GasCrisis – फिरोजाबाद के कांच उद्योग पर संकट, उत्पादन पर गहरा असर
GasCrisis – उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में कांच उद्योग इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है। गैस आपूर्ति में आई कमी के कारण यहां के करीब 200 छोटे और मध्यम स्तर के उद्योग प्रभावित हुए हैं। कई इकाइयों ने उत्पादन घटा दिया है, जबकि कुछ को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। इसका असर सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर के विभिन्न उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है, जहां कांच के उत्पादों की मांग पूरी नहीं हो पा रही।

कांच की कमी से कारोबारियों की बढ़ी परेशानी
इस संकट का असर अन्य शहरों के कारोबारियों पर भी पड़ रहा है। बेंगलुरु स्थित एक पेय पदार्थ कंपनी के संचालक ने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से कांच की बोतलों की उपलब्धता काफी कम हो गई है। गर्मी के मौसम में जब पेय पदार्थों की मांग बढ़ती है, उसी समय सप्लाई में आई यह कमी व्यापार के लिए चुनौती बन गई है। लागत बढ़ने के कारण कंपनियों को अपने खर्चों में कटौती करनी पड़ रही है, खासकर प्रचार और छूट जैसी गतिविधियों में।
गैस सप्लाई में कटौती बनी मुख्य वजह
विशेषज्ञों के अनुसार, इस स्थिति की मुख्य वजह गैस आपूर्ति में आई कमी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस का वितरण बदला है। इसका सीधा असर उन उद्योगों पर पड़ा है, जो पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं। कांच उद्योग भी उन्हीं में शामिल है, जहां उत्पादन के लिए निरंतर और उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।
फिरोजाबाद में उत्पादन क्षमता पर पड़ा असर
फिरोजाबाद लंबे समय से कांच उद्योग का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां की भट्टियां लगातार उच्च तापमान पर संचालित होती हैं, और एक बार बंद होने पर उन्हें दोबारा चालू करना कठिन और महंगा होता है। गैस की कमी के चलते कई इकाइयों को अपनी उत्पादन क्षमता आधी करनी पड़ी है। इसके कारण बाजार में कांच उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
कीमतों में बढ़ोतरी और नए ऑर्डर प्रभावित
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि कांच के उत्पादों की कीमतों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है। कई कंपनियों ने नए ऑर्डर लेना फिलहाल बंद कर दिया है और विस्तार योजनाओं को भी टाल दिया है। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित हुआ है, बल्कि रोजगार पर भी असर पड़ रहा है, क्योंकि हजारों कामगारों की आय इस उद्योग पर निर्भर करती है।
अन्य उद्योगों पर भी दिख रहा असर
कांच की कमी का असर कई अन्य क्षेत्रों में भी महसूस किया जा रहा है। दवा उद्योग, खाद्य उत्पाद, पेय पदार्थ और सौंदर्य प्रसाधन जैसे क्षेत्रों में कांच की पैकेजिंग का व्यापक उपयोग होता है। ऐसे में इन उद्योगों की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है। कुछ कंपनियों ने पैकेजिंग लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जिससे उनके उत्पादों की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।
आयात पर निर्भरता बनी चुनौती
भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर आधारित है। प्राकृतिक गैस और एलपीजी का अधिकांश हिस्सा विदेशों से आता है, खासकर मध्य-पूर्व के देशों से। ऐसे में वैश्विक स्तर पर किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर देश के उद्योगों पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात पूरी तरह सामान्य नहीं होते, तब तक इस तरह की समस्याएं बनी रह सकती हैं।
जल्द राहत की उम्मीद कम
उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति में कुछ सुधार के संकेत मिले हों, लेकिन इसका असर तुरंत खत्म नहीं होगा। उत्पादन और सप्लाई को सामान्य होने में समय लगेगा। फिलहाल उद्योगों और कारोबारियों को इस चुनौतीपूर्ण दौर में संतुलन बनाए रखने की जरूरत है।



