FakeInspector – गिरफ्त में आया वर्दी की आंड़ में नौकरी का झांसा देने वाला आरोपी
FakeInspector – गोरखपुर में फर्जी आईएएस और आईपीएस के मामलों के बाद अब पुलिस ने खुद को इंस्पेक्टर बताकर लोगों से ठगी करने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पुलिस की वर्दी पहनकर क्षेत्र में घूमता था और खुद को तैनात अधिकारी बताकर लोगों पर धौंस जमाता था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह नौकरी दिलाने के नाम पर मोटी रकम वसूलता था और सड़क पर चेकिंग का दिखावा कर भी पैसे ऐंठता था।

सूचना पर हुई कार्रवाई
सिकरीगंज थाने को जानकारी मिली थी कि कस्बे में एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस की वर्दी में घूम रहा है। सूचना के आधार पर थानाध्यक्ष के नेतृत्व में टीम ने सिकरीगंज-बेलघाट मार्ग पर डड़िहथ मोड़ के पास एक कार को रोका। वाहन में बैठा युवक पुलिस निरीक्षक की वर्दी में था। पूछताछ के दौरान वह अपनी तैनाती और पद से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया।
सख्ती से पूछने पर उसकी कहानी टूट गई और उसने स्वीकार किया कि वह फर्जी दस्तावेजों के सहारे खुद को अधिकारी बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था। उसकी पहचान दिग्विजयनाथ के रूप में हुई है, जो बेलघाट क्षेत्र का निवासी बताया गया है।
वर्दी, आईकार्ड और कार बरामद
पुलिस ने आरोपी के पास से उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी, फर्जी पहचान पत्र, नेम प्लेट, बैज, स्टार, पेनड्राइव, मोबाइल फोन और एक अल्टो कार बरामद की है। बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि वह पूरी तैयारी के साथ लोगों को भ्रमित करता था। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी अपने पास मौजूद आईकार्ड दिखाकर खुद को असली इंस्पेक्टर साबित करने की कोशिश करता था।
नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कई लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देकर रकम ली। भदारखास क्षेत्र के एक युवक ने शिकायत दर्ज कराई कि उससे छह लाख रुपये लिए गए। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस सक्रिय हुई।
पुलिस के अनुसार, अब तक तीन लोगों से करीब 16.30 लाख रुपये ठगे जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि जांच एजेंसियों को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या बढ़ सकती है। पुलिस अन्य संभावित शिकायतकर्ताओं से भी संपर्क कर रही है।
अन्य जिलों में भी फैलाया जाल
तफ्तीश में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अलग-अलग जिलों में लोगों को निशाना बनाया। किसी से पुलिस विभाग में भर्ती का वादा किया गया तो किसी को विश्वविद्यालय में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। अलग-अलग रकम वसूल कर वह लंबे समय से सक्रिय था।
पुलिस को उसके पास से कई युवाओं की मार्कशीट और अन्य शैक्षिक दस्तावेज भी मिले हैं। माना जा रहा है कि नौकरी के नाम पर उसने ये कागजात जमा कराए थे। अब इन दस्तावेजों के आधार पर संभावित पीड़ितों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
गौरतलब है कि हाल के दिनों में जिले में फर्जी आईएएस और फर्जी आईपीएस के मामले भी सामने आए थे। उन मामलों में भी आरोपियों ने नौकरी और ठेके का झांसा देकर लोगों से धन वसूला था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है।
पहले पुलिस में भर्ती, फिर छोड़ी नौकरी
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपी वर्ष 2005 में पुलिस में कांस्टेबल के पद पर भर्ती हुआ था, लेकिन एक वर्ष बाद ही उसने सेवा छोड़ दी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उसने स्वेच्छा से त्यागपत्र दिया था या किसी अन्य कारण से अलग हुआ था। इस बिंदु की भी जांच की जा रही है।
आगे की कार्रवाई जारी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है और विस्तृत जांच जारी है। जिन लोगों ने अब तक शिकायत दर्ज नहीं कराई है, उनसे भी सामने आने की अपील की गई है। बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच कर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ठगी का दायरा कितना बड़ा है।



