DefenceTech – प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से मजबूत होगा रक्षा उत्पादन
DefenceTech – प्रयागराज में आयोजित नॉर्थ टेक सिम्पोजियम के दूसरे दिन रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने देश के रक्षा क्षेत्र को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों का केवल खरीदार नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया को रक्षा सामग्री उपलब्ध कराने वाला प्रमुख देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। न्यू कैंट स्थित कोबरा ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य से रक्षा क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की हिस्सेदारी 23 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक ले जाने की योजना पर काम चल रहा है।

रक्षा त्रिवेणी संगम विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना की उत्तरी और मध्य कमान के अधिकारियों के साथ रक्षा उद्योग से जुड़े कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। मंत्री ने कहा कि देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने में निजी उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई की अहम भूमिका होगी।
नवाचार और स्टार्टअप पर सरकार का जोर
संजय सेठ ने कहा कि देश में लाखों स्टार्टअप और करोड़ों एमएसएमई कार्यरत हैं, जिनमें से बड़ी संख्या अब रक्षा क्षेत्र की ओर बढ़ रही है। उनके अनुसार लगभग 16 हजार एमएसएमई रक्षा उत्पादन से जुड़ चुके हैं और आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कंपनियों से नई तकनीकों पर लगातार काम करने का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि पुरानी तकनीकों पर लंबे समय तक निर्भर रहना अब संभव नहीं है। बदलती वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय कंपनियों को आधुनिक हथियार, निगरानी प्रणाली और सुरक्षा उपकरण विकसित करने होंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार रक्षा उत्पादन करने वाली कंपनियों को आर्थिक और तकनीकी सहायता दे रही है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने भारतीय रक्षा क्षमता पर दुनिया का भरोसा बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने आधुनिक तकनीक के सहारे बेहद कम समय में आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था। इससे देश की सैन्य ताकत और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन पूरी दुनिया के सामने हुआ।
उन्होंने रक्षा उपकरण बनाने वाली कंपनियों की सराहना करते हुए कहा कि ये उद्योग सीमा पर खड़े सैनिकों के पीछे मजबूत दीवार की तरह काम करते हैं। मंत्री ने कहा कि कारखानों में मेहनत बढ़ने का सीधा असर सैनिकों की सुरक्षा पर पड़ता है।
स्वदेशी हथियारों की बढ़ती ताकत
कार्यक्रम के दौरान स्वदेशी हथियार निर्माण को लेकर भी कई अहम जानकारियां सामने आईं। बेंगलुरू की कंपनी ट्रिपलएस द्वारा विकसित आधुनिक गनों को सेना, अर्द्धसैनिक बल और उत्तर प्रदेश पुलिस में शामिल करने की तैयारी की जा रही है। कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि नई स्वदेशी गन की मारक क्षमता पहले इस्तेमाल हो रही विदेशी गनों से अधिक है।
कंपनी के अनुसार नई गन 1800 मीटर तक प्रभावी फायरिंग कर सकती है, जबकि पुरानी गनों की रेंज करीब 1400 मीटर थी। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि इस हथियार की मांग विदेशों से भी मिलने लगी है। आर्मेनिया को इसकी आपूर्ति की जा चुकी है और नेपाल समेत कई अन्य देशों ने भी रुचि दिखाई है।
प्रदर्शनी में दिखीं आधुनिक रक्षा तकनीकें
सिम्पोजियम के दौरान रक्षा उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें सेना के लिए तैयार किए जा रहे आधुनिक उपकरणों और हथियारों का प्रदर्शन किया गया। रक्षा राज्य मंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया और नई तकनीकों की जानकारी ली। खुले मैदान में सेना के लिए विकसित कुछ उपकरणों का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, रक्षा विशेषज्ञों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा तकनीक और स्वदेशी सैन्य उत्पादन के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है।