Leopard Attack in Bijnor: गुलदार ने खेत में काम कर रहे मजदूर को बनाया निवाला, दहशत में डूबा पूरा इलाका
Leopard Attack in Bijnor: बिजनौर के खेतों में रोजाना की तरह काम चल रहा था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मौत झाड़ियों में घात लगाकर बैठी है। इस्लामनगर ग्राम पंचायत के पास एक आदमखोर गुलदार ने अचानक (Human Wildlife Conflict) की ऐसी खौफनाक वारदात को अंजाम दिया कि पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया। यहां खेत में मजदूरी कर रहे एक बेगुनाह ग्रामीण पर जंगली जानवर ने जानलेवा हमला कर उसे बुरी तरह लहूलुहान कर दिया, जिसके बाद से ग्रामीणों के बीच अपनी जान बचाने की जद्दोजहद शुरू हो गई है।

घात लगाकर बैठे शिकारी का खौफनाक वार
घटना उस वक्त की है जब लड्डूवाला निवासी कृष्ण कुमार पुत्र नंदा सिंह, मुरलीवाला निवासी गुरमुख सिंह के खेत में मजदूरी कर रहे थे। उसी दौरान पहले से छिपे हुए गुलदार ने बिजली की रफ्तार से (Wild Animal Attacks) करते हुए कृष्ण कुमार पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस प्रहार से मजदूर को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वह जमीन पर गिर पड़ा। गुलदार के हमले के निशान उसके शरीर पर गहरे जख्म छोड़ गए हैं, जो इस जानवर की आक्रामकता को साफ बयां कर रहे हैं।
मौत को करीब देख गूंज उठी मदद की पुकार
जैसे ही गुलदार ने कृष्ण कुमार को अपने पंजों में दबोचा, घायल मजदूर ने अपनी पूरी ताकत लगाकर मदद के लिए चिल्लाना शुरू किया। उसकी चीखें सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर (Forest Safety Awareness) के साथ मौके की तरफ दौड़े। ग्रामीणों का भारी शोर और बढ़ती संख्या देखकर गुलदार को पीछे हटना पड़ा और वह घने जंगल की ओर भाग निकला। अगर ग्रामीण समय पर न पहुँचते, तो शायद कोई बड़ी अनहोनी घट सकती थी।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा घायल किसान
ग्रामीणों ने आनन-फानन में खून से लथपथ कृष्ण कुमार को पास के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया। डॉक्टर घायल मजदूर का (Medical Emergency Care) के तहत उपचार कर रहे हैं और उसकी हालत पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि उसकी जान बच गई है, लेकिन गुलदार के पंजों के गहरे घाव उसे लंबे समय तक इस भयावह हादसे की याद दिलाते रहेंगे। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर ला दिया है।
पिंजरे की मांग को लेकर वन विभाग पर फूटा गुस्सा
इस हमले के बाद से इस्लामनगर और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल इस कदर है कि लोग अब खेतों में जाने से कतरा रहे हैं। खौफजदा ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द (Leopard Trapping Operation) चलाकर इस आदमखोर जानवर को पकड़ा जाए। लोगों का कहना है कि अगर पिंजरा लगाने में देरी हुई, तो गुलदार किसी बच्चे या अन्य ग्रामीण को अपना शिकार बना सकता है। फिलहाल, ग्रामीणों ने खुद को घरों में कैद करना शुरू कर दिया है।
सराय आलम में बिछाया गया शिकारी को पकड़ने का जाल
बढ़ती शिकायतों और खतरे को देखते हुए सामाजिक वानिकी विभाग ने आखिरकार कार्रवाई शुरू कर दी है। सराय आलम नहर के समीप, जहाँ गुलदार की चहल-कदमी सबसे ज्यादा देखी जा रही थी, वहां विभाग ने (Wildlife Conservation Efforts) के तहत एक बड़ा पिंजरा स्थापित किया है। वन दरोगा विकास कुमार के नेतृत्व में टीम ने इलाके की घेराबंदी कर दी है ताकि इस हिंसक जानवर को पकड़कर आबादी से दूर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जा सके।
हाथी की संदिग्ध मौत से वन विभाग में हड़कंप
एक तरफ गुलदार का आतंक खत्म नहीं हुआ था कि नजीबाबाद की सहानपुर रेंज में एक हाथी का शव मिलने से हड़कंप मच गया। गांव नानू के पास एक वॉटर होल (दैड़) में मृत मिले हाथी की खबर मिलते ही (Forest Department Investigation) की टीमें मौके पर पहुँच गईं। एसडीओ अंशुमान मित्तल और रेंजर राजेश शर्मा ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जेसीबी की मदद से भारी-भरकम हाथी के शव को बाहर निकाला गया, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
रहस्यमयी परिस्थितियों में मिला गजराज का शव
हाथी की मौत कैसे हुई, यह अभी भी एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है। शुरुआती जांच के बाद शव का पोस्टमार्टम किया गया और फिर उसे (Animal Autopsy Procedures) का पालन करते हुए दफना दिया गया। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या यह एक प्राकृतिक मौत थी या इसके पीछे किसी शिकार गिरोह का हाथ है। बिजनौर वन प्रभाग में एक साथ दो बड़ी वन्यजीव घटनाओं ने पर्यावरण प्रेमियों और अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।



