीं हो जाती।

125 दिन के रोजगार की नई गारंटी

सरकार का दावा है कि यह विधेयक केवल नाम का बदलाव नहीं है, बल्कि यह गांवों के संपूर्ण विकास का एक खाका है। मंत्री ने सदन को बताया कि अब श्रमिकों को 100 के बजाय 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी जा रही है। इस वादे को पूरा करने के लिए (government budget allocation) के तहत 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि ‘विकसित भारत-जी राम जी’ विधेयक ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकेगा और पलायन की समस्या को जड़ से खत्म करने में मदद करेगा।

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