FakeVoterID – मेरठ में पाकिस्तानी महिला की गिरफ्तारी पर उठे जांच के सवाल
FakeVoterID – मेरठ में पाकिस्तानी नागरिक सबा की गिरफ्तारी और कथित फर्जी वोटर कार्ड के मामले में अब नया विवाद सामने आया है। इस मामले में सबा के अधिवक्ता ने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जिस दस्तावेज को आधार बनाकर गिरफ्तारी की गई, वह असल में किसी अन्य महिला का है। अधिवक्ता का कहना है कि मामले की गहराई से जांच किए बिना ही कार्रवाई की गई, जिससे पूरे घटनाक्रम पर नए प्रश्न खड़े हो गए हैं।

अधिवक्ता ने पेश किया कथित असली वोटर कार्ड
सबा की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता वीके शर्मा ने मीडिया के सामने एक वोटर कार्ड दिखाते हुए कहा कि जिस दस्तावेज को पुलिस ने सबा से जोड़कर पेश किया, वह वास्तव में मेरठ के सठला गांव में रहने वाली एक महिला का है। उनके अनुसार उस वोटर कार्ड पर दर्ज ईपीआईसी नंबर वही है जिसे शिकायत में संदिग्ध दस्तावेज के रूप में बताया गया था।
अधिवक्ता का कहना है कि जांच के दौरान यह सामने आया है कि नाजिया नाम की महिला अपने परिवार के साथ सठला गांव में रह रही है। उन्होंने बताया कि उस महिला के पति पेशे से प्रोफेसर हैं और परिवार लंबे समय से वहीं निवास कर रहा है। अधिवक्ता ने दावा किया कि इस पहचान पत्र का सबा से कोई संबंध नहीं है, फिर भी इसी आधार पर कार्रवाई की गई।
पुलिस की जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
अधिवक्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने मामले की पूरी तरह से पड़ताल किए बिना ही गिरफ्तारी कर ली। उनका कहना है कि यदि संबंधित दस्तावेज का भौतिक सत्यापन और स्थानीय स्तर पर जांच की जाती, तो स्थिति स्पष्ट हो सकती थी। उन्होंने कहा कि केवल शिकायत के आधार पर इतनी बड़ी कार्रवाई करना उचित नहीं माना जा सकता।
अधिवक्ता के अनुसार यदि पुलिस पहले संबंधित व्यक्ति और दस्तावेज की सही पहचान की पुष्टि कर लेती, तो इस तरह का विवाद सामने नहीं आता। उन्होंने कहा कि अब इस पूरे मामले को अदालत में उठाया जाएगा और सभी तथ्यों को विस्तार से रखा जाएगा।
शिकायत से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह मामला तब सामने आया जब रुकसाना खान नाम की महिला ने प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि जली कोठी क्षेत्र में रहने वाली सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया मूल रूप से पाकिस्तान की नागरिक है और कई वर्षों से बिना वैध नागरिकता के भारत में रह रही है।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया था कि सबा का विवाह मेरठ निवासी फरहत मसूद से हुआ था और वर्ष 1993 में पाकिस्तान में एक बेटी के जन्म के बाद वह पाकिस्तानी पासपोर्ट के जरिए भारत आई थी। आरोप यह भी लगाया गया कि भारत आने के बाद उसने विभिन्न दस्तावेजों के माध्यम से अपनी पहचान स्थापित की।
इसी शिकायत को आधार बनाकर प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हुई और बाद में पुलिस ने मामला दर्ज किया।
गिरफ्तारी के बाद शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इस मामले में 16 फरवरी को देहली गेट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके अगले दिन सबा को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत जेल भेज दिया गया। तब से यह मामला कानूनी प्रक्रिया के अधीन है।
अब अधिवक्ता का कहना है कि जिस वोटर कार्ड को सबूत बताया गया, उसमें लगी तस्वीर किसी अन्य महिला की है। उन्होंने कहा कि अदालत में इस विषय को विस्तार से रखा जाएगा और सभी दस्तावेज पेश किए जाएंगे ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
अदालत में उठेगा गलत कार्रवाई का मुद्दा
सबा के पक्ष के अधिवक्ता ने संकेत दिया है कि इस मामले में पुलिस की भूमिका की भी समीक्षा की मांग की जाएगी। उनका कहना है कि यदि बिना पर्याप्त जांच के गिरफ्तारी हुई है तो इसे अदालत के सामने रखा जाएगा।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में दस्तावेजों की सत्यता और पहचान की पुष्टि बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए अदालत में पेश होने वाले सबूत और जांच रिपोर्ट इस पूरे मामले की दिशा तय करेंगे।
इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद मेरठ में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजरें अदालत की आगामी कार्यवाही और आगे की जांच पर टिकी हुई हैं।



